नई बिरादरी सामने आई 'आंदोलनजीवी परजीवीÓ
   Date09-Feb-2021

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सुधारों को मौका दें और सभी मिलकर देश को आगे बढ़ाएं
नई दिल्ली ठ्ठ 8 फरवरी (स्वदेश समाचार)
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को राज्यसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण के धन्यवाद प्रस्ताव पर तीन दिन तक चली चर्चा का जवाब दिया। प्रधानमंत्री ने तीनों कृषि कानूनों पर चल रहे किसान आंदोलन को वापस लेने की अपील करते हुए दोहराया कि उनकी सरकार गरीबों को समर्पित सरकार है और गरीबी उन्मूलन के लिए कृषि सुधार जरूरी है। प्रधानमंत्री ने आंदोलनकारियों को आड़े हाथ लेते हुए कहा कि कहा- 'हम लोग कुछ शब्दों से परिचित हैं- श्रमजीवी, बुद्धिजीवी। मैं देख रहा हूं कि पिछले कुछ समय से इस देश में नई जमात पैदा हुई है। एक नई बिरादरी सामने आई है- आंदोलनजीवी। आप देखेंगे कि आंदोलन चाहे वकीलों का हो, स्टूडेंट्स का हो, मजदूरों का हो, हर आंदोलन में ये जमात नजर आएगी। ये आंदोलन के बिना जी नहीं सकते। हमें इन्हें पहचानना होगा।Ó श्री मोदी ने देते हुए कहा कि कि देश में 12 करोड़ किसानों के पास दो एकड़ से भी कम भूमि है और उन्हें सरकार द्वारा दी जा रही सहायता का कोई लाभ नहीं मिल पाता है। सरकार का इरादा इन किसानों तक पहुंचना है। उन्होंने कहा कि कृषि सुधार हमेशा से ही पिछली सरकारों की भी प्राथमिकता में रहे हैं। उन्होंने इसके लिए पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री और चौधरी चरण सिंह का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि किसानों को अपना आंदोलन वापस ले लेना चाहिए। कोई कानून अंतिम नहीं है। इनमें सुधार की व्यापक गुंजाइश होती है और बाद में भी सुधार हो सकेंगे। उन्होंने आश्वस्त किया कि एक बार कानूनों के लागू हो जाने के बाद, इनमें जो भी कमी होगी, वह दूर कर ली जाएगी।
श्री मोदी ने कहा कि आंदोलन करना किसानों का अधिकार है और सरकार उनके साथ लगातार बातचीत कर रही है तथा बातचीत में कभी तनाव भी पैदा नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि वह किसानों से प्रार्थना करते हैं कि वे बुजुर्गों को आंदोलन स्थलों से घर ले जाएं और सरकार के साथ बात करें। किसान आंदोलन पर सदन में हुई चर्चा का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा- सदन में किसान आंदोलन की भरपूर चर्चा हुई है। ज्यादा से ज्यादा समय जो बात बताई गई, वो आंदोलन के संबंध में बताई गई। किस बात को लेकर आंदोलन है, उस पर सब मौन रहे। जो मूलभूत बात है, अच्छा होता कि उस पर भी चर्चा होती।
मोदी ने कहा- 'ऐसे आंदोलनजीवी सब जगह पहुंचकर आइडियोलॉजिकल स्टैंड ले लेते हैं। नए-नए तरीके बताते हैं। ये अपना आंदोलन खड़ा नहीं कर पाते। किसी का आंदोलन चल रहा तो वहां जाकर बैठ जाते हैं। ये सारे आंदोलनजीवी परजीवी होते हैं।Ó
देश में नया एफडीआई - फॉरेन डिस्ट्रक्टिव आइडियोलॉजी-मोदी ने कहा- 'देश प्रगति कर रहा है और हम फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट की बात कर रहे हैं, लेकिन बाहर से एक नया एफडीआई नजर आ रहा है। ये नया एफडीआई है- फॉरेन डिस्ट्रक्टिव आइडियोलॉजी। इस एफडीआई से देश को बचाने के लिए हमें और जागरूक रहने की जरूरत है।Ó प्रधानमंत्री का इशारा क्लाइमेट एक्टिविस्ट ग्रेटा थनबर्ग से लेकर पॉप सिंगर रिहाना तक ऐसी विदेशी हस्तियों पर था, जिन्होंने हाल ही में अपनी सोशल मीडिया पोस्ट्स के जरिए किसान आंदोलन का समर्थन किया है।
परिवार में शादी हो तो फूफी भी नाराज होती है - प्रधानमंत्री ने विपक्ष को आड़ेहाथ लिया। कहा- मजा ये है कि जो लोग उछल-उछलकर सियासी बयानबाजी करते हैं, जब उन्हें मौका मिला तो उन्होंने भी आधा-अधूरा किसानों के लिए कुछ न कुछ किया ही है। इस चर्चा में कानून की स्क्रिप्ट पर तो किसी ने बात ही नहीं की। यही शिकायत की कि तरीका ठीक नहीं था, आपने जल्दी कर दी, इसको नहीं पूछा...। ये तो होता रहता है। परिवार में शादी होती है तो भी फूफी नाराज होती है कि हमें कहां बुलाया था। इतना बड़ा अपना परिवार है तो ऐसा होता ही रहता है।