१० लाख बच्चे कटे होंठों की सर्जरी के इंतजार में - डॉ. लाहौटी
   Date19-Apr-2021

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चाइल्ड कंजर्वेशन फाउंडेशन की 42वीं ई-संगोष्ठी
रविवार ठ्ठ 18 अप्रैल (स्वदेश समाचार)
कटे हुए होंठ एवं तालू के साथ देश में दस लाख बच्चे इस समय सर्जरी की प्रतीक्षा में हैं। भारत में प्रति एक हजार से बारह सौ बच्चों के मध्य एक बालक इस तरह की शारीरिक न्यूनता के साथ जन्म लेता है। इन बालकों को इस समस्या से मुक्त किया जा सकता है, लेकिन कतिपय अंधविश्वास एवं जागरुकता के अभाव में लोग सर्जरी के लिए आगे नहीं आते हैं। छह हजार से ज्यादा सफल सर्जरी करने वाले ख्यातिनाम सर्जन डॉ. कपिल लाहौटी ने चाइल्ड कंजर्वेशन फाउंडेशन की 42वीं ई-संगोष्ठी को संबोधित करते हुए यह बात कही। संगोष्ठी को सामाजिक न्याय एवं आधिकारिता मंत्रालय भोपाल स्थित सीआरसी के नित्यानंद समल ने भी संबोधित किया।
डॉ. लाहौटी के अनुसार कटे होंठ एवं तालू बालकों के मानसिक एवं भावनात्मक विकास में बाधक हैं, इसलिए जितना जल्द हो, ऐसे बालकों की चरणबद्ध सर्जरी के लिए अभिभावकों को आगे आना चाहिए। उन्होंने बताया कि इस समस्या के साथ बालक का जन्म होना किसी दैवीय इच्छा का नतीजा नहीं है, जैसा कि हमारे समाज में यह प्रचलित है।़
उन्होंने बताया कि आनुवांशिक कारणों के साथ गर्भ के समय माँ में फोलिक एसिड एवं आयरन की कमी, विलंब से गर्भावस्था की पहचान, समगोत्रीय विवाह संबंध एवं पोषण न्यूनता के चलते ऐसे बच्चों का जन्म होता है।
डॉ. लाहौटी ने बताया कि प्रतिवर्ष भारत में 35 से 45 हजार बच्चे इस शारीरिक न्यूनता के साथ पैदा होते हैं, लेकिन अधिकांश मामलों में अभिभावकों के द्वारा ही पर्देदारी की जाती है क्योंकि वे इसे दैवीय इच्छा मानकर चलते है। डॉ. लाहौटी के अनुसार जन्म के तत्काल बाद ऐसे बच्चों की जानकारी सक्षम चिकित्सकों को साझा की जानी चाहिए। 16 बर्ष तक चरणबद्ध तरीके से ऐसे बच्चों की पांच हिस्सों में सर्जरी की जाती है। 3 से 6 माह में होंठ की पहली सर्जरी आरम्भ होती है। इसके बाद डेढ़ साल, दस, बारह एवं सोलह साल की आयु में सर्जरी का काम पूरा होता है। इसके बाद कटे हुए होंठ या तालू वाले बच्चे सामान्य बच्चों की तरह व्यवहार कर सकते हैं।
डॉ. लाहौटी ने बताया कि भारत में बड़ी समस्या यह है कि अभिभावक इस सतत सर्जरी प्रक्रियाओं का पालन नहीं करते हैं। इसके पीछे आर्थिक, सामाजिक कारण भी रहते हैं। उन्होंने बताया कि ऐसे बच्चों की सर्जरी के समानांतर सतत काउंसलिंग भी एक बहुत बड़ा कार्य है, क्योंकि शारीरिक न्यूनता बच्चों के बीच एक स्वाभाविक हीनता की स्थिति निर्मित करता है। डॉ. लाहौटी ने बताया कि भोपाल, इंदौर, ग्वालियर एवं बैतूल के पाडर में कटे होंठों की सर्जरी की सुविधा उपलब्ध है।
सीआरसी भोपाल से जुड़े नित्यानंद समल ने बताया कि 21 तरह की दिव्यांगता से लडऩे के लिए उनका मंत्रालय संकल्पबद्ध है, इसके लिए सर्जरी एवं कृतिम अंग निर्माण के काम को देशभर में व्यवस्थित किया गया है। देशभर में सत्रह सीआरसी के अलावा हर जिले में डीडीआरसी बनाए गए हैं, जहां फिजियोथेरेपी सहित अन्य सुविधाएं उपलब्ध हैं।
चाइल्ड कंजर्वेशन फाउंडेशन के अध्यक्ष डॉ. राघवेंद्र शर्मा ने कहा कि कटे होंठ या दिव्यांगता के मामलों में सर्जरी एवं पुनर्वास के काम में लगे विशेषज्ञ ईश्वरीय कार्य को पूर्ण करने वाले वंदनीय शख्स हैं।