किसानों के पवित्र आंदोलन को आंदोलनजीवी अपवित्र कर रहे, इनसे देश को बचाना भी जरूरी
   Date11-Feb-2021

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राष्ट्रपति के अभिभाषण के धन्यवाद प्रस्ताव पर लोकसभा में विपक्ष पर प्रधानमंत्री का तीखा प्रहार
नई दिल्ली ठ्ठ 10 फरवरी (ए)
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राष्ट्रपति के अभिभाषण के धन्यवाद प्रस्ताव पर लोकसभा में जवाब दे रहे हैं। इस बीच कांग्रेस सांसदों ने सदन से वॉकआउट कर दिया। मोदी के भाषण के दौरान करीब 10 बार हंगामा हुआ है। 7वीं बार हंगामे के बाद मोदी तल्ख हो गए। उन्होंने कांग्रेस सांसद अधीर रंजन चौधरी से कहा कि यह ज्यादा हो रहा है। कृषि कानूनों की बात करते हुए मोदी ने एक बार फिर आंदोलनजीवी की बात छेड़ते हुए विपक्ष पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि किसानों के पवित्र आंदोलन को आंदोलनजीवी अपवित्र कर रहे। आंदोलनजीवियों से देश को बचाना जरूरी है। प्रधानमंत्री ने किसान आंदोलन में बाहरी तत्वों के शामिल होने की बात दोहराते हुए आज उन पर तीखा प्रहार किया और कहा कि किसान के पवित्र आंदोलन को ये आंदोलनजीवीÓ कलंकित कर रहे हैं।
मोदी ने कहा इस कोरोनाकाल में 3 कृषि कानून भी लाए गए। ये कृषि सुधार का सिलसिला बहुत ही जरूरी है। बरसों से हमारा कृषि क्षेत्र चुनौतियां महसूस कर रहा था, उसे उबारने के लिए हमने प्रयास किया है। भावी चुनौतियों से हमें अभी से निपटना होगा। मैं देख रहा था कि यहां पर कांग्रेस के साथियों ने चर्चा की कि वे कानून के कलर पर बहस कर रहे थे। ब्लैक है या व्हाइट। अच्छा होता कि वे उसके कंटेंट पर, उसके इंटेंट पर चर्चा करते ताकि देश के किसानों तक भी सही बात पहुंच सकती। प्रधानमंत्री ने आगे कहा जहां तक आंदोलन का सवाल है। वे गलत धारणाओं के शिकार हुए। (हंगामा होने लगा तो प्रधानमंत्री बोले...) मेरा भाषण पूरा होने के बाद सब कीजिए, आपको मौका मिला था। आप किसानों के लिए कुछ गलत शब्द बोल सकते हैं, हम नहीं बोल सकते। (रोक-टोक होने लगी तो मोदी बोले...) देखिए मैं कितनी सेवा करता हूं। आपको जहां रजिस्टर करवाना था, वहां हो गया।
हंगामा बढ़ा तो स्पीकर को दखल देना पड़ा-टीआर बालू विरोध जताने लगे तो मोदी ने कहा, अध्यादेश से कानून लागू हुए, फिर संसद में आए। कानून लागू होने के बाद देश में कोई मंडी बंद नहीं हुई, न एमएसपी बंद हुई। ये सच्चाई है, इसे छिपाने का मतलब नहीं है। एमएसपी की खरीद भी कानून बनने के बाद बढ़ी है। मोदी के यह कहते ही जबर्दस्त हंगामा होने लगा। इस पर स्पीकर को दखल देना पड़ा। वे सीट से खड़े हो गए और बोले कि मैंने सभी को पर्याप्त समय दिया है। प्रधानमंत्री का जवाब सुनिये। अब तक मुस्कुरा रहे और ठहाके लगा रहे मोदी के तेवर अब तीखे हो गए। बोले- ये हो हल्ला, ये आवाज, ये रुकावट डालने का प्रयास एक सोची-समझी रणनीति के तहत है। सोची-समझी रणनीति यह है कि जो झूठ फैलाया है, उसका पर्दाफाश हो जाएगा। इसलिए हंगामे का खेल चलता रहा है। लेकिन इससे आप लोगों का भरोसा नहीं जीत पाओगे, यह मानकर चलो। नए कानून से जो व्यवस्थाएं चल रही थीं, उन्हें किसी ने छीन लिया है क्या? किसी कानून का विरोध तो तब मायने रखता है, जब वह अनिवार्य है, ये तो ऑप्शनल है।
मांगने पर सरकारें काम करें, वह वक्त चला गया- मोदी आगे बोले, जब कहा जाता है कि कानून मांगा था क्या, तो इस सोच पर मेरा विरोध है। हम सामंतवादी हैं क्या जो मांगा जाए। सरकारें संवेदनशील होनी चाहिए। इस देश ने आयुष्मान योजना नहीं मांगी थी, लेकिन गरीब की जान बचाने के लिए हम योजना लेकर आए। बैंक अकाउंट के लिए गरीबों ने कोई जुलूस नहीं निकाला था, लेकिन हम जनधन खाता योजना लाए। क्या लोगों ने कहा था कि हमारे घर में शौचालय बनाओ? मांगा जाए, तब सरकारें काम करें, वह वक्त चला गया। यह लोकतंत्र है, सामंतशाही नहीं है।
आंदोलनजीवी भय पैदा करते हैं- मोदी ने आगे कहा विरोध का कोई कारण ही नहीं बनता। आंदोलनजीवी ऐसे तरीके अपनाते हैं। ऐसा हुआ तो ऐसा होगा। इसका भय पैदा करते हैं। सुप्रीम कोर्ट का कोई जजमेंट आ जाए तो आग लगा दी जाए देश में। ऐसे तौर-तरीके लोकतंत्र और अहिंसा में विश्वास करने वालों के लिए चिंता का विषय होना चाहिए, ये सिर्फ सरकार की चिंता का विषय नहीं होना चाहिए। इसके बाद अधीर रंजन दोबारा बोलने को खड़े हुए तो मोदी ने कहा- बाद में, बाद में।