केजरीवाल सरकार पूरी तरह से फेल
   Date28-Apr-2021

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नई दिल्ली द्य 27 अप्रैल।
राजधानी दिल्ली में कोरोना की बेकाबू रफ्तार के बीच दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार को कहा कि आम आदमी पार्टी (आआपा) सरकार का सिस्टम पूरी तरह फेल हो गया है और ऑक्सीजन सिलेंडरों तथा कोविड-19 मरीजों के इलाज के लिए रेमडेसिविर जैसी दवाओं की कालाबाजारी हो रही है। हाईकोर्ट ने केजरीवाल सरकार से कहा कि वह ऑक्सीजन की कालाबाजारी के साथ-साथ रेमडेसिविर और अन्य चिकित्सा आपूर्ति की कमी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करे। कोर्ट ने कहा कि यह सुनिश्चित करने के लिए कड़े कदम उठाए जाने चाहिए कि मेडिकल ऑक्सीजन जो कम से कम लागत पर आती है, उसकी कालाबाजारी या जमाखोरी के कारण कई हजार या लाखों रुपए खर्च न हों।
जस्टिस विपिन सांघी और जस्टिस रेखा पल्ली की बेंच ने अस्पतालों द्वारा ऑक्सीजन और रेमडेसिविर जैसी जरूरी दवाओं की कमी के संबंध में दायर की गई एक याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि दिल्ली सरकार बढ़ते मामलों से निपटने में सक्षम नहीं है। हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार से कहा कि आपका सिस्टम फेल हो गया है, अब यह किसी काम का नहीं रह गया है। ऑक्सीजन की ब्लैक मार्केटिंग अब भी जारी है।
लोग ऑक्सीजन की खरीद कैसे कर रहे हैं? बड़े पैमाने पर जमाखोरी हो रही है और आप कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। कोरोना के बढ़ते मामलों पर हाईकोर्ट ने कहा कि मामलों में भारी उछाल है। आप इससे निपटने में सक्षम नहीं हैं। कोर्ट ने कहा कि यह गिद्धों की तरह बर्ताव करने का वक्त नहीं है।
दिल्ली हाईकोर्ट की तीखी आलोचना के बाद कई अस्पतालों ने बताया कि वे ऑक्सीजन की कमी का सामना कर रहे हैं। अदालत ने दिल्ली सरकार को ऑक्सीजन रिफिलर्स के लिए उचित निर्देश जारी नहीं करने पर भी फटकार लगाई है।
हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार से उन ऑक्सीजन प्लांट को अधिग्रहण करने को कहा है, जो हमारे (कोर्ट) आदेशों के बावजूद सुनवाई में शामिल नहीं हुए। ऐसे ऑक्सीजन रिफिलर्स को हाईकोर्ट ने अवमानना की कार्रवाई करने की भी चेतावनी दी है।
केजरीवाल सरकार ने कोर्ट में कहा कि उनके पास रेमडेसिविर की सीमित आपूर्ति है। इस पर कोर्ट ने जानना चाहा कि क्या आपूर्ति की समस्या पर केंद्रित पोर्टल बना सकते हैं ताकि लोगों की समस्या का समाधान हो। इसके साथ ही कोर्ट ने कहा कि घरों में रह रहे कोरोना मरीजों को रेमडेसिविर नहीं देने का सरकार का आदेश गलत है। यह मरीज का जान लेने जैसा है। जरूरी दवा नहीं देकर आप मरीज की जान ले रहे हैं।