मनुष्य के दीर्घ जीवन के सूत्र
   Date10-Sep-2020

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धर्मधारा
दी र्घायु होना एक आशीर्वाद की तरह है, जिसे लोग पाना चाहते हैं। प्राचीन समय में कई लोग इसीलिए तप करते थे, ताकि उन्हें अमर होने का वरदान मिल जाए। यदि अमर न हो सकें तो वरदान में कुछ ऐसा मांगते थे, जिससे वे लंबा जीवन जी सकें। लंबा जीवन जीना सभी चाहते हैं, कोई जल्दी मरना नहीं चाहता और सुखद जीवन का आनंद उठाना चाहते हैं। महात्मा गांधी ने स्वयं 125 साल तक जीवन जीने की कामना की थी। उनकी इस कामना के पीछे उनके अनगिनत उद्देश्य थे, जिन्हें वे जीते जी पूरा करना चाहते थे। लंबा जीवन जीने के पीछे लोगों के उद्देश्य होते हैं, वे दुनिया को कुछ देना चाहते हैं, दुनिया के लिए कुछ करना चाहते हैं और कुछ न भी करें, तो भी व्यक्ति की जीवन से, शरीर से ