देश सर्वोपरि के मंत्र को अपने व्यक्तित्व का अंग बनाएं युवा
   Date12-Jan-2021

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नई दिल्ली ठ्ठ 11 जनवरी (ए)
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने देश के नवयुवाओं का आज आह्वान किया कि वे नए भारत के निर्माण में समर्पण एवं निष्ठा से योगदान करें और देश सर्वोपरि के मंत्र को अपने व्यक्तित्व का अंग बनाएं। श्री बिड़ला ने यहां संसद भवन के केन्द्रीय कक्ष में खेल एवं युवा मामलों के मंत्रालय द्वारा आयोजित राष्ट्रीय युवा संसद का उद्घाटन करने के बाद समारोह को संबोधित करते हुए यह कहा। स्वामी विवेकानंद के जन्मदिन के मौके पर आयोजित राष्ट्रीय युवा संसद 11 एवं 12 जनवरी को चलेगी। बाद में उन्होंने युवाओं के साथ सामूहिक तस्वीर भी खिंचवाई और उनसे बातचीत भी की। श्री बिड़ला ने नवयुवाओं को वर्तमान संसद भवन के महत्व की जानकारी देते हुए कहा- संसद भवन के ऐतिहासिक केंद्रीय कक्ष में 14-15 अगस्त 1947 की मध्य-रात्रि को हमारे देश ने ब्रिटिश राज से स्वतंत्रता की प्राप्ति की थी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी मंगलवार को समापन समारोह को संबोधित करेंगे।
यह भवन ऐसी कितनी ही ऐतिहासिक घटनाओं का साक्षी रहा है। इसी केंद्रीय कक्ष में आजादी के बाद भारत के संविधान निर्माताओं ने भारत का संविधान बनाया था, जो आज भी हमारा मार्गदर्शन कर रहा है। उन्होंने कहा कि संविधान निर्माताओं ने जनता को केंद्र में रखकर संविधान का निर्माण किया था और एक लोकतांत्रिक गणराज्य की नींव रखी थी। उनकी भावना थी कि जनता से चुनी हुई सरकारें देश की प्रगति के लिए और देश की आम जनता के कल्याण के लिए काम करें।
लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि बीते सात दशकों में इस देश में बहुत परिवर्तन हुए और यह संसद का भवन इन परिवर्तनों का साक्षी है, जहां पर हमारे चुने हुए प्रतिनिधियों ने देश के लिए योगदान दिया और देश को आगे बढाने के लिए संकल्पित होकर काम किया। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता के पूर्व की परिस्थिति के अनुसार युवाओं ने अपना बलिदान देकर देश को आजाद कराया था। इसी भावना से नौजवानों ने अपना सर्वोच्च बलिदान दिया था। उनके प्रयासों से ही हमें आजादी मिली, लेकिन आज देशसेवा के लिए हमारे दायित्व कुछ और हैं, हमारे कर्तव्य भिन्न हैं। आज का दौर इस देश के नवनिर्माण का है, देश को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का है। नए भारत के निर्माण में अपनी सक्रिय भागीदारी निभाने का है। अब नई तकनीक, नई सोच, नए विचार एवं नवाचारों के साथ हम सबको देश को प्रगति के पथ पर आगे बढ़ाना है।