रोग और तनाव को आमंत्रण है धन का लोभ
   Date08-Sep-2020

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धर्मधारा
भि वंडी की एक क्रेप पेपर पुष्ठा बनाने वाली कंपनी में काम के दौरान ही चक्कर आने से एक मजदूर की मौत हो गई। कारण खोजने पर यह पता चला कि वहां परिवार का बोझ उठाने की चाहत में ज्यादा से ज्यादा काम करने से कई बार मजदूरों की मौत हो जाती है। स्वाभाविक-सी बात है कि यह घटना भी ज्यादा देर तक काम करने व काम कराने से संबंधित है।
ऐसे कई शोध हुए हैं, जिनमें आधुनिक तरीके के काम के दबाव के नाम पर कई तरह की मानसिक बीमारियां बढऩे की बात सामने आई है। उदाहरण के लिए अगर किसी व्यक्ति की ड्यूटी कॉल्स और ई-मेल का जवाब देने की है, तो यह कार्य भी किसी बड़े तनाव व कार्य के दबाव से कम नहीं है, क्योंकि हमेशा इनबॉक्स को चैक करते रहने का दबाव मानसिक तनाव देता है और यह तनाव लगातार बढ़ता जाता है। आज मोबाइल हमारे कार्य का एक अभिन्न हिस्सा बन चुका है। उसके माध्यम से लोग घर पर रहते हुए भी अपना कार्य करने में व्यस्त रहते हैं। एक प्रकार से मोबाइल ने चौबीसों घंटे काम करने या काम के बारे में सोचते रहने की प्रवृत्ति बढ़ाई है। इसी तरह कार्यालय भी यह उम्मीद करता है कि उसके वर्कर्स लगातार कार्य करने व उसके बारे में सोचने की कोशिश करें। इसके लिए लोगों को कई तरह के प्रलोभन भी दिए जाते हैं। लोगों के सामने जितना बड़ा लक्ष्य रखा जाता है, उसे पूरा करने के लिए उसी भांति के प्रलोभन भी सामने रखे जाते हैं।
पैसे का लोभ कहा जाए या लोगों की जरूरत, लेकिन कार्य करने की यह शैली पहले व्यक्ति के शरीर को मशीन बनाती है और फिर उसे जर्जर कर देती है। तात्पर्य यह है कि इस कार्यशैली के माध्यम से व्यक्ति मशीन की भांति अपने शरीर से कार्य लेता है, वह शरीर के आराम-विश्राम व पोषण तक को नजरअंदाज कर देता है। इसके कारण शरीर एक सीमा तक तो कार्य करता है, लेकिन इसके उपरांत वह जवाब दे देता है, यानी रोगों से ग्रसित होने लगता है।