संस्कृ त में संसार की सभी समस्याओं का समाधान
   Date27-Dec-2021

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उज्जैन ठ्ठ 26 दिसम्बर (स्वदेश समाचार)
ज्ञान-विज्ञान का सृजन संस्कृ त भाषा में ही हुआ है। प्राचीनकाल में संस्कृ त भाषा का प्रभाव बहुत अधिक था, आज कुछ कमी आ गई है तो क्या हुआ, कल फिर इसका कार्यक्षेत्र बढ़ेगा, किंतु यह भाषा कभी समाप्त नहीं होगी। अगर हमें अपने जीवन मूल्यों को समझना है तो हमें शास्त्रों का अध्ययन करना होगा और जब तक हम संस्कृत नहीं पढ़ेंगे, तब तक हम शास्त्र नहीं पढ़ पाएंगे। इसलिए हमें संस्कृत पढऩे के लिए और बढ़ाने के लिए निरंतर गतिशील रहना चाहिए। संस्कृत भाषा में लिखे सभी शास्त्रों में संसार की सभी समस्याओं का समाधान है।
यह विचार संस्कृत भारती के अ.भा. महामंत्री श्रीश देवपुजारी ने व्यक्त किए। वे संस्कृत भारती मालवा प्रांत के कार्यकर्ता सम्मेलन के समापन अवसर पर मुख्य वक्ता के रूप में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि संस्कृ त भारती का विस्तार और उसकी गुणवत्ता दोनों पर ध्यान देना जरूरी है। अगर हम बात करें विस्तार की तो संस्कृत भारती को हमें गांव और बस्ती स्तर तक ले जाना है और अगर बात करें गुणवत्ता की तो जनपद के नियमित निरंतर अध्ययन से हमें अपनी भाषा की गुणवत्ता सुधार ना होगी। सप्ताहिक मिलन और संस्कृ त संभाषण शिविर अधिक से अधिक कराने के लिए महोदय ने सभी को प्रेरित किया। संस्कृ त भारती ऐसी कई योजनाओं पर कार्य कर रही है, जिसके बल पर आने वाला समय संस्कृत का ही होगा। हम विश्व को संस्कृत की महत्ता मानने पर मजबूर कर देंगे। हमें विश्वास है कि संस्कृत आने वाले समय में जनव्यवहार की भाषा बनेगी।
संस्कृत भाषा में वर्तमान व भविष्य की जटिल समस्याओं का समाधान है- इस अवसर पर मध्यक्षेत्र संयोजक एवं महर्षि पतंजलि संस्कृ त संस्थान के अध्यक्ष भरत बैरागी ने कहा कि विश्व के शीर्ष नेता मानने लगे हैं कि वैश्विक आर्थिक
मंदी, आतंकवाद, पर्यावरण प्रदूषण, ग्लोबल वार्मिंग सहित दुनिया की जटिल से जटिल समस्याओं का समाधान भारतीय चिंतन में है, पर ये भारतीय चिंतन है क्या? यह कहां उपलब्ध है? इसेे कैसे प्राप्त किया जा सकता है? इन सभी प्रश्नों का एक ही उत्तर है संस्कृत भाषा, इस भाषा में लिखे गए विभिन्न ग्रंथों में वर्तमान ही नहीं, भविष्य की आने वाली अनेक जटिल समस्याओं के समाधान उपलब्ध है, किंतु यदि संस्कृ त जानने वाले ही नहीं होंगे तो इस भाषा में व्याप्त ज्ञान का प्रकटीकरण भी नहीं हो पाएगा। अत: हम कार्यकर्ताओं का दायित्व है कि सभी को इसका महत्व बताएं और धीरे-धीरे इसे आमजन को बोलना सिखाएं। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रांताध्यक्षा सीमा जिंदल ने की। कार्यक्रम का संचालन प्रांत मंत्री हेमंत शर्मा ने किया।