समय आ गया, हम घर के अंदर भी मास्क पहनें
   Date27-Apr-2021

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नीति आयोग में हेल्थ मिनिस्ट्री के मेम्बर डॉक्टर वीके पॉल ने कहा-
नई दिल्ली ठ्ठ 26 अप्रैल (ए)
बढ़ते कोरोना संक्रमण पर सरकारें भी बेबस नजर आ रही हैं। सोमवार को नीति आयोग ने कहा- अब वक्त आ गया है, जब हमें घर के अंदर परिवार के साथ रहते हुए भी मास्क पहनना चाहिए, साथ ही इस बात का भी ध्यान रखें कि मेहमानों को घर पर न बुलाएं। नीति आयोग में हेल्थ मिनिस्ट्री के मेम्बर डॉक्टर वीके पॉल ने कहा- डर या भय न फैलाएं, इससे हालात सुधरने की बजाए और बिगड़ सकते हैं। अच्छी बात यह है कि अब लोग घर में भी मास्क लगाने लगे हैं। डॉ. पॉल ने कहा कि रिसर्च बताती है कि अगर एक व्यक्ति फिजिकल डिस्टेंसिंग न अपनाए तो वह 30 दिन में 406 लोगों को संक्रमित कर सकता है। अगर कोरोना पॉजिटिव व्यक्ति अपना फिजिकल एक्सपोजर 50 प्र. तक कम कर दे तो एक महीने में 15 लोग लोगों को ही इन्फेक्ट कर पाएगा। होम आइसोलेशन में अनइन्फेक्टेड व्यक्ति ने मास्क लगाया है और इन्फेक्टेड व्यक्ति ने मास्क नहीं लगाया है तो इन्फेक्शन का खतरा 30 प्र. रहेगा। अगर इन्फेक्टेड और अनइन्फेक्टेड व्यक्ति, दोनों ने मास्क लगाया हो तो इन्फेक्शन का खतरा घटकर 1.5 प्र. ही रहेगा। सरकार के मुताबिक, पूरे देश में अब तक वैक्सीन के 14 करोड़ से ज्यादा डोज दिए जा चुके हैं। 1 करोड़ से ज्यादा लोगों को दूसरा डोज भी लग चुका है। झारखंड, गुजरात, छत्तीसगढ़ जैसे 12 राज्यों ने अपने 90 प्र. से ज्यादा हेल्थवर्कस को वैक्सीन का पहला डोज दे दिया है। ऑक्सीजन की कमी से जुड़े एक सवाल पर कहा गया कि सरकार ने अस्पतालों को ऑक्सीजन का सही तरीके और सावधानी से इस्तेमाल करने को कहा है। हमें ऑक्सीजन का लीकेज भी रोकना होगा।
पीरिएड्स के दौरान वैक्सीनेशन सुरक्षित-
महिलाओं से जुड़े एक जरूरी सवाल पर सरकार ने कहा है कि मासिक धर्म या माहवारी (पीरिएड्स) के दौरान भी वैक्सीन लगवाना सुरक्षित है। यानी वैक्सीन का पीरिएड्स से कोई संबंध नहीं है। बता दें कि इस मामले को लेकर कई दिनों से सोशल मीडिया पर बहस छिड़ी हुई है, जिसमें यह अफवाह फैलाई जा रही थी कि पीरियड्स के दौरान महिलाओं के लिए वैक्सीन लगवाना नुकसानदायक है। सरकार ने बताया कि महाराष्ट्र, उत्तरप्रदेश, कर्नाटक, केरल, राजस्थान, छत्तीसगढ़, गुजरात और तमिलनाडु में एक लाख से ज्यादा एक्टिव केस हैं।
डरने की जरूरत नहीं-
सरकार ने कहा है कि महामारी से डरने की जरूरत नहीं है। इससे फायदे की बजाय नुकसान ही होगा। डॉक्टर पॉल के मुताबिक, भारत में मेडिकल यूज के लिए पर्याप्त ऑक्सीजन मौजूद है, लेकिन उन्होंने माना कि इसको ट्रांसपोर्ट करना यानी अस्पतालों तक पहुंचाना बड़ी चुनौती है। उन्होंने कहा कि कुछ लोग सिर्फ डर की वजह से हॉस्पिटल्स में बेड बुक करा रहे हैं। सरकार ऐसे लोगों से अपील करती है कि वे सिर्फ डॉक्टर की सलाह पर ही अस्पताल में भर्ती हों। उन्होंने कहा कि रेमडेसिविर और टोसिलिजुमैब जैसी दवाओं का इस्तेमाल सिर्फ डॉक्टर की सलाह पर ही किया जाना चाहिए।