आत्मनिर्भरता की दरकार पर्यावरण का सुधार
   Date05-Jan-2021

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प्रहलाद सबनानी
अ नेक अनुसंधानों से अब यह सिद्ध हो चुका है कि इस समय अनियमित हो रहे मानसून के पीछे जलवायु परिवर्तन का योगदान हो सकता है। कुछ ही घंटों में पूरे महीने की सीमा से अधिक बारिश का होना, शहरों में बाढ़ की स्थिति, शहरों में भूकम्प के झटके और सुनामी आदि प्राकृतिक आपदाओं के बार-बार घटित होने के पीछे भी जलवायु परिवर्तन एक मुख्य कारण हो सकता है। एक अनुसंधान के अनुसार, अगर वातावरण में चार डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान बढ़ जाए, तो भारत के तटीय किनारों के आसपास रह रहे लगभग साढ़े पांच करोड़ लोगों के घर समुद्र में समा जाएंगे। साथ ही, चीन के शंघाई, शांटोयु, भारत के कोलकाता, मुंबई, विएतनाम के हनोई और बांग्लादेश के खुलना शहरों की इतनी जमीन समुद्र में समा जाएगी कि इन शहरों की आधी आबादी पर इसका बुरा प्रभाव पड़ेगा।
संयुक्त राष्ट्र द्वारा जारी एक प्रतिवेदन के अनुसार, पिछले बीस वर्षों के दौरान जलवायु संबंधी आपदाओं के कारण भारत को 7,950 करोड़ अमेरिकी डॉलर का नुकसान हुआ है। जलवायु संबंधी आपदाओं के चलते 1998-2017 के बीच पूरे विश्व में दो लाख नब्बे हजार आठ सौ करोड़ अमेरिकी डॉलर का नुकसान हुआ है। सबसे ज्यादा नुकसान अमेरिका, चीन, जापान, भारत जैसे देशों को हुआ है। इस अवधि में आपदाओं के कारण तेरह लाख लोगों ने अपनी जान गंवाई। संयुक्त राष्ट्र का अनुमान है कि प्रतिवर्ष विश्व में 1.20 करोड़ हेक्टेयर कृषि उपजाऊ भूमि गैर-उपजाऊ भूमि में परिवर्तित हो जाती है। दुनिया में चार सौ करोड़ हेक्टेयर जमीन क्षरित हो चुकी है। एशिया एवं अफ्रीका की लगभग चालीस प्रतिशत आबादी ऐसे क्षेत्रों में रह रही है, जहां मरुस्थलीकरण का खतरा लगातार बना हुआ है। भारत की जमीन का एक तिहाई हिस्सा, यानी 9.7 करोड़ से दस करोड़ हेक्टेयर के बीच जमीन क्षरित है। जमीन के क्षरित होने से जमीन की उत्पादकता कम होने लगती है। इससे छोटे एवं सीमांत किसानों, जिनके पास बहुत कम जमीन है, की रोजी-रोटी पर संकट आ जाता है। इस तरह लोग गांवों से शहरों की ओर पलायन करने लगते हैं। जमीन के क्षरण की वजह से देश को छियालीस सौ करोड़ अमेरिकी डॉलर का नुकसान प्रतिवर्ष हो रहा है। एकल उपयोग वाले यानी सिंगल यूज प्लास्टिक के कारण भी जमीन बंजर हो जाती है। यह कचरे के साथ मिलकर मीथेन गैस बनाता है। यही पर्यावरण के लिए सबसे बड़ा खतरा है। मीथेन गैस कार्बन डाईआक्साइड की तुलना में तीस गुना अधिक खतरनाक है। जलवायु परिवर्तन के लिए भी यही गैस खासतौर से जिम्मेदार मानी जाती है। हर साल प्रत्येक भारतीय औसतन ग्यारह किलो सिंगल यूज प्लास्टिक का इस्तेमाल करता है। हर साल देश में छप्पन लाख टन कचरे का उत्पादन होता है, जिसमें से सिंगल यूज प्लास्टिक का कचरा पचीस हजार टन निकलता है।
जलवायु परिवर्तन में सुधार के लिए भारत तेजी से सौर और वायु ऊर्जा की क्षमता विकसित कर रहा है। ई-मोबिलिटी के माध्यम से वाहन उद्योग को गैस मुक्त बनाया जा रहा है। बायो ईंधन के उपयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है, पेट्रोल और डीजल में ईथेनाल को मिलाया जा रहा है। भारत द्वारा शुरू किए गए अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन के अस्सी से अधिक देश सदस्य बन चुके हैं। वैश्विक तापमान के प्रभाव को कुछ हद तक कम करने के उद्देश्य से भारत ने पहले तय किया था कि देश में 175 गीगावॉट नवीकरणीय ऊर्जा की स्थापना की जाएगी। इस लक्ष्य को हासिल करने की ओर भारत तेजी से आगे बढ़ रहा है। अब भारत ने अपने लिए देश में नवीकरणीय ऊर्जा की स्थापना के लिए एक नया लक्ष्य, अर्थात 450 गीगावॉट निर्धारित किया है। देश में बढ़ते मरुस्थलीकरण को