विवि के दल ने की 2500 वर्ष पुराने शैलचित्रों की खोज
   Date03-Mar-2021

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उज्जैन ठ्ठ 2 मार्च (स्वदेश समाचार)
विक्रम विश्वविद्यालय के प्राचीन भारतीय इतिहास संस्कृ ति व पुरातत्व विभाग के प्राध्यपक व छात्रों के दल ने करीब 2500 वर्ष पुराने शैलचित्रों की खोज की हैं। विवि का दल 25 से 27 फरवरी तक नरसिंहपुर जिले की करेली तहसील के बैनेकी ग्राम की दुर्गम पहाड़ी इलाकों से उक्त शैलाश्रयों को खोज कर लाया है। टीम को करीब सात शैलचित्र मिले हैं। इनका नामाकरण सहित कॉपीराइट संबंधी अन्य प्रक्रिया भी की जा रही है। विवि कु लपति अखिलेश पाण्डे व कु लसचिव यूएन शुक्ला ने कहा कि अभी प्रारंभिक तौर पर खोज की गई। उक्त क्षेत्र के साथ मालवा क्षेत्र में भी ऐसी ऐतिहासिक व प्राचीन धरोहरों को तलाशने व सहेजने का हर संभव प्रयास किया जाएगा। विवि के दल में डॉ. रितेश लोट, डॉ. हेमंत लोदवाल, छात्र सुधीर कुमार मरकाम व शुभम केवलिया शामिल थे।
क्या है शैलचित्रों में- पत्रकारों से चर्चा के दौरान विभाग प्रमुख आरके अहिरवार ने बताया कि शैलाश्रयों के चित्र लाल व सफेद रंग से निर्मित है। हैमेटाइट पाषाण भी प्राप्त हुए है। इन चित्रों में मानव आकृतियों की का चित्रण, युद्ध करते हुए योद्धाओं, पशु आकृतियों का चित्रांकन, पक्षियों का अंकन आदि है। जिस क्षेत्र में यह शैलचित्र मिले है। वहां पहुंचने के लिए टीम को करीब 10 किलोमीटर पैदल यात्रा की। यहां आज भी जंगली जानवर का आवास है। पास ही दूरी पर बिनैकी ग्राम है। यहां निवास करने वाले लोग भी परंपरागत रूप से कृषि व शिकार कर रहे। यह मुख्य धारा से नहीं जुड़ सकते है। साधानों का काफी अभाव हैं।