पीढिय़ों के पथ प्रदर्शक पं. शास्त्रीजी...
   Date16-Feb-2021

as3_1  H x W: 0
स्वदेश के संस्थापक अध्यक्ष तथा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रांत संघचालक पं. रामनारायणजी शास्त्री का स्मरण मात्र हमारे तन-मन को आज भी उनके उच्च विचारों एवं प्रेरणादायी कार्यों के द्वारा प्रेरित कर देता है.., क्योंकि उन्होंने अपने राष्ट्र निष्ठ एवं सेवाभावी उच्च विचारों को कार्यरूप में परिणीत करके दिखाया... विचारों को कार्यों के रूप में बिना समझौता किए.., बिना डिगे, संपादित करने वाले विरले ही होते हैं...पं. शास्त्रीजी का पूरा जीवनवृत्त उन्हीं विरले 'व्यक्तित्वोंÓ में से ही एक था...जन-जन में राष्ट्र के प्रति सेवा, समर्पण का भाव हो...इस विचार के प्रसार के लिए शास्त्रीजी ने संघ के निवृत्तमान सरसंघचालक स्व. कुप्प.सी. सुदर्शनजी के साथ मिलकर 1966 में विजयादशमी पर्व पर राष्ट्र निष्ठ विचारधारा के प्रसार के अनुष्ठान 'स्वदेशÓ का श्रीगणेश किया...जो आज भी सतत् शास्त्रीजी के विचारों, कार्यों को विनम्र श्रद्धांजलि प्रदान करते हुए आगे बढ़ रहा है...पं. शास्त्रीजी ने अपने सामाजिक, पारिवारिक एवं पेशेवर जीवन में आदर्श प्रतिमानों की स्थापना की...पीढिय़ां अपने पूर्वजों के पथ का अनुगमन करती हैं...फिर चाहे व अच्छा हो या बुरा...पं. शास्त्रीजी को वर्तमान के साथ ही भविष्य एवं भावी पीढ़ी की चिंता भी थी...तभी तो उन्होंने श्रीमद्् भागवत् के श्लोक (10.49,21) को अपने जीवन का ध्येय बनाया था कि-
एक : प्रसूयते जन्तु: एक एव प्रलीयते।
एकोडनुभुडत्तेस सुकृत्रम् एक एवं च दुष्कृत्रम्।।
पं. शास्त्रीजी के आदर्शों एवं सेवा कार्यों का प्रतिपालन उनकी पीढ़ी किस तरह कर रही है.., इसका अनोखा उदाहरण सितंबर 2011 में उस समय देखने को मिला, जब पं. शास्त्री के पुत्र एवं रेवा प्रकाशन लि. के अध्यक्ष श्री महेशचंद्र शास्त्री एवं पूरे शास्त्री परिवार ने इंदौर में एबी रोड पर विकास कार्यों का मार्ग प्रशस्त कर बीआरटीएस के लिए करोड़ों रुपए की जमीन दान कर दी...महज पिताश्री का स्मरण करते हुए इन्हीं विचारों के साथ कि-'पिताजी आज होते तो क्या करते..? क्या ऐसा आदर्श उदाहरण आज चरित्रहीन बहुलता वाले कालखंड में प्रेरणा, सेवा एवं समर्पण का पाठ पढ़ाने वाला प्रेरक प्रसंग नहीं है..? पं. शास्त्रीजी की आत्मा भी ऐसा देख गद्गद् हो उठी होगी कि उनके द्वारा बीजारोपित किए गए सेवा-समर्पण के वटवृक्ष न केवल फल देने लगे हैं.., बल्कि आने वाली पीढ़ी का मार्ग प्रशस्त करने के अनुष्ठान में लगे हुए है...समाज सेवा एवं राष्ट्र निष्ठा के लिए सदैव प्रेरित करने वाले 'महान व्यक्तित्वÓ के 'कृतित्वÓ से ही स्वदेश प्रेरणा लेकर गतिमान है...
पं. शास्त्रीजी को जन्म दिवस (वसंत पंचमी) पर स्वदेश परिवार का शत् शत् नमन्...