रोकने के उद्देश्य से, भारत ने 2030 तक जमीन को उपजाऊ बनाने के अपने लक्ष्य को 2.10 करोड़ से बढ़ाकर 2.60 करोड़ हेक्टेयर कर दिया है। साथ ही, भारत ने मरुस्थलीकरण को बढऩे से रोकने के लिए 2015 से 2017 के बीच देश में पेड़ और जंगल के दायरे में आठ लाख हेक्टेयर की बढ़ोतरी की है। शहरों का विकास व्यवस्थित रूप से करने के उद्देश्य से देश में अब मकानों का लंबवत निर्माण किए जाने पर बल दिया जा रहा है, ताकि हरियाली के क्षेत्र को बढ़ाया जा सके। स्मार्ट शहर विकसित किए जा रहे हैं। शहरों में यातायात के दबाव को कम करने के उद्देश्य से विभिन्न मार्गों के बायपास बनाए जा रहे हैं। क्षेत्रीय द्रुत-गति के रेल यातायात की व्यवस्था की जा रही है, ताकि महानगरों पर जनसंख्या के दबाव को कम किया जा सके। देश के विभिन्न महानगरों में मेट्रो रेल का जाल बिछाया जा चुका है।
2 अक्टूबर, 2019 से देश में प्लास्टिक छोड़ो अभियान की शुरुआत हो चुकी है, ताकि 2022 तक देश सिंगल यूज प्लास्टिक से मुक्त हो जाए। जल शक्ति अभियान की शुरुआत 1 जुलाई, 2019 को कर दी गई। यह अभियान देश में स्वच्छ भारत अभियान की तर्ज पर जनभागीदारी के साथ चलाया जा रहा है। इस अभियान के अंतर्गत बारिश के पानी का संग्रहण, जल संरक्षण एवं पानी का प्रबंधन आदि कार्यों पर ध्यान दिया जा रहा है। देश में हर मकान के लिए वर्षा जल का संग्रहण आवश्यक कर देना चाहिए, ताकि पृथ्वी के जल को पुनर्चक्रित किया जा सके। हर घर में नवीकरणीय ऊर्जा का उपयोग आवश्यक कर देना चाहिए, ताकि इन घरों को आवश्यक रूप से सौर ऊर्जा उत्पादन करना पड़े।
देश में खाली पड़ी पूरी जमीन को हरित क्षेत्र में बदल दिया जाना चाहिए। देश में पच्चीस प्रतिशत प्रदूषण यातायात वाहनों से फैलता है, इसलिए वाहनों में नवीकरणीय ऊर्जा का उपयोग बढ़ाया जाना चाहिए। इससे वातावरण में कार्बन डाईआक्साइड कम होगी और ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ेगी। फव्वारा सिंचाई और बूंद सिंचाई पद्धति को देश में बढ़े स्तर पर अपनाया जाना चाहिए। खोई हुई उर्वरा शक्ति को हासिल करने के लिए पेड़ों और बड़ी झाडिय़ों को खेतों का हिस्सा बनाया जाना चाहिए। जैविक खेती को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। ऐसी फसलें, जिनमें पानी की अधिक आवश्यकता पड़ती है, जैसे गन्ना, अंगूर आदि को देश के उन भागों में स्थानांतरित कर देना चाहिए, जहां अधिक वर्षा के कारण बाढ़ की स्थिति पैदा हो जाती है। देश की विभिन्न नदियों को जोडऩे के प्रयास भी शुरू किए जाने चाहिए, जिससे देश के एक भाग में बाढ़ और दूसरे भाग में सूखे की स्थिति से निपटा जा सके। भूजल के अतार्किक उपयोग पर भी रोक लगानी होगी, ताकि भूजल के तेजी से कम हो रहे भंडारण को बनाए रखा जा सके। प्राथमिक शिक्षा के स्तर पर पानी की बचत और संरक्षण, आदि विषयों पर विशेष अध्याय जोड़े जाने चाहिए।
प्लास्टिक के उपयोग को सीमित करने के लिए हमें कुछ आदतें अपने आप में विकसित करनी होंगी। जैसे, जब भी हम सब्जी और किराने का सामान आदि खरीदने जाएं तो कपड़े के थैलों का इस्तेमाल करें। इससे खरीदे गए सामान को रखने के लिए प्लास्टिक के थैलियों की आवश्यकता ही नहीं पड़ेगी। हम घर में कई छोटे-छोटे कार्यों पर ध्यान देकर पानी की भारी बचत कर सकते हैं। पर्यावरण को पुनर्चक्रित करके विकास एवं पर्यावरण के बीच सामंजस्य बिठाया जा सकता है। कचरा एवं प्लास्टिक को पुनर्चक्रित करना, प्राकृतिक संसाधनों की दक्षता बढ़ाना, जल का संरक्षण, ऊर्जा का दक्षता से उपयोग, शहरों में हरियाली बढ़ाना, ध्वनि प्रदूषण को कम करना, हरित एवं स्वच्छ परिवहन का विकास करना, ठोस अपशिष्ट का सही तरीके से प्रबंधन करना आदि कार्य करके भी पर्यावरण में सुधार किया जा सकता है।
(लेखक भारतीय स्टेट बैंक के सेवानिवृत्त उपमहाप्रबंधक हैं)