सदन से भ्रम दूर करने वाला संदेश...
   Date11-Feb-2021

vishesh lekh_1  
अंतत: जिस बात की उम्मीद जताई जा रही थी, वही हुआ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश की सर्वोच्च पंचायत अर्थात् संसद से उन तमाम मुद्दों, विषयों पर भ्रम दूर करने वाला संदेश सुना दिया है... क्योंकि देश में लंबे समय से कृषि सुधार संबंधी कानून को लेकर आंदोलन चल रहा है, आंदोलन ने अलग-अलग समय पर अपने पैतरें बदले... जिसका देशभर में आमजन ने अलग-अलग अर्थ भी निकाला... ऐसे में सबसे बड़ी जवाबदेही सरकार की बनती है कि वह जिस सदन से कृषि सुधार संबंधी कानून बना था, उसी मंच से न केवल किसानों को, बल्कि उन किसान संगठनों के समर्थन-विरोध में खड़े लोगों को भी यह संदेश दे कि कृषि सुधार संबंधी कानून किस तरह से न्यायोचित है... इसके लिए प्रधानमंत्री के हस्तक्षेप की लंबे समय से मांग भी की जा रही थी... प्रधानमंत्री ने राज्यसभा में इस विषय पर कुछ बातें रखी थी... लेकिन बुधवार को लोकसभा में कृषि कानूनों के संबंध में उन्होंने न केवल कांग्रेस को कठघरे में खड़ा किया, बल्कि कृषि सुधार से संबंधी कानून की आवश्यकता एवं उससे जुड़ी बारीकियों को भी सदन में मजबूती के साथ रखा... जब प्रधानमंत्री ने यह कहा कि मैं किसान आंदोलन को पवित्र मानता हूं, लेकिन जब आंदोलनजीवी पवित्र आंदोलन को अपने फायदे के लिए उठते हैं तो क्या होता है..? जो नक्सलवादी, आतंकवादी जेल में है, उनकी फोटो लेकर रिहाई की मांग करना किसान आंदोलन को अपवित्र करने का षड्यंत्र नहीं है..? यह सवाल कांग्रेस से भी पूछा जाना चाहिए कि जब वह किसान संगठनों के आंदोलन को संसद के बाहर जोरदार तरीके से समर्थन दे रही है, तो उसने उसी एकता के साथ इस कानून के खिलाफ सदन में लड़ाई क्यों नहीं लड़ी..? प्रधानमंत्री ने यह स्पष्ट कर दिया कि देश में पब्लिक सेक्टर जितना जरूरी है, उतना ही प्राइवेट सेक्टर भी जरूरी है... क्योंकि जब किसानों को उनकी फसल, फल व अन्य उत्पादों का बेहतर बाजार दाम मिलेगा, तभी तो उनकी आय दोगुना संभव होगी... इसके लिए किसानों को फल, फूल, सब्जी उत्पादन की तरफ तेजी से प्रेरित करने का काम भी चल रहा है... क्योंकि खाद्यान्न उत्पादन में तो देश आत्मनिर्भर हो चुका है और इतना उत्पादन होता है कि उसे संभालना मुश्किल हो जाता है... कृषि की इन्हीं आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए ढांचागत विकास पर एक लाख करोड़ रुपए की व्यवस्था सरकार ने बजट में की है... कृषि में निवेश से बदलाव की स्थिति बनेगी... बाजार मिलेगा और उचित दाम भी इससे कृषि-कृषकों की माली हालात में सुधार होगा... सही मायने में प्रधानमंत्री ने सदन से कृषि सुधार संबंधी कानूनों को लेकर जो भ्रम विपक्ष द्वारा फैलाएं जा रहे थे, उसको खत्म करने का संदेश दिया है... संभवत: प्रधानमंत्री के इस वक्तव्य के बाद कानूनों को लेकर भ्रमित लोगों को वास्तविकता पता चल जाएगी...
दृष्टिकोण
फसल नुकसान पर उचित निर्णय...
मध्यप्रदेश की शिवराजसिंह चौहान सरकार के मंत्रिमंडल ने मंगलवार को कृषि-कृषकों के हित में एक सराहनीय निर्णय लिया... जिसकी लंबे समय से मांग भी की जा रही थी... किसान भी इस विषय को अलग-अलग मंचों पर उठाते रहे हैं... क्योंकि प्राकृतिक आपदा के कारण अनेक बार पूरी फसल तबाह हो जाती है... बड़ी जोत वाले किसानों का तो ठीक, छोटी जोत वालों की मानों कमर ही टूट जाती है... ऐसे में उनके लिए सरकार की तरफ से कुछ राहतभरे कदम त्वरित रूप से उठना चाहिए... ठीक इसी तरह से शाजापुर से लेकर मालवा-निमाड़ के लगभग सभी हिस्सों में और रायसेन से लेकर पूरे मध्यप्रदेश में नील गाय तो सिंगरौली, सीधी, अनूपपुर और शहडोल में जंगली हाथी मकानों, फसलों को भारी नुकसान पहुंचाते हैं... वन्य प्राणियों को किसान अपने तरीके से काबू भी नहीं कर सकते.. क्योंकि उन पर कानूनी शिकंजा कसता है, इसलिए कई बार नील गाय ने किसानों की सारी फसल चौपट कर दी... जिसका मुआवजे के रूप में कोई प्रावधान ही नहीं था, इसलिए किसान मनमसोज कर रह जाता था... लेकिन अब शिवराज सरकार ने नील गाय के साथ ही जंगली जानवरों से फसल को होने वाले नुकसान पर मुआवजे का प्रावधान कर दिया है... यही नहीं प्राकृतिक आपदा में कम से कम न्यूनतम 5 हजार अनुदान की भी व्यवस्था सरकार करने जा रही है... इसके लिए राज्य कैबिनेट ने राजस्व पुस्तिका परिपत्र में संशोधन प्रस्ताव को मंजूरी दी है... यह वन्य प्राणियों से होने वाले फसल नुकसान के साथ ही अन्य क्षति को अब मुआवजे के रूप में तय करना उन किसानों के लिए राहतभरा कदम है, जो अपनी फसलों को सुरक्षित रखने के भय में दिन-रात टूटते रहते थे... अत: सरकार के दोनों निर्णय किसान हित में प्रशंसनीय पहल है...