swadesh editorial
   Date12-Dec-2021

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ब्रेक के बाद
शक्तिसिंह परमार
वै श्विक महामारी कोरोना की पहली-दूसरी और कुछ देशों में तीसरी लहर ने जो भयावह स्थितियां निर्मित की..,उससे कोई भी अनभिज्ञ नहीं है...इस महामारी से लड़ते-लड़ते करीब 2 साल होने वाले हैं...लेकिन अब पूरी दुनिया के सामने बहुरूपिए कोरोना का नया घातक खतरा ओमिक्रॉन के रूप में स्थितियां विकटपूर्ण करने लगा है...विश्व के करीब 60 देशों में ओमिक्रॉन की दस्तक के साथ स्थितियां अनियंत्रित होने लगी हैं..,तभी तो राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर न केवल हवाई यात्राएं..,बल्कि अन्य तरह की पाबंदियां भी तेजी से बढ़ रही हैं... कोरोनाकाल में हमने अनेक बार इस पक्ष को बड़ी स्पष्टता व तार्किकता के साथ रखा है कि महामारी आसानी से पीछा नहीं छोड़ती है..,क्योंकि महामारियां रह-रहकर और बहुरूपिए की भांति भेष बदलकर राक्षसी रूप में अट्टाहस करते हुए लौटती हैं...कोरोना के इस नए राक्षस ओमिक्रॉन को लेकर दुनिया में हड़कंप मचना स्वाभाविक है...क्योंकि इसे कोरोना के डेल्टा वैरिएंट (प्रतिरूप) से भी घातक बताया जा रहा है... दुनिया में करीब 100 साल पहले 1918 में स्पैनिश फ्लू ने महामारी बरपाई थी...दो साल में उस राक्षसी महामारी ने करोड़ों जिंदगियां लील दी थी...स्पैनिश फ्लू की आंतरिक संरचना से लेकर कारणों तक को जानने में करीब 13 साल लगे थे... जैसे-तैसे विश्व ने उस महामारी से जंग लड़ते हुए जीवन बचाया था...करीब 100 साल बाद पुन: उसी स्पैनिश फ्लू की तर्ज पर उससे भी भयावह रूप में 2019 के अंत में कोरोना महामारी का सामना हुआ...और 2021 के अंत तक तो कोरोना महामारी के नए-नए बहुरूप घातक मारक क्षमता के साथ अपनी विनाशलीला दिखा रहे हैं...ओमिक्रॉन से आज पूरा विश्व भयाक्रांत है...होना भी चाहिए..,लेकिन इससे भी बढ़कर सावधानी जरूरी है...ताकि इसका सामना करते हुए संभावित तीसरी लहर को विफल किया जा सके..! क्योंकि सावधानी-सतर्कता ही इसका समाधान है...
ओमिक्रॉन को डेल्टा वैरिएंट से ज्यादा घातक और तेज गति से प्रसारित होने वाले संक्रामक वायरस के रूप में देख दुनिया में हड़कंप मचा हुआ है..,लेकिन वास्तविकता यह भी है कि इस संक्रमण का जिस व्यक्ति में प्रवेश होता है, उसके गले में सूजन, बुखार, शरीर में दर्द जैसे मामूली लक्षण ही दिखते हैं और हालत गंभीर नहीं होती...ऐसे में कई बार व्यक्ति लापरवाही में भी संक्रमण को भयावह स्तर पर स्वयं में फैला लेता है...क्योंकि ओमिक्रॉन के लक्षण हल्के या न दिखने वाले रहते हैं...ऐसे में 70 से 80 प्रतिशत लोगों में कई बार लक्षण सामने नहीं आते या वे उसे सर्दी-खांसी के रूप में ही लेते हैं...कई बार तो लक्षण इतने न्यून रहते हैं कि व्यक्ति को सुगंध की अस्पष्टता या ऑक्सीजन की कमी जैसी समस्या का भी सामना नहीं करना पड़ता..,लेकिन रोग की गति शरीर में तेज रहती है, परिणामत: संक्रमित व्यक्ति कब घातक झोन में पहुंच जाए, पता नहीं चलता..!
