पर्यावरण को बचाने हेतु गोबर से बनी लकड़ी की होली का दहन
   Date29-Mar-2021

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गणेश गौशाला समिति के आह्वान पर
खंडवा ठ्ठ 28 मार्च (स्वदेश समाचार)
इस बार होलिका दहन के लिए गौ-काष्ठ और कंडों का उपयोग किया जा रहा है। शहर के गणेश गौशाला समिति के आह्वान पर शहर की सामाजिक और धार्मिक संस्थाओं ने भी इस बार गौ-काष्ठ से होलिका दहन में सहभागिता दिखाई दे रही है, जहां पर कंडों और गोबर से बनी लकडिय़ों यानी गौ-काष्ठ से होली जलाने की शुरुआत कुछ सालों पहले हो चुकी है। इसके जरिए पेड़ों को कटने से बचाने का भी काम हो रहा है। शहर में प्रदूषण को रोकने के लिए इस बार लकड़ी की नहीं, बल्कि गोबर से बनी लकड़ी से होलिका का दहन करेंगे। नगर में ब्राह्मणपुरी क्षेत्र के अलावा भी कई जगह गोबर के कंडों से होली जलाने शुरुआत हुई है। होली के आयोजकों का कहना है कि इस साल हम लोग होली दहन के दिन पेड़ों को न काटेंगे और न ही कटने देंगे की कसम खाएंगे और खिलवाएंगे। दहन के लिए लकडिय़ों का इस्तेमाल करते रहे, तो पेड़ों की बलि चढ़ती रहेगी। इससे पर्यावरण संतुलन बिगड़ेगा। बाजार में लकड़ी 900 रुपए प्रति क्विंटल के भाव से मिलती है। गौ-काष्ठ 700 रुपए प्रति क्विंटल के भाव से मिलती है। गौ-काष्ठ खरीदने पर प्रति क्विंटल 200 रुपए बचेंगे। इसका फायदा ये भी है कि लकडिय़ों की अपेक्षा कंडों और गोबर से बनी लकडिय़ों में लगी आग ज्यादा देर तक जलती रहती है। होली के बाजार सजे हुए हैं। वक्त के साथ होली मनाने का तरीका भी काफी बदल रहा है। लोग ईकोफ्रेंडली हो रहे हैं। होलिका दहन के लिए गौ-काष्ठ व गोबर से निर्मित अन्य सामग्री शहर की गणेश गौशाला में उपलब्ध है। लोग पर्यावरण को लेकर जागरूक हो रहे हैं। खंडवा में होली का त्योहार धूमधाम से मनाया जा रहा है। सुबह से लेकर दोपहर तक और शाम को भी पूजा-अर्चना की गई। महिलाओं ने व्रत रखा और पूजा-अर्चना की। शाम को होलिका दहन किया गया।