भारत के जीवन की सांस्कृतिक रेखा गंगा
   Date21-Feb-2021

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आनुषांगिक संगठन गंगा समग्र की माघ मेला क्षेत्र में चिंतन बैठक सम्पन्न
प्रयागराज ठ्ठ 20 फरवरी (विसंके)
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि गंगा की अविरलता और निर्मलता के लिए समाज को सजग करना होगा। डॉ. भागवत ने शनिवार को संघ के आनुषांगिक संगठन गंगा समग्र की माघ मेला क्षेत्र में चिंतन बैठक में कार्यकर्ताओं को सम्बोधित करते हुए कहा कि गंगा भारत के जीवन की सांस्कृतिक रेखा है। शासन का सहयोग हो, इससे भी समाज की सजगता आवश्यक है। यह कार्य औपचारिक संगठन से नहीं, इसके लिए समाज के वेग प्रवाह की आवश्यकता है। यदि समाज सजग हुआ तो आधा कार्य वैसे ही हो जाएगा। उन्होंने कहा कि भारत की सभी नदियों में गंगा का अंश माना जाता है। गंगा के दोनों किनारों पर आधुनिक समाज निवास करता है। गांव-गांव में जाकर उसे निर्मल करने के लिए सभी से आग्रह करना होगा। इसके लिए धैर्यपूर्वक सतत कार्य करना होगा। गंगा निर्मल एवं स्वच्छ हो, श्रद्धापूर्वक समाज में संस्कृति के अनुरूप संकल्प लेकर काम करना होगा। यह जनकल्याण का कार्य है, इसमें आशंका करने की आवश्यकता नहीं।
श्री भागवत ने कहा कि गंगा की अविरलता और निर्मलता के आंकड़े कह रहे हैं, अभी बहुत प्रयास करना है। नियमित नित्य कार्य करके लक्ष्य तक पहुंचना, अविरल एवं निर्मल गंगा के लिए समाज का सजग करना है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार कोरोना में प्राणायाम और काढ़ा को धैर्यपूर्वक सतत एवं लम्बे समय तक किया गया, उसी प्रकार गंगा को भी निर्मल बनाने में लम्बे समय तक धैर्यतापूर्वक कार्य करना होगा।