अनियंत्रित होते हालात...
   Date01-Apr-2021

vishesh lekh_1  
जैसे-जैसे वैश्विक महामारी कोरोना का संक्रमण अनियंत्रित होकर मरीजों का ग्रॉफ तेजी से बढ़ा रहा है, उससे इस आशंका को बल मिलने लगा है कि अनियंत्रित होती यह कोरोना की दूसरी लहर क्या बद से बदतर स्थिति निर्मित करने लगी है..? क्योंकि इस बढ़ते संक्रमण के बीच दो तरह की आशंकाएं एक साथ जन्म ले रही है... पहली तेजी से दूसरी लहर में फैलता कोरोना का यह संक्रमण कितने जीवन के लिए विनाश लीलाएं ला रहा है... इसका कोई दावे के साथ यह नहीं कह सकता कि फिलहाल यह लहर कहां जाकर रुकेगी..? दूसरा संक्रमण की रफ्तार को देखकर सरकार के साथ ही सामान्यजन और उद्योग जगत को इस बात की आशंकाएं सताने लगी है कि क्या इस महामारी से लडऩे का अंतिम उपाय पुन: तालाबंदी के जरिये ही तलाशा जाएगा... जो भी स्थिति बने दोनों में ही मरण तो वास्तव में उस रोज कमाने-खाने वाले असंगठित क्षेत्र के श्रमिक-मजदूर और गरीबों का होना है... जिनके पास कल का तो छोड़ो, आज के भी गुजर-बसर का ठीकाना नहीं... ऐसे में यह स्वाभाविक है कि जब तक शत-प्रतिशत आबादी तक टीकाकरण का अभियान नहीं पहुंचता, तब तक हर किसी को सतर्कता और हर तरह की सावधानियां बरतनी होगी... क्योंकि 2021 में पहली बार एक दिन में 312 से ज्यादा मौतों का आंकड़ा सोमवार को सामने आया, मंगलवार को इससे भी बढ़कर यह संख्या 355 के पार पहुंच गई... संक्रमण जिस तेजी से घटने लगा है, उस तेजी से मौतों का ग्रॉफ थमने का नाम नहीं ले रहा, बल्कि बढ़ रहा है... रविवार को जहां संक्रमण 68000 को पार कर गया था, वहीं संक्रमण मंगलवार को 60000 के नीचे अर्थात् 56000 पर आ गया... लेकिन उस मान से मृतकों की संख्या ढाई से तीन गुना बढ़ गई... महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ में तो स्थिति और भी बेकाबू हो चुकी है... दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने स्पष्ट रूप से अंतिम चेतावनी आमजन को सावधानी बरतने की दी है, अगर इस पर अमल नहीं हुआ तो महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ में कम से कम 15 दिन के लिए कभी भी तालाबंदी की घोषणा हो सकती है... महाराष्ट्र में स्थिति किस तरह से बद से बदतर है... इस बात का प्रमाण है कि मध्यप्रदेश की सीमा से लगे महाराष्ट्र से बसों के आवागमन को 15 अप्रैल तक प्रतिबंधित कर दिया गया है... अगर केन्द्र सरकार ने बुधवार को यह एडवाइजरी जारी की है कि कोरोना संक्रमण राज्यों में तेजी से बढ़ते मामलों को देखकर हर किसी को सतर्क रहना होगा... क्योंकि हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं... इस दूसरी लहर का असर पूरे देश को एक ऐसे विकट संकट के भंवर में धकेलने का कारण बन सकता है... जिसमें हमें अनेक मोर्चों पर एक साथ लड़ाई लडऩा पड़ेगी... अत: उससे बचने के लिए सावधनी और मास्क जरूरी है...
दृष्टिकोण
उपचार के लिए भटकते लोग...
मध्यप्रदेश में कोरोना की संक्रमण स्थिति नाजुक दौर में प्रवेश कर चुकी है... इसका संकेत इस बात से समझा जा सकता है कि राज्य सरकार को कोरोना उपचार के संबंध में नई गाइड लाइन को जारी करना पड़ा है... आखिर संक्रमणग्रस्त लोगों को उचित उपचार सरकारी एवं निजी अस्पतालों में किस तरह से नियम सम्मत मिल सके, इसको लेकर लंबे समय से एक झोल दिखाई देता रहा है... कई बार जांच रिपोर्टों में भी भयावह गड़बड़ी सामने आई है... संक्रमण के आंकड़े छुपाने और सुविधा के मान से उसे घटाने-बढ़ाने का खेल भी उजागर हो चुका है... चुनाव की आहट के साथ कोरोना के गायब होने और चुनाव जाते ही संक्रमण के मामले बढ़ जाने का यह स्वास्थ्य समीकरण हर किसी के गले आसानी से नहीं उतरता... ऐसे में अगर मध्यप्रदेश की शिवराज सरकार ने तेजी से बढ़ते संक्रमण के आंकड़ों को ध्यान में रखकर शीघ्र गंभीर मरीजों का उपचार अस्पतालों में करवाने का जो नियम जारी किया है, उसका पालन करवाना आसान नहीं है... क्योंकि मध्यप्रदेश में सक्रिय मामले 16000 के पार पहुंच चुके हैं... ऐसे में कोरोना के आंशिक लक्षण वाले मरीजों को कोविड सेंटर अर्थात् कोरोना उपचार के लिए बनाए गए अस्पतालों में करने, जबकि कोरोना के प्राथमिक स्तर वाले मरीजों को घर में ही पृथकवास (क्वारेंटाइन) करके सात तरह की गोलियों के द्वारा उपचार की रणनीति बनाई है... सही मायने में कोरोना के उपचार की यह गाइड लाइन एक तो गंभीर और सामान्य मरीजों के बीच एक दूरी बनाए रखने की अच्छी पहल है... साथ ही इससे इन संक्रमित मरीजों के परिजनों को भी राहत मिलेगी, जो बिना वजह कोरोना संक्रमण का निशाना उपचार के दौरान बन जाते थे... लेकिन ये तीन-चार तरह की जो उपचार स्टेज बनाई गई है, इसका पालन करवाना प्रशासनिक अमले इन स्वास्थ्य विभाग के लिए आसान नहीं है...