अगर किसी बैंक ने ब्याज पर ब्याज वसूला है, तो वह लौटाना होगा
   Date24-Mar-2021

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सुप्रीम कोर्ट ने मोरेटोरियम की अवधि बढ़ाने से इनकार किया, कहा- पूरी तरह से ब्याज माफी भी संभव नहीं
नई दिल्ली ठ्ठ 23 मार्च (ए)
लोन मोरेटोरियम मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने बैंकों को ज्यादा और ग्राहकों को थोड़ी राहत दे दी है। कोर्ट ने साफ कहा कि मोरेटोरियम की अवधि 31 अगस्त से ज्यादा नहीं बढ़ाई जा सकती, ना ही मोरेटोरियम अवधि के दौरान ब्याज पर ब्याज दिया जाएगा। कोर्ट ने कहा कि अगर किसी बैंक ने ब्याज पर ब्याज वसूला है, तो वह लौटाना होगा।
कोर्ट ने कहा कि सरकार को आर्थिक फैसले लेने का अधिकार है, क्योंकि महामारी के चलते सरकार को भी भारी आर्थिक नुकसान हुआ है। हम सरकार को पॉलिसी पर निर्देश नहीं दे सकते। हालांकि, रिजर्व बैंक जल्द ही इस पर राहत का ऐलान करेगा। जस्टिस अशोक भूषण, जस्टिस आर. सुभाष रेड्डी और जस्टिस एमआर शाह की बेंच ने यह फैसला दिया।
यह वही मामला है, जिसमें सरकार ने बैंक कर्जदारों को ईएमआई भुगतान पर बड़ी राहत दी थी। दरअसल, पिछले साल देश के सेंट्रल बैंक आरबीआई ने एक मार्च से 31 मई तक कर्ज देने वाली कंपनियों को मोरेटोरियम देने की बात कही थी, जिसे 31 अगस्त तक बढ़ाया भी गया। जस्टिस अशोक भूषण की अध्यक्षता वाली बेंच ने बैंकों को भी बड़ी राहत दी है। अब बैंक डिफॉल्ट खातों को एनपीए घोषित कर सकते हैं, जिस पर पिछले साल कोर्ट ने रोक लगा दी थी। सरकार के इस प्रस्ताव में 2 करोड़ रुपए तक के एमएसएमई लोन, एजुकेशन लोन, होम लोन, क्रेडिट कार्ड बकाया, कार-टू व्हीलर लोन और पर्सनल लोन शामिल हैं। इसका पूरा भार सरकार के ऊपर आएगा, जिसके लिए सरकार ने करीब 6 हजार से 7 हजार करोड़ रुपए खर्च किए।
तीन महीने के लिए था मोरेटोरियम, बाद में 6 महीने कर दिया गया- कर्ज भुगतान पर राहत देने के बाद आरबीआई ने बैकों से कहा कि वे लोन का वन टाइम रिस्ट्रक्चरिंग करें और इसे एनपीए घोषित न करें। इसके तहत उन्हीं कंपनियों और कर्जदारों को शामिल किया जाए, जो 1 मार्च 2020 से 30 से ज्यादा दिन तक डिफॉल्ट नहीं हुए हैं। कॉर्पोरेट कर्जदारों के लिए बैंक 31 दिसंबर 2020 तक रिज्योल्यूशन प्लान लाएं और 30 जून 2021 तक लागू करें। 22 मई को आरबीआई ने अपनी एमपीसी बैठक में कहा था कि लोन मोरेटोरियम को तीन महीने के लिए बढ़ाया जा रहा है।