हिंदी सिर्फ एक भाषा नहीं, बल्कि जीवनी शक्ति -डॉ. निशंक
   Date12-Jan-2021

rd5_1  H x W: 0
नई दिल्ली ठ्ठ 11 जनवरी (ए)
केंद्रीय शिक्षा मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल 'निशंकÓ ने कहा है कि हिंदी हमारे लिए सिर्फ एक भाषा नहीं है, बल्कि यह हमारी जीवनी शक्ति और प्राण वायु है, जो न केवल हमें एक-दूसरे से जोड़ती है, बल्कि यह अहसास भी दिलाती है कि जब मन और आत्मा मिले हुए हों तो भौगोलिक दूरी कुछ मायने नहीं रखती।
डॉ. निशंक ने मॉरीशस में मनाए जा रहे विश्व हिंदी दिवस के अवसर मॉरीशस की जनता को संबोधित करते हुए कहा कि हिंदी विश्व की तीसरी सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा है। इंटरनेट के युग में हिंदी ने अपनी वैश्विक पहुंच में इजाफा किया है। ईमेल, एसएमएस, ई-कॉमर्स, ई-बुक, इंटरनेट में हिंदी को सहजता से स्वीकार किया जा रहा है। विश्व में हिंदी बाजार की भाषा बन रही है। गूगल, ओरकल, माइक्रोसॉफ्ट और आईबीएम जैसी बहुराष्ट्रीय कम्पनियां हिंदी को बढ़ावा दे रही हैं। यह हिंदी की बढ़ती ताकत को दिखाता है। हिंदी तेजी से तकनीक की भाषा बन रही है। ब्रिटेन, जर्मनी, चीन और अमेरिका जैसे बड़े देशों में हिंदी स्कूल से लेकर कॉलेजों तक में पढ़ाई जाने वाली भाषा बन गई है। विश्व के करीब 115 शिक्षण संस्थानों में हिंदी का अध्ययन-अध्यापन हो रहा है। हमें मिलकर इसे सयुंक्त राष्ट्र संघ में प्रतिष्ठित कराना है। विश्व हिंदी दिवस के उद्देश्य पर डॉ. निशक ने कहा- 10 जनवरी, 1975 को नागपुर में पहला विश्व हिंदी सम्मेलन का आयोजन किया गया था।
इसमें 30 देशों के 122 प्रतिनिधि शामिल हुए थे। विश्व हिंदी दिवस का उद्देश्य दुनियाभर में हिंदी का प्रचार-प्रसार करने का है ताकि हिंदी को अंतरराष्ट्रीय भाषा के रूप में विश्वभर में जानी जाए। भले ही हम दुनियाभर में 2006 से विश्व हिंदी दिवस के रूप में मनाते हों, लेकिन इसकी जड़ें बहुत गहरी हैं।