बच्चों में संस्कार विकसित करने में शिक्षकों की महती भूमिका-परमार
   Date27-Mar-2021

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भोपाल ठ्ठ 26 मार्च (ब्यूरो)
स्कूल शिक्षा राज्यमंत्री इंदरसिंह परमार ने कहा कि हमारे देश की परम्परा में शिक्षक महती भूमिका निभाते हैं और बच्चों में संस्कार विकसित करते हैं। उक्त उद्गार इंदरसिंह परमार ने आज शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम अंतर्गत प्रारंभिक बाल्यावस्था शिक्षा एवं बच्चों की बुनियादी साक्षरता हेतु प्रशिक्षण कार्यक्रम का मंत्रालय में लोकार्पण अवसर पर व्यक्त किए।
श्री परमार ने कहा कि मानव का सर्वाधिक मानसिक विकास 6 वर्ष तक की आयु तक होता है, इसलिए आज हम बच्चों की बुनियादी शिक्षा और बाल्यावस्था शिक्षा पर शिक्षकों के लिए दो प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रारंभ कर रहे हैं। ये दोनों कार्स शिक्षकों एयर विभाग के साथ ही समाज के लिए भी बेहद उपयोगी होंगे। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति में बड़े परिवर्तन के साथ नई चुनौतियों को भी बदलना होगा। नई शिक्षा नीति में कमी को घटाने का प्रयास किया है। शिक्षकों को प्रशिक्षित करने की आवश्यकता है। शिक्षक अपने आपको ढालने का प्रयास करेंगे। उन्होंने कहा कि शिक्षक ही जीवन में बदलाव ला सकते हैं। बुनियादी शिक्षा का आधार है। शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। भावी भारत की नींव तैयार कर नई शिक्षा नीति के अंतर्गत प्रदेश को शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणी बनाने में महत्वपूर्ण साबित होगी।
प्रमुख सचिव स्कूल शिक्षा श्रीमती रश्मि अरुण शमी ने कहा कि बच्चों के मस्तिष्क का विकास छोटी उम्र में ही होता है। इन्हें प्रारंभ से ही सही शिक्षा के संदर्भ और महत्व की विस्तृत जानकारी दी जाना होगी। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा को एक महत्वपूर्ण घटक के रूप में शामिल किया गया है। प्राथमिक कक्षाओं में प्रवेश के पहले बच्चों को स्कूली शिक्षा के लिए तैयार करने की आवश्यकता होती है। नई शिक्षा नीति 2020 में 3-6 आयु वर्ग के बच्चों को नए ढांचे में शामिल कर प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा से संबंधित एक महत्वपूर्ण लक्ष्य भी दिया गया है। इसके अनुसार वर्ष 2030 तक सार्वभौमिक गुणवत्तापूर्ण प्रारंभिक शिक्षा के प्रावधान को प्राप्त करना है।