ईश्वर का सृष्टि संचालन का वैज्ञानिक रूप
   Date12-Sep-2020

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धर्मधारा
यह विश्व-ब्रह्मांड परमेश्वर ने बनाया है, वे ही इसके संचालनकर्ता, पालन-पोषणकर्ता और विध्वंसकर्ता हैं। कोई कितनी भी सूक्ष्मता से इसका अवलोकन करे, लेकिन इसकी तह तक वह नहीं पहुंच पाता। इसी कारण महान वैज्ञानिक आइंस्टीन का कहना था कि मैंने अब तक जो भी जाना, वह सागर की एक बूंद की तरह है। परमेश्वर ने जितनी सूक्ष्मता से स्थूल को रचा है, उतनी ही सूक्ष्मता से सूक्ष्म का भी निर्माण किया है, उसकी रचना अद्भुत है, अपरंपार है, इसी कारण जड़-चेतन से युक्त इस जगत को जन्म देने वाला परमेश्वर किसी महावैज्ञानिक के तुल्य है। विद्वानों ने ब्रह्म को 'सर्वव्यापी तंतु सचेतन ऊर्जाÓ के नाम से निरूपित किया है अर्थात वह सर्वव्यापी संचेतन ऊर्जा (भौतिक ऊर्जा नहीं) प्रणव, प्राण के समान है। इसीलिए उपनिषद् के ऋषि भी यह कहते हैं कि 'सर्वाणि ह वा इमानि भूतानि प्राणमेवाभिसंविशन्ति प्राणमभ्युज्जिहतेÓ (छांदोग्योपनिषद् 1.11,5)। इस ऋचा में भौतिक पदार्थों में सबसे अधिक व्यापकता का सूचक और सबसे अधिक शक्ति का प्रकाशक, प्राण को बताया गया है। इस तरह प्राण के रूप में परमात्मा संपूर्ण जगत में व्याप्त है। इस सृष्टि के सात आयाम हैं-(भू:, भुव:, स्व:, मह:, जन:, तप: और सत्यम्)। भू: से पृथ्वी, भुव: से अंतरिक्ष, स्व: से द्यु:लोक, मह: से महत्, जन: से उत्पादक, तप: से तेज और सत्यम् से प्रकृति विभिन्न रूपों में उत्पन्न हो रही है और इन सबको उत्पन्न करने वाला परमात्मा सारे विश्व को तटस्थ होकर देख रहा है। बड़ी ही वैज्ञानिक रीति से समस्त संसार का कार्य स्वत: संचालित हो रहा है, परिवर्तित हो रहा है, गतिशील हो रहा है, नष्ट हो रहा है और पुन: सृजित हो रहा है। परमात्मा ने सारी सृष्टि में ऐसा अटल नियम बनाया है कि उसके असंख्य परमाणुओं के संघात से बनी विभिन्न प्रकार की सारी सृष्टियों में जिन-जिन की अवधि समाप्त होने लगती है, वहां-वहां प्रलय होने लगती है और जहां-जहां प्रलय होती है, वहां-वहां पुन: नए सिरे से सृष्टि सृजन क्रम आरंभ हो जाता है। इसके पीछे कारण यह है कि सृष्टि निर्माण के पूर्व भौतिक ऊर्जा-कण और तरंग के रूप में विद्यमान रहती है, जिसमें सूक्ष्मक्रिया होती रहती है और धीरे-धीरे वह स्थूलसृष्टि के रूप में प्रकट होती है। जब स्थूल जगत के विनष्ट होने का समय आता है तो वह स्थूल सृष्टि उसी सूक्ष्म ऊर्जा-कण और तरंग के रूप में परिवर्तित हो जाती है।