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   Date12-Dec-2021

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बलरामपुर ठ्ठ 11 दिसम्बर (वा)
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि उत्तरप्रदेश में पिछली सरकारों और मौजूदा योगी सरकार के कामकाज में व्यापक अंतर को देखते हुए जनता की नजरों में फर्क बिल्कुल साफ है।
श्री मोदी ने शनिवार को उत्तरप्रदेश के बलरामपुर में दशकों से लंबित 'सरयू नहर राष्ट्रीय परियोजनाÓ का उद्घाटन करते हुए किसान एवं अन्य जनहित से जुड़ी तमाम परियोजनाओं में देरी के लिए पिछली सरकारों को जम्मेदार ठहराया। श्री मोदी ने किसी भी विपक्षी दल का नाम लिए बिना कहा कि इस तरह के लापरवाहीपूर्ण रवैए का खामियाजा जनता को भुगतना पड़ा।
श्री मोदी ने सरयू नहर परियोजना का ही जिक्र करते हुए कहा कि जब इस परियोजना की शुरुआत हुई थी, तब इसकी लागत 100 करोड़ रुपए थी। आज ये परियोजना 10 हजार करोड़ रुपए खर्च करके पूरी हो सकी। प्रधानमंत्री ने कहा- पहले के लोगों की लापरवाही की कीमत देश के किसान को 100 गुना ज्यादा चुकानी पड़ी। अगर ये सुविधा पहले मिलती तो किसानों का जीवन बदल गया होता, किसान खुशहाल होता। प्रधानमंत्री ने पिछली और मौजूदा योगी सरकार की कार्यपद्धति में अंतर स्पष्ट करते हुए कहा- पहले जो सरकार में थे, वो माफियाओं को संरक्षण देते थे, आज योगीजी की सरकार माफिया की सफाई में जुटी है। तभी तो उत्तरप्रदेश के लोग कहते हैं कि फर्क साफ है। इससे पहले प्रधानमंत्री श्री मोदी ने उत्तरप्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, राज्य के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केन्द्रीय जलशक्ति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत सहित अन्य मंत्रियों की मौजूदगी में रिमोट कंट्रोल से सरयू नहर राष्ट्रीय परियोजना का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उत्तरप्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और राज्य के जलशक्ति मंत्री डॉ. महेन्द्र सिंह सहित अन्य मंत्री एवं वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे।
उल्लेखनीय है कि इस परियोजना में घाघरा, सरयू, राप्ती, बाणगंगा और रोहिणी नदियों को आपस में जोड़ा गया है। इससे बलरामपुर क्षेत्र की लगभग 14 लाख हेक्टेयर से अधिक कृषि भूमि की सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता सुनिश्चित होगी, जिससे पूर्वी उत्तरप्रदेश के नौ जिलों बहराइच, श्रावस्ती, बलरामपुर, गोण्डा, सिद्धार्थनगर, बस्ती, संत कबीर नगर, गोरखपुर और महाराजगंज के 6200 से अधिक गांवों के लगभग 29 लाख किसानों को लाभ मिलेगा। सरकार का दावा है कि करीब चार दशकों से लंबित परियोजना को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सरकार की पहल पर चार सालों में पूरा किया गया है।