ज्ञान की गहराई
   Date11-Jan-2021

prernadeep_1  H
प्रेरणादीप
भा रतीय तत्तचिंतन के महान विचारक और अद्वैतवाद के प्रवर्तक आद्य शंकराचार्य एक बार अपने शिष्यों के साथ समुद्र के तट पर बैठे वार्तालाप कर रहे थे। उनके एक शिष्य ने ठकुरसुहाती की भाषा में शंकराचार्यजी से कहा- गुरुदेव! आपसे और बड़ा विद्वान इस धरा पर कोई न होगा। आप पूर्णज्ञानी हैं। शिष्य की अज्ञानपूर्ण वाणी को सुनकर आचार्य शंकर ने अपने दंड को जल में डुबोकर निकालते हुए कहा - वत्स! इस दंड को आप देख हे हैं न! यह पानी में पूरा डूबने के बाद भी अपने साथ कुछ ही बूंदें लेकर आ पाया है। ज्ञान तो अथाह है। कितना ही सीखने के बाद पाने वाला अधूरा है, पर भरता तो कभी भी नहीं है।