स्वावलम्बन
   Date27-Dec-2021

prernadeep_1
प्रेरणादीप
अ मेरिकी उद्योगपति हेनरी फोर्ड का नाम विश्व विख्यात है। उन्होंने अपने नाम पर फोर्ड मोटर का निर्माण किया। उनके पास अपार सम्पदा थी। एक बार एक भारतीय उद्योगपति अमेरिका गया। उन्होंने फोर्ड से मिलने के लिए समय ले लिया। वह ठीक समय पर नियत स्थान पर वहां जा पहुंचे। वह सोच रहे थे, वो इतने बड़े आदमी हैं, वहां तो नौकर-चाकरों की फौज होगी, लेकिन वहां जाकर उन्होंने जो देखा तो वह अपनी आंखों पर विश्वास न कर सके। वह अपने जूठे बर्तन स्वयं साफ कर रहे थे। भारतीय उद्योगपति ने विस्मित स्वर में पूछा- श्रीमानजी! आप यह क्या कर रहे हैं? मुस्कुराते हुए हेनरी ने कहा- अपने जूठे बर्तन साफ कर रहा हूं। भारतीय उद्योगपति बोला- लेकिन यह काम तो नौकर कर सकता था। फोर्ड ने अतिथि की ओर विस्मय से देखा और कहा- देखिये, जो काम अपने हाथ किया जा सकता है, उसके लिए दूसरों पर निर्भर क्यों रहा जाए? सबेरे तो हर व्यक्ति भंगी बनता ही है, तब अपनी ही जूठन साफ करने में क्या बुराई है? स्वावलम्बन के इस रूप को भारतीय उद्योगपति देखकर चकित रह गया। बड़ा व्यक्ति न तो रुपए-पैसे से होता है, न जमीन-जायदाद से। बड़ा तो उच्च कर्मों से होता है। कर्म किराये से नहीं, स्वयं ही करना रहते हैं।