अकाउंट हैक के पीछे की मंशा...
   Date05-Sep-2020

vishesh lekh_1  
तकनीक का उपयोग से ज्यादा दुरुपयोग समस्याएं पैदा कर रहा है...क्योंकि नई-नई तकनीक से उपयोगकर्ता भले ही दक्षता के मामले में कुछ समस्याओं से दो-चार होती है..,लेकिन जिस तरह से साइबर अपराध का दायरा दिनोंदिन बढ़ रहा है...वह भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर, वह चिंताजनक है...क्योंकि गरीबों के सही मायने में बैंक खाते यानी अकाउंट होते हैं...लेकिन समाज-राष्ट्र में अग्रणीय भूमिका का निर्वाह करने वालों के सोशल अकाउंट होते हैं...ये बहुत महत्वपूर्ण व गोपनीय है..,क्योंकि इनके जरिए उनकी सामाजिक एवं राष्ट्रीय गतिविधियों को भी बढ़ावा देने में एक महती भूमिका होती है...ऐसे में इन खातों में ऐसे अनेक गोपनीय साक्ष्य एवं दस्तावेज भी समाहित रहते हैं, जो समय की जरूरत के मान से संवाद के लिए उपयोग होते हैं...अत: ऐसे खातों की सुरक्षा जरूरी भी है..,क्योंकि राष्ट्रीय ही नहीं, अंतरराष्ट्रीय सक्रिय साइबर अपराधी अलग-अलग मंशाओं से इन खातों को हैक करके इनके दुरुपयोग का सिलसिला लगातार बढ़ा रहे हैं...जुलाई में माइक्रोसाफ्ट के को-फाउण्डर बिलगेट्स, अमेजन के सीईओ जेफ बेजोस, टेस्ला के सीईओ एलन मस्क और अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा समेत कई नामी हस्तियों के ट्विटर अकाउंट हैक किए जा चुके हैं...इन हैकर्स ने आईफोन कंपनी एपल को कैब सर्विस कंपनी उबर के अकाउंट्स को भी निशाना बनाया था...इसलिए इस तरह की चोरी की वारदातों को अंजाम ये साइबर अपराधी क्रिप्टो करेंसी फ्रॉड के लिए देते हैं...ऐसे में अगर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की व्यक्तिगत वेबसाइट का ट्विटर अकाउंट हैक किया गया और हैकर्स ने इसमें प्रधानमंत्री राहत कोष में दान करने वह भी बिटकॉइन ने चंदा मांगा...तो इसे इस रूप में समझा जाना चाहिए कि यह आर्थिक धोखाधड़ी का वह अपराधी कृत्य है, जो पहले भी देश-विदेश की नामी हस्तियों के साथ हो चुका है...हालांकि उसमें किसी गोपनीय दस्तावेज या अन्य किसी सामग्री के चोरी होने का मामला सामने नहीं आया है...ट्विटर ने भी इस साइबर अपराध पर तुरंत संज्ञान लेते हुए जांच प्रक्रिया को बढ़ा दिया है...इसमें कोई दो राय नहीं है कि प्रधानमंत्री के फंड आधारित इस खाते को हैक करने के पीछे अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराधियों के साथ संभवत: देश में भी कुछ ऐसे दहशतगर्दों की मिलीभगत संभव है..,जो कैसे भी प्रधानमंत्री और उनके कार्यालय को बदनाम करने की साजिशों को आगे बढ़ा रहे हैं..,क्योंकि पीएम केयर फंड पर विपक्षी दल शुरू से ही हमलावर है...ऐसे में अकाउंट हैक करके बिटकॉइन ने दान मांगना एक खुली धोखाधड़ी है...क्योंकि बिटकॉइन एक वर्चुअल करेंसी है...जिसका लेन-देन ऑनलाइन होता है...इसे दूसरी करेंसी में बदला भी जा सकता है...यानी खाता हैक करने की यह धोखाधड़ी कुल मिलाकर आर्थिक अनियमितता के ही एक अंग के रूप में देखी जानी चाहिए...
दृष्टिकोण
साजिशों की खुलती परतें...
भारत-चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा पर महीनों से तनाव व्याप्त है...यह तनाव चीन द्वारा खुराफाती खेल के तहत आगे बढ़कर उपजाया गया है...इसलिए इसकी पूरी जिम्मेदारी चीन पर है कि वह विश्व के सामने क्या दर्शाना चाहता है..? क्योंकि सीमाओं के शांतिपूर्ण समाधान का भारत का रुख हमेशा से अंतरराष्ट्रीय मंच को विश्वास में लेने वाला रहा है...इसलिए भारत को कोई अंगुली उठाकर यह नहीं कह सकता कि भारत का अपनी सीमाओं की सुरक्षाओं को लेकर उठाया गया कौन-सा भी कदम या लिया गया किसी भी प्रकार का कड़ा निर्णय भविष्य में गलत साबित होगा...फिर चाहे मोदी सरकार के कार्यकाल में म्यांमार में घुसकर माओवादी आतंकवादियों का खात्मा हो या फिर सर्जिकल स्ट्राइक, एयर स्ट्राइक के जरिए पाकिस्तान द्वारा पनाह दिए गए आतंकियों अड्डों को तबाह करना हो...या फिर अब चीन पर लगातार डिजिटल स्ट्राइक के जरिए उसकी कमर तोडऩा हो...भारत अपने रुख पर कायम है...लेकिन इस बीच चीन की साजिशों की परतें खुल-खुलकर सामने आ रही हैं...चीन ने जिस तरह से श्रीलंका व नेपाल को अपने आर्थिक जाल में फंसाकर भारत के खिलाफ खड़ा करने की रणनीति अपनाई और इसके लिए जो धन मुहैया कराया...वह उसके उस कुटिल-भ्रमित आचरण का प्रमाण है, जो विस्तारवाद की भूख से दिन-रात तड़पते हुए दूसरे देशों की सीमाओं पर अतिक्रमण की हरदम कोशिश करता है...चीन ने नेपाली संगठनों को ढाई करोड़ से अधिक रुपए इसलिए उपलब्ध कराए...ताकि वहां के संगठन भारत के खिलाफ सीमा विवाद का झूठा दिखावा करते हुए प्रदर्शन करें...ऐसा हुआ भी...इससे यह साजिश खुलेरूप से उजागर होती है कि चीन भारत के आंतरिक मामलों में भी पैसों के बल पर हस्तक्षेप करके माहौल बिगाडऩे का कोई मौका नहीं गंवा रहा है...