भारत को आत्मनिर्भर बनाने में नई शिक्षा नीति की अहम भूमिका रहेगी
   Date20-Feb-2021

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इंदौर ठ्ठ स्वदेश समाचार
देवी अहिल्या विश्वविद्यालय इंदौर द्वारा आयोजित वार्षिक दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने कहा कि देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए नई शिक्षा नीति की अहम भूमिका रहेगी। नई शिक्षा नीति के माध्यम से युवाओं को समय और जरूरत के मान से रोजगारोन्मुखी शिक्षण-प्रशिक्षण दिया जाएगा। नई शिक्षा नीति जीवन उपयोगी रहेगी।
समारोह में इसरो के पूर्व अध्यक्ष ए.एस. किरण कुमार विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद थे। इस अवसर पर उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. मोहन यादव, जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट, पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री सुश्री उषा ठाकुर, देवी अहिल्या विश्वविद्यालय की कुलपति श्रीमती रेणु जैन भी उपस्थित थीं। समारोह में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने अपने उद्बोधन के शुरुआत में सीधी जिले में हुई दुर्घटना पर संवेदना व्यक्त करते हुए मृतकों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि मां अहिल्याबाई के जीवन से हमें बहुत कुछ सीखने को मिलता है। उनका पूरा जीवन प्रेम, सद्भाव, मानवीयता, भक्ति, पशु प्रेम से ओत-प्रोत रहा है। श्रीमती पटेल ने कहा कि देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए नई शिक्षा नीति की महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी। शिक्षा का जीतना तेजी से विस्तार होगा, आत्मनिर्भरता भी उतनी ही तेजी से बढ़ेगी। देश किस तरह से आत्मनिर्भर बने, इसके लिए शोध किए जाने की जरूरत है।
2030 तक शत-प्रतिशत बच्चों को शिक्षा- उन्होंने कहा कि वर्ष 2030 तक शत-प्रतिशत बच्चों को प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा देने तथा 50 प्रतिशत युवाओं को उच्च शिक्षित बनाने के लक्ष्य की पूर्ति के लिए जमीनी स्तर पर कारगर प्रयास होना चाहिए। बालिकाओं की शिक्षा के साथ-साथ उनके पोषण स्तर में सुधार लेने की दिशा में भी प्रभावी कदम उठाये जाना चाहिए। बालिकाओं को शिक्षित करने और पोषण स्तर में सुधार लाने के लिए नई शिक्षा नीति में प्रावधान किए गए हैं। शिक्षा संस्थानों को कुपोषण में सुधार लाने के लिए आगे आना चाहिए।
अच्छी शिक्षा के साथ अच्छे विचार जरूरी- उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति जीवन उपयोगी बनेगी। इस नीति में नवाचार होंगे। समय और जरूरत के मान से शिक्षण-प्रशिक्षण दिया जाएगा। पाठ्यक्रमों में 30 प्रतिशत हिस्सा स्थानीय स्तर से जोड़ा जा सकेगा। उन्होंने कहा कि अच्छी शिक्षा के साथ अच्छे आचार-विचार भी होना चाहिए।
युवाओं के पास जबरदस्त ऑफर- समारोह को संबोधित करते हुए इसरो के पूर्व अध्यक्ष ए.एस. किरण कुमार ने कहा कि समय की जरूरतों की हिसाब से विद्यार्थियों को तैयार करना होगा। उन्हें इस तरह से शिक्षण-प्रशिक्षण देना होगा, जिससे कि वे आने वाली समस्याओं का समाधान कर पाएं। शिक्षा का क्षेत्र चुनौतीपूर्ण है। नई सदी की जरूरतों को देखते हुए शिक्षा दी जाना चाहिए। हमारे देश में शिक्षा की समृद्ध परम्परा रही है। देश में ज्ञान-विज्ञान और तकनीकी के क्षेत्र में भी उपलब्धियांपूर्ण कार्य हुए हंै। इस दिशा में भारत ने विश्व में अपनी एक अलग पहचान स्थापित की है। भारत पुन: विश्वगुरु बने, इसके लिए सबको कार्य करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि हमारे देश की सबसे तेजी से बढ़ती हुई अर्थव्यवस्था है। आज के समय में युवाओं के पास जबरदस्त अवसर है कि वे अपने ज्ञान और कौशल को साबित करें।
कार्यक्रम में 90 प्रतिभावान विद्यार्थियों को स्वर्ण तथा रजत पदक, 133 शोधार्थियों को उपाधि, पीएचडी, डिलीट आदि प्रदान किए गए। इस अवसर पर देवी अहिल्या विश्वविद्यालय पर प्रकाशित डाक टिकट का विमोचन किया गया। प्रारंभ में कुलपति श्रीमती रेणु जैन ने स्वागत भाषण दिया और विश्वविद्यालय की शैक्षणिक गतिविधियों की जानकारी दी। कार्यक्रम का संचालन कुलसचिव अनिल शर्मा ने किया।(शेष पृष्ठ 6 पर)