बोया पेड़ बबूल का, आम कहां से होय
   Date05-Jan-2021

dharmdhara_1  H
धर्मधारा
शा स्त्रों में कर्मफल विधान का विशद् वर्णन व विवेचन मिलता है। कर्मफल विधान के अनुसार हम जो भी अच्छे-बुरे, शुभ-अशुभ, पाप-पुण्य आदि कर्म करते हैं, उनका फल हमें अवश्य ही भोगना पड़ता है। यदि हम बुरे कर्म करते हैं तो उनका परिणाम सदा बुरा ही होता है। यदि हम अच्छे कर्म करते हैं तो उनका परिणाम हमेशा अच्छा ही होता है। अतीत में अथवा पूर्वजन्म में किए गए कर्म ही प्रारब्ध बनकर अच्छे-बुरे फल, परिणाम के रूप में हमारे वर्तमान जीवन में प्रकट होते हैं और हमारे द्वारा वर्तमान समय में किए जा रहे कर्म ही भविष्य में या अगले जन्म में अच्छे-बुरे फल अथवा प्रारब्ध के रूप में प्रकट होते हैं। अस्तु हम आज अच्छी-बुरी जिस किसी भी स्थिति में हैं, वह हमारे द्वारा अतीत में अथवा पूर्वजन्म में किए गए कर्मों का ही परिणाम है।
हम वर्तमान समय में जो भी कर्म कर रहे हैं, उन्हीं के आधार पर हम भविष्य में अथवा अगले जन्म में सुखद या दु:खद स्थिति में होंगे। हमारे सुख-दु:ख का कारण हम स्वयं हैं, दूसरा कोई नहीं। युगऋषि परमपूज्य गुरुदेव पंडित श्रीराम शर्मा आचार्यजी का स्पष्ट मत है कि कर्मफल का सिद्धांत 'बोओ और काटोÓ के सिद्धांत पर आधारित है। जैसे यदि किसान ने अपने खेत में मक्का, गेहूँ या आम के बीज बोये हैं तो उसके खेत में मक्का, गेहूँ और आम ही उगेंगे और यदि किसान ने अपने खेत में बबूल का बीज बोया है तो उसके खेत में बबूल ही उगेंगे-काँटे ही उगेंगे। जैसा कि कहा गया है- 'बोया पेड़ बबूल का, आम कहाँ से होय?Ó किसान के खेत की तरह यह संसार भी भगवान का खेत है।
भगवान के संसाररूपी इस खेत में जो व्यक्ति शुभ कर्म अथवा पुण्यकर्मों के बीज बोता है तो उसे अपने जीवन में शुभ फल, मधुर फल अथवा सुख ही प्राप्त होता है और बुरे कर्म, अशुभ कर्म, पापकर्म करने पर दु:ख प्राप्त होता है। अत: जब हमें बुरे कर्मों का परिणाम बुरा ही मिलता है तो हम बुरे कर्म करके अपने जीवन में दु:खों को आमंत्रित ही क्यों करें? हम सदा अच्छे, शुभ अथवा पुण्यकर्म ही क्यों न करें? क्योंकि सत्कर्मों से, पुण्यकर्मों से ही हमें अपने जीवन में सुख की प्राप्ति होगी, प्रसन्नता की प्राप्ति होगी। जब हम कोई बुरे कर्म करते हैं, जैसे कि चोरी, बेईमानी, हत्या, लूट, व्यभिचार, भ्रष्टाचार आदि तो हमारे मन में हमेशा एक अज्ञात भय समाया रहता है। हमें आत्मग्लानि होती है, मानसिक पीड़ा होती है। हम तनाव, अवसाद में रहते हैं।