देवभूमि में प्रकृति का तांडव...
   Date08-Feb-2021

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उत्तराखंड के चमोली में ग्लेशियर टूटने से भारी तबाही
१५० से अधिक की मौत की आशंका
चमोली/देहरादून ठ्ठ 7 फरवरी (ए)
देवभूमि उत्तराखंड में चमोली जिले के रैणी गांव में रविवार को एक ग्लेशियर के टूटने से बाढ़ आने से कम से कम 150 लोगों के मरने की आशंका है। ग्लेशियर टूटने और बाढ़ आने से यहां विनाश के निशान इस आपदा की कहानी खुद ही बयां कर रहे हैं। इस घटना ने वर्ष 2013 के मंजर को फिर ताजा कर दिया है, जिसमें बादलों के फटने से रुद्रप्रयाग जिले के बाद मंदाकनी नदी में विनाशकारी बाढ़ आने से सैंकड़ों लोगों की जान चली गई थी।
प्राप्त रिपोर्टों के अनुसार ग्लेशियर के टूटने के कारण 13.3 मेगावाट ऋषिगंगा जल विद्युत परियोजना पूरी तरह से ध्वस्त हो गई और अलकनंदा नदी में जलस्तर बढऩे से बाढ़ आ गई। पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) अशोक कुमार ने कहा कि ऋषिगंगा पावर परियोजना में काम करने वाले कई लोग बह गए, गाद और मलबे में फंसे लोगों को बचाया जा रहा है। पुलिस और राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ) की टीमें घटना स्थल पर पहुंच गई हैं। बाढ़ का पानी कर्णप्रयाग तक पहुंच गया है।
उन्होंने कहा कि हम जानमाल के नुकसान को रोकने के लिए हरस्तर पर सर्वश्रेष्ठ प्रयास कर रहे हैं। डीजीपी ने कहा कि तपोवन बांध में फंसे हुए 16 लोगों को पुलिस ने बाहर निकाल लिया है और उन्हें सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया है। उन्होंने कहा कि यह आपदा आज सुबह 10 बजकर 45 मिनट पर आयी और चमोली में दो बांध को इससे नुकसान पहुंचा है। आपदा के बाद राज्य का आपदा तंत्र राहत बचाव अभियान के लिए जुट गया है। श्री कुमार ने कहा कि नदी किनारे स्थित कई घरों और झोपडयि़ां तेज बहाव में बह गई हैं और बाढ़ के रास्ते में आने वाले कई पेड़ बह गए हैं। ऋषि गंगा और अलकनंदा के बढ़ते जल स्तर को कम करने के लिए देश के सबसे ऊंचे टिहरी बांध से पानी का प्रवाह फिलहाल रोक दिया गया है। श्रीनगर बांध से पानी का बहाव तेजी से बढऩे और तेज जल प्रवाह के मद्देनजर नदी के किनारों के सभी गांवों और निचले इलाकों को तुरंत खाली करवा लिया गया है।