नार्थ पोल पर नारी शक्ति का डंका...
   Date12-Jan-2021

vishesh lekh_1  
देश की जिस सर्वोच्च पंचायत में विभिन्न तरह के नियम, कानून और कार्य योजनाएं बनती हो, वहां पर भले ही अभी भी देश की आधी आबादी यानी महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण के लिए भी दशकों से इंतजार करना पड़ रहा हो, लेकिन अन्य क्षेत्रों में उनकी उपस्थिति और कार्य दक्षता लोहा मनवा रही है... जब देश में हर तरह से समानता के कानून लागू हो रहे हैं, महिला-पुरुषों में भेद न होने के दावे किए जा रहे हैं, तब संसद में बराबरी के हक को लेकर हमारे माननीय का कोई चिंतात्मक पहलू या पक्ष आज तक सामने क्यों नहीं आया..? इस तरह के विचारणीय बिन्दु अब नारी शक्ति की उन कार्य क्षमताओं के जरिए तेजी से उठने लगे हैं, जब वे हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रही हैं... सोमवार का दिन भारत के लिए और भारतीय वायुसेना के लिए किसी गौरवशाली क्षण से कम नहीं है... जब चार महिला पायलटों की टीम ने दुनिया के सबसे लंबे हवाई मार्ग 'नार्थ पोलÓ पर उड़ान भरकर एक नया इतिहास रचा... इन चारों महिला पायलटों ने अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को से उड़ान भरने के बाद नार्थ पोल के बेंगलुरु के केम्पेगोड़ा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर लैंडिंग की... इस दौरान 16000 किमी दूरी तय कर करना अपने आप में बहुत मायने रखता है... आर्थिक मान से भी और नारी शक्ति के साहस के आईने से देखें तो एक पंथ दो काज वाला कीर्तिमान रचकर यहां दिखाया गया है... पहला तो जो काम लंबे समय से पुरुष पायलट करने में विफल रहे, उसे इन चारों महिला पायलटों ने करके महिलाओं के उस समूह का साहसिक रूप से नेतृत्व किया है, जो आज भारत में प्रत्येक क्षेत्र में अपनी क्षमता के साथ जिम्मेदारियों का शत-प्रतिशत निर्वाह करने के लिए एक पैर पर सदैव तैयार रहती है... आर्थिक पक्ष के रूप में देखें तो इस कीर्तिमान का व्यवसायिक दृष्टि से भी बहुत बड़ा संकेत है... क्योंकि नार्थ पोल से गुजरने के कारण 10 टन ईंधन की बचत हुई है... दूसरा समय की बचत भी इस यात्रा के द्वारा सबके सामने लाई गई है... क्योंकि इतिहास बनाने वालों का ही इतिहास में नाम होता है... इसलिए नार्थ पोल से गुजरकर भारत की नारी शक्ति कैप्टन जोया, कैप्टन पापागरी तनमई, कैप्टन शिवानी और कैप्टन आकांक्षा सोनवरे ने भारत की उन तमाम बेटियों को एक ऐसा संदेश दिया है, जिससे उनके आत्मविश्वास और हर कार्य को करने में साहसिक रूप से तैयार रहने की वह प्रेरणा दी है, जो कई बार बेटी है, महिला है का संवाद उच्चारित कर उसके कदमों को या तो पीछे खींचने अथवा ठिठक जाने को मजबूर करते रहे हैं... लेकिन इस उपलब्धि के साथ भारत में नारी शक्ति के योगदान का एक नया अध्याय शुरू हो चुका है... अत: अब भारत की नारी प्रत्येक क्षेत्र में बराबरी के साथ योगदान कर रही है, तो उन्हें संसद से लेकर विधानसभा तक में भी बराबरी की भागीदारी का हिस्सेदार मानकर केन्द्र सरकार को 33 के बजाय बराबरी के हक की पहल करना चाहिए...
दृष्टिकोण
अदृश्य खतरे को समझें...
वैश्विक महामारी कोरोना से हमें लड़ाई लड़ते-लड़ते सालभर होने वाला है... इस दौरान जिस तरह के संकटों और विकट स्थितियों का हमने सामना किया, उसे कोई नहीं भूल सकता... इसके बाद भी प्रत्येक व्यक्ति तक कोरोना टीका पहुंचने और इस पूरी बीमारी को नियंत्रित करने में एक वर्ष लगना सामान्य बात है... लेकिन इस बीच जो नए तरह के अदृश्य खतरे संकेत कर रहे हैं, उससे जुड़े संकटों को समय रहते समझना होगा... मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र समेत देश के आधा दर्जन से अधिक राज्य में बर्ड फ्लू फैल चुका है... पहले सिर्फ कौवों तक बर्ड फ्लू को देखा जा रहा था, लेकिन इसके बाद मुर्गे-मुर्गियों में इसकी पुष्टि होना और अब अन्य जानवरों में भी इसके जरिए संक्रमण फैलने का यह खतरा आने वाले संकट का दृश्य हमें दिखा रहा है... देश के कई चिडि़य़ाघरों में पक्षियों को मारने की योजना प्रारंभ होने लगी है... क्योंकि यह रोग वहां तक भी पहुंच चुका है... उत्तरप्रदेश में बर्ड फ्लू के साथ ही कानपुर के चिडिय़ाघरों में दो दिन में 10 पक्षी मृत मिलना इस बात के संकेत करता है कि जिन पक्षियों को बड़े जतन से सुरक्षा देकर पाला-पोसा जा रहा था, अब रोग को महामारी बनने से रोकने के लिए उन्हें भी मारना पड़ेगा... लेकिन कौवों व मुर्गे-मुर्गियों से श्वानों तक में फैल रहे इस रोग को पिछली दफा आए बर्ड फ्लू से घातक मानकर तैयारी करनी होगी... क्योंकि हर बार हर तरह की महामारी नया रूप लेकर विकट स्थितियां निर्मित करती हैं... जिस तरह से कोरोना ने नए स्ट्रेन के जरिए देश-दुनिया में हड़कंप मचाया, ठीक उसी तरह से 2021 का बर्ड फ्लू भी पुराने बर्ड फ्लू से इतर नई विनाशलीला के संकेत कर रहा है.., जिससे सतर्क रहकर समय पूर्व बचने की तैयारियां करनी होगी...