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   Date18-Nov-2021

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शिमला ठ्ठ 17 नवम्बर (वा)
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने संसद एवं देश के पीठासीन अधिकारियों का आज आव्हान किया कि आज़ादी के अमृत काल में अगले 25 साल तक सदनों में बार बार 'कर्तव्यÓ के मंत्र पर जोर दें तथा विधायी निकायों के सदनों में गुणवत्तापूर्ण परिचर्चा के लिए अलग से समय निर्धारित करें जिसमें मर्यादा, गंभीरता एवं अनुशासन हो तथा इससे स्वस्थ लोकतंत्र का मार्ग प्रशस्त हो।
श्री मोदी ने आज यहां संसद एवं विधानमंडलों के अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारियों के शताब्दी सम्मेलन का नई दिल्ली से वीडियो लिंक के माध्यम से उद्घाटन किया। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की अध्यक्षता में 82वें पीठासीन अधिकारी सम्मेलन का आयोजन 16, 17 एवं 18 नवंबर को यहां हो रहा है। देश के पीठासीन अधिकारियों के सम्मेलन की शुरुआत 1921 में हुई थी और पहला सम्मेलन शिमला में हुआ था। इसलिए शताब्दी सम्मेलन का आयोजन भी शिमला में किया जा रहा है। सम्मेलन में श्री बिरला के साथ राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश, हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर, विधानसभा अध्यक्ष विपिन सिंह परमार, विधानसभा में विपक्ष के नेता मुकेश अग्निहोत्री ने भी संबोधित किया। सम्मेलन में देश के सभी राज्यों के पीठासीन अधिकारी शामिल हुए।
ह्म् सदन में नई कार्यप्रणाली को लेकर अपना दृष्टिकोण साझा करते हुए कहा हमारे सदन की परम्पराएं और व्यवस्थाएं स्वभाव से भारतीय हों, हमारी नीतियां, हमारे कानून भारतीयता के भाव को, 'एक भारत, श्रेष्ठ भारतÓ के संकल्प को मजबूत करने वाले हों, सबसे महत्वपूर्ण, सदन में हमारा खुद का भी आचार-व्यवहार भारतीय मूल्यों के हिसाब से हो, ये हम सबकी जि़म्मेदारी है।
उन्होंने पीठासीन अधिकारियों के समक्ष विचारणीय प्रश्न रखते हुए कहा क्या साल में 3-4 दिन सदन में ऐसे रखे जा सकते हैं जिसमें समाज के लिए कुछ विशेष कर रहे जनप्रतिनिधि अपना अनुभव बताएं, अपने समाज जीवन के इस पक्ष के बारे में भी देश को बताएं। आप देखिएगा, इससे दूसरे जनप्रतिनिधियों के साथ ही समाज के अन्य लोगों को भी कितना कुछ सीखने को मिलेगा। उन्होंने कहा कि इससे रचनात्मक समाज के लोगों को भी राजनीतिज्ञों के प्रति नकारात्मक भाव को कम करके उनसे जुडऩे और स्वयं राजनीति से जुडऩे की प्रेरणा मिलेगी। इस प्रकार से राजनीति में बहुत परिवर्तन आएगा।