पूरा विश्व ओमिक्रॉन से भयाक्रांत है, क्योंकि अफ्रीकी देशों में इस रोग ने तेजी से पैर पसारे...इसका मूल कारण तो वास्तविकता में जिन देशों में कोरोनारोधी टीका लगाने की प्रक्रिया बहुत धीमी है या जहां पर आंशिक रूप से भी टीके नहीं लगे हैं, वहीं पर इस संक्रमण का प्रसार तेज है...दक्षिण अफ्रीका में ओमिक्रॉन संक्रमण मामलों में एक सप्ताह में 408 फीसदी की वृद्धि देखी गई...जबकि ब्रिटेन में ओमिक्रॉन संक्रमितों की संख्या एक दिन में 53 फीसदी बढ़ी है...कुल मिलाकर ओमिक्रॉन डेल्टा से 10 गुना अधिक फैलता है...कोरोनारोधी पहला या दोनों टीके लग चुकी आबादी में भी ओमिक्रॉन के लक्षण तो सामने आ रहे हैं..,लेकिन उनके स्वस्थ होने की दर शत-प्रतिशत है...डेल्टा वैरिएंट में मौतें अधिक थी..,लेकिन ओमिक्रॉन में स्वस्थता की दर मौत पर भारी पड़ रही है...यही इस महामारी से लडऩे का सकारात्मक पक्ष देखा जा सकता है..!
दुनिया में तमाम तरह के प्रतिबंधों एवं सतर्कता के बावजूद जिस तरह से ओमिक्रॉन के मामले बढ़ रहे हैं और संक्रमण प्रसार की चपेट में दुनिया तेजी आ रही है...यह खतरे की घंटी है..,क्योंकि कोरोना महामारी में सर्वाधिक लापरवाही युवाओं ने बरती थी... तभी तो वे पहली, दूसरी और कुछ देशों में तीसरी लहर में इससे प्रभावित होने से कहीं ज्यादा इसके वाहक (प्रसारक) साबित हुए हैं...ऐसे में ओमिक्रॉन को लेकर दक्षिण अफ्रीका के कुछ वैज्ञानिकों का यह दावा कि इस संक्रमण की चपेट में सर्वाधिक युवा आ रहे हैं...लेकिन उनमें रोग-प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है..,इसलिए वे एक बार पुन: बुजुर्गों के खिलाफ इस संक्रमण के वाहक सिद्ध हो रहे हैं... ब्रिटेन में कोरोना की भांति ओमिक्रॉन भी हड़कंप मचा रहा है, विशेषज्ञ क्रिसमस की पार्टियां रद्द करने की सलाह दे रहे हैं, लेकिन ब्रिटिश प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन का इस पर आनाकानी कर रहे हैं... भारत में तो टीका आधी आबादी को लगा, लेकिन लापरवाह पूरी आबादी हो गई है, विवाह समारोह, सार्वजनिक कार्यक्रमों, चुनावी रैलियों एवं आयोजनों के साथ सरकारी कार्यालय तक में बिना मास्क के पर्याप्त दूरी के नियमों का खुला उल्लंघन हो रहा है... टीका लगवाने में भी लोगों की उदासीनता दिखी, तभी तो टीकाकरण अभियान शिथिल पड़ गया था... वो तो ओमिक्रॉन का भय पुन: टीका लगवाने के लिए लोगों को मजबूर कर रहा है... क्या हम भयाक्रांत होकर ही नियमों के दायरे में रहेंगे..?
ओमिक्रॉन दक्षिण अफ्रीका से शुरू होकर महज 9 दिन के अंदर 30 से अधिक देशों में पहुंचा है...हालांकि इस महामारी के पूरे विश्व में फैलने के पूर्व ही इसकी जीनोम सीक्वेंसिंग में सफलता प्राप्त होना एक बड़ी राहत वाली बात मानी जा सकती है...इसका यह लाभ मिलेगा कि कोरोना संक्रमण के जोखिम वाले देशों से आने वाले यात्रियों की कड़ी निगरानी व संपर्कों का पता लगाना आसान होगा..! उपचार की दृष्टि से इस महामारी से लडऩे का सबसे बेहतर उपाय तो यही है कि हर तरह की सावधानी बरती जाए...मास्क का नियमित उपयोग, भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों से बचने का प्रयास और कोविड-19 अनुरूप सरकार द्वारा निर्देशित नियमों का हर कोई पालन करे...क्योंकि डब्ल्यूएचओ और अमेरिका के शीर्ष वैज्ञानिकों ने भी यह माना है कि मौजूदा टीके जो देश-दुनिया में लग रहे हैं, वे ओमिक्रॉन से लडऩे में पूर्णत: सक्षम हैं...इसका ताजा प्रमाण यही है कि जिन लोगों को दोनों टीके लग चुके हैं, वे भी ओमिक्रॉन की चपेट में आए हैं..,लेकिन सप्ताहभर में ठीक हुए हैं...ऐसे में हर किसी की जिम्मेदारी यह बनती है कि टीकाकरण को प्राथमिकता के साथ आगे बढ़ाए...भारत ने इस दिशा में तेजी से कदम बढ़ाया है और 135 करोड़ डोज के पार टीकाकरण हो चुका हैं...यह भारत की आधी आबादी के बराबर है..! इसमें 80.88 करोड़ वयस्कों को पहली व 49.48 करोड़ को दोनों खुराक प्राप्त हो चुकी है...देश की जनता अगर कुछ करने का ठान ले तो असंभव को भी संभव बनाया जा सकता है...यह टीकाकरण के महाभियान के दौरान हमने राज्यों और शहरों में देखा है कि एक दिन में लक्ष्य से दोगुने टीके भी लगाए गए हैं... यही सक्रियता ओमिक्रॉन को पस्त करेगी...
केंद्र सरकार ओमिक्रॉन से भयाक्रांत नहीं है और न ही वह देशवासियों को भयाक्रांत करने के लिए ऐसा कोई कदम उठा रही है...हां, सतर्कता व सावधानी के मान से जो उपाय किए जाने चाहिए, वह समय पर किए जा रहे हैं...अंतरराष्ट्रीय उड़ानें पहले 15 दिसंबर से शुरू होना थी, उसे 31 जनवरी 2022 तक प्रतिबंधित कर दिया है...दवाइयों का बफर स्टाक राज्यों को रखने और ऑक्सीजन आपूर्ति की वृहद व्यवस्था चाकचौबंद रखने के दिशा-निर्देश जारी हो चुके हैं...टीका न लगवाने वालों के खिलाफ राज्यों के स्तर पर अनेक सख्त कदमों का प्रभावी असर टीकाकरण के पुन: गति पकडऩे के रूप में देखा जा रहा है..,लेकिन पर्वो, उत्सवों, स्कूल, सिनेमा व विवाह समारोह और चुनावी रैलियों में सामान्यजन ही नहीं, नेता व प्रशासन भी सिद्धांत: कोविड-19 के नियमों का पालन करने में शत-प्रतिशत विफल है...ऐसे में हमारी लापरवाही से ओमिक्रॉन का भयाक्रांत दृश्य निर्मित भी हो जाए तो अतिश्योक्ति नहीं होना चाहिए..! फिर कोरोना की दूसरी भयावह लहर के दौरान सेवा की आड़ में खेल खेलने वाले मौकापरस्त चिकित्सक व अस्पताल अपना पुन: ओमिक्रॉन रूप दिखाए तो एक-दूसरे को दोष न दें..?