आत्मनिर्भर मप्र के लिए 4 लक्ष्य-
   Date03-Mar-2021

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सुशासन, रोजगार व अर्थव्यवस्था,भौतिक अधोसंरचना, शिक्षा व स्वास्थ्य
वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने मप्र सरकार के वित्त वर्ष 2021-22 के लिए मंगलवार को विधानसभा में बजट पेश किया... वार्षिक बजट में आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश पर सबसे ज्यादा जोर दिया है... अपने बजट भाषण की शुरुआत में श्री देवड़ा ने कहा कि अर्जुन के लक्ष्य चिडिय़ा की आंख की तरह राज्य सरकार का लक्ष्य आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश है.., और इसी के अनुरूप बजट प्रावधान किए गए हैं... बजट में आत्मनिर्भर मप्र के लिए 4 लक्ष्य- सुशासन, रोजगार व अर्थव्यवस्था,भौतिक अधोसंरचना, शिक्षा व स्वास्थ्य पर जोर दिया है...श्री देवड़ा ने पेपरलेस बजट की अवधारणा के तहत बजट भाषण पढ़ा...कोरोना संकटकाल से उभरने के प्रयास भी बजट प्रावधान में दिखाई दिए...बजट का आकार करीब 2 लाख 40 हजार करोड़ रुपयों के पार है...
भोपाल ठ्ठ 2 मार्च (स्वदेश समाचार)
मध्यप्रदेश के वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने आज कहा कि कोरोना जैसे अभूतपूर्व संकट के बावजूद राज्य सरकार के बजट में सभी वर्गों के हितों का ध्यान रखकर नए कराधान का प्रावधान नहीं किया गया है। श्री देवड़ा ने विधानसभा में वित्त वर्ष 2021- 22 के लिए दो लाख 41 हजार करोड़ रुपयों के प्रावधान वाले वार्षिक बजट को पेश करने के बाद विधानसभा भवन के सभागार में संवाददाताओं से चर्चा की । इस दौरान वित्त विभाग की ओर से पेश किए गए प्रस्तुतिकरण के जरिये बजट प्रावधानों के बारे में भी बताया गया।
श्री देवड़ा ने कहा कि कोरोना जैसे अभूतपूर्व संकट से सिर्फ हमारा राज्य ही नहीं, पूरा देश प्रभावित हुआ है और इस वजह से राजस्व प्राप्तियां तथा आर्थिक गतिविधियां प्रभावित हुई हैं। इसके बावजूद आत्मनिर्भर भारत और इसी से प्रेरित आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश की परिकल्पना को मूर्त रूप देने के उद्देश्य से बजट में प्रावधान किए गए हैं। इसमें जहां सभी वर्गों के हितों का ध्यान रखा गया है, वहीं आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश के लिए ढांचागत सुविधाओं के विकास तथा शिक्षा, स्वास्थ्य और सुशासन पर ध्यान देते हुए उनके लिए बजट प्रावधान किए गए हैं।
बजट में 50 प्रतिशत से अधिक धनराशि तनख्वाह, पेंशन और इसी तरह के खर्च पर होने संबंधी सवालों के जवाब में वित्त मंत्री के साथ मौजूद वित्त विभाग के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि यह बात सच है, लेकिन जब हम शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में व्यय करते हैं तो चिकित्सकों, नर्सों और अन्य कर्मचारियों के साथ ही शिक्षकों आदि की तनख्वाह पर भी व्यय करना पड़ेंगे। यह हमारे राज्य में ही नहीं, देश और विदेशों में भी होता है। इसलिए इस व्यय को व्यर्थ नहीं माना जा सकता है। उन्होंने कहा कि विकासात्मक कार्यों में तनख्वाह प्रमुख खर्च है।
वित्त मंत्री की ओर से इस सवाल का जवाब तत्काल नहीं मिल पाया कि मध्यप्रदेश सरकार को पिछले एक दो वर्षों के दौरान केंद्र सरकार से कितनी धनराशि प्राप्त होना थी और कितनी राशि प्राप्त हुई। अलबत्ता उनके साथ मौजूद अधिकारी ने यह बताया कि कोरोना संकट के कारण उपजी स्थितियों के चलते हाल ही में जीएसटी कौंसिल की बैठक में तय किया गया था कि राज्य सरकार वित्तीय संस्थाओं से स्वयं ऋ ण राशि लें और उन्हें चुकाने की व्यवस्था करें।
श्री देवड़ा के एक घंटे से अधिक समय तक चले बजट भाषण में कोरोना के अभूतपूर्व संकट के कारण राजस्व प्राप्तियां कम होने और केंद्र सरकार से भी राज्य का पर्याप्त हिस्सा नहीं मिलने की झलक दिखाई दी। इसके बावजूद बजट में नए करों का प्रावधान या मौजूदा करों की दर बढ़ाने का प्रावधान नहीं किया गया है। वित्त मंत्री ने कहा कि बजट में कुल विनियोग की राशि 2,41,375 करोड़ रुपए है। इसमें से 1,72,971 करोड़ रुपए राजस्व व्यय और 44,152 करोड़ रुपए पूंजीगत व्यय के तहत प्रस्तावित की गई है। उन्होंने कहा कि सामाजिक आर्थिक उत्थान की योजनाओं के लिए वर्ष के दौरान समग्र रूप से 1,12,521 करोड़ रुपयों का प्रावधान किया गया है। श्री देवड़ा ने वर्ष के दौरान होने वाले शुद्ध लेनदेन का जिक्र करते हुए कहा कि कुल प्राप्तियां 2,15,954 करोड़ रुपए और कुल व्यय 2,17,123 करोड़ रुपए होने का अनुमान लगाया गया है। इस तरह शुद्ध लेनदेन 1,169 करोड़ रुपए ऋ णात्मक है और अंतिम शेष 5,465 करोड़ रुपए रहने की संभावना है। वित्त मंत्री ने वित्त संबंधी आंकड़े पेश करते हुए कहा कि 15वें वित्त आयोग की अनुशंसा अनुसार वर्ष में राजकोषीय घाटे की सामान्य सीमा 4 प्रतिशत प्रस्तावित है। इसके अलावा ऊर्जा के क्षेत्र में कतिपय सुधारों के जरिये 0.5 प्रतिशत की अतिरिक्त सीमा स्वीकृत की जा सकेगी। वर्ष के दौरान राजकोषीय घाटा 50938 करोड़ रुपए अनुमानित है, जो कि राज्य के सकल घरेलु उत्पाद का 4.5 प्रतिशत है। उन्होंने कहा कि इस वर्ष 8293 करोड़ रुपए रुपयों का राजस्व घाटा अनुमानित है। इस संबंध में वे सदन में अलग से वक्तव्य पेश करेंगे। उन्होंने बताया कि वर्ष 2021-22 के दौरान मध्यप्रदेश को केंद्रीय करों की लगभग 2000 करोड़ रुपयों की अतिरिक्त राशि प्राप्त होने की संभावना है। उन्होंने बजट भाषण के अंत में यह भी कहा है कि उन्हें इस बात को स्वीकार करने में कोई संकोच नहीं है कि राज्य के विकास व समृद्धि के लिए अभी बहुत कुछ करना शेष है।