swadesh editorial
   Date22-Oct-2021

parmar shakti_1 &nbs
त्वरित टिप्पणी
शक्तिसिंह परमार
कोरोना महामारी से लडऩे और जीतने की जिजीविषा का भारत ने विश्व के समक्ष अद्भुत और अनुपम उदाहरण ही प्रस्तुत नहीं किया..,बल्कि जीवन रक्षा और स्वास्थ्य सुरक्षा का भी ऐतिहासिक कीर्तिमान गढ़ा है...दुनिया का अब तक जितनी भी बार महामारियों से सामना हुआ..,उनका एकमात्र सबक यही रहा कि महामारी बहुरूपिये की भांति भेष बदलकर..,भयावहता का दायरा बढ़ाकर लौट-लौटकर आती है...अगर लडऩे की जीवटता और जीतने की तैयारी है, तभी महामारी हारती है...भारत ने इस कथन को साकार करने में सफलता प्राप्त करके दिखाई..,क्योंकि आज भारत लोगों को 100 करोड़ से अधिक टीके का सुरक्षा कवच प्रदान करने की प्रेरणादायी सफलता के सोपान पर खड़ा है...यह भारत की प्रखर वैज्ञानिक प्रतिभा, शोध कार्यों की प्रामाणिकता, चिकित्सकों-स्वास्थ्यकर्मियों एवं प्रशासन के साथ जनता-जनार्दन के सामूहिक प्रयास का प्रतिफल है...यही नहीं, महामारी से लडऩे की राष्ट्रीय नेतृत्व मोदीजी के कृतसंकल्प और निरंतर प्रत्यक्ष निगरानी का परिणाम है कि भारत ने तथाकथित विकसित देशों की तुलना में और आबादी के बोझ के बावजूद टीकाकरण का वैश्विक कीर्तिमान गढ़ा है...अमेरिका ने अभी तक 56 फीसदी लोगों का पूर्ण टीकाकरण किया है...आबादी के मान से भारत अभी तक 31 फीसदी से अधिक लोगों को पूर्ण सुरक्षा कवच देने में सफल हुआ है...भारत-अमेरिका के संसाधनों और आबादी के बोझ को तुलनात्मक रूप से देखेंगे तो भारत की उपलब्धि विश्व में शीर्ष पर है...क्योंकि आज भारत ने 65 फीसदी से अधिक ग्रामीणों को कोरोनारोधी खुराक प्रदान कर दी है...35 फीसदी से अधिक शहरी आबादी को टीका लगाया जा चुका है...समानता का भाव यह है कि 51.96 फीसदी पुरुष और 48.2 फीसदी महिलाएं सुरक्षा का 'टीका कवचÓ प्राप्त कर चुकी है...भारत के दर्जनभर से अधिक छोटे राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में 100 फीसदी से अधिक बालिग जनसंख्या पूरी तरह से टीके की पहली खुराक ले चुकी है...यह अपने आप में सुरक्षा-संसाधनों के मान से भारत की बढ़ती क्षमता-दक्षता का अद्भुत उदाहरण है...
कोरोना महामारी के खिलाफ भारत का दुनिया में सबसे बड़ा एवं नि:शुल्क टीकाकरण अभियान अनेक तरह के प्रेरणादायी नवाचारों द्वारा मिसाल बनकर उभरा है...जिसने भविष्य में महामारियों से लडऩे की नई सर्वस्वीकृत कार्यपद्धति को भी प्रमाणित किया है...शहरों, गांवों, कस्बों यहां तक कि सुदूर चढ़ाई वाले पहाड़ी क्षेत्रों, सघन वनांचल, खेत-खलिहान, औद्योगिक परिसर और घर-घर ही नहीं..,बल्कि बारिश, बाढ़ का सामना करते हुए स्वास्थ्यकर्मियों ने ढूंढ़-ढूंढ़कर लोगों को टीके का 'सुरक्षा चक्रÓ प्रदान करने का संकल्प पूर्ण किया है...भारत में जीवन रक्षा का मूल्य क्या है..? यह भारत कोरोनाकाल के इस टीकाकरण अभियान द्वारा दुनिया को बताने में सफल रहा...सबसे पहले स्वास्थ्यकर्मियों (फ्रंटलाइन वर्कर्स) को टीके का सुरक्षा कवच प्रदान करने में वरीयता दी गई...बाद में कोरोना महामारी की जंग में प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से लड़ाई लडऩे वाले प्रथम से अंतिम श्रेणी के योद्धाओं को टीके के 'सुरक्षा कवचÓ दायरे में लाया गया...विश्व के टीका लगाने की रणनीति के विपरीत भारत ने यहां भी अनेक तरह के कदम उठाए और सकारात्मकता दिखाकर प्राथमिकताएं भी तय की...विश्व में सबसे ज्यादा आबादी में दूसरे क्रम पर शामिल भारत ने सबको नि:शुल्क टीके की पहल की..,जो कि विश्व के तथाकथित विकसित राष्ट्रों को आईना है...भारत ने बड़ों और बच्चों के बजाय पहले अपने वरिष्ठ नागरिकों (बुजुर्गों) को टीके का सुरक्षा कवच प्रदान किया...विचार करें, यह भारत की दुनिया को अपने संस्कारों-संस्कृति से जुड़ी वरिष्ठ नागरिकों के प्रति मानव जीवन रक्षा संबंधी वह संवेदनशीलता है..,जिसकी विश्व से उम्मीद करना बेईमानी है...क्योंकि विश्व के लिए तो बुजुर्ग आज भी बोझ के सिवाय कुछ नहीं..,लेकिन भारत ने अपने आशीर्वाददाता इन वटवृक्षरूपी वरिष्ठजनों के जीवन को सुरक्षा चक्र के वरीयता क्रम में सबसे पहले रखकर अपनी शाश्वत पहचान वाले मानवीय सरोकारों और संवेदनाओं को भी नया उत्कर्ष प्रदान किया है...जिन विरोधियों को टीकाकरण अभियान रस्म लग रहा था..,उन्हें भी महज ढाई माह में लोगों को 50 करोड़ से अधिक टीके का सुरक्षा कवच करारा जवाब है...भारत ने कोरोना से लडऩे, जीतने की संकल्प सिद्धि का ही परिचय ही नहीं दिया है..,बल्कि महामारी से लडऩे की आत्मनिर्भर भारत की तैयारी ने 1 अरब लोगों तक टीके का 'सुरक्षा चक्रÓ पहुंचाकर संकल्प सिद्धि का कीर्तिमान गढ़कर दिखाया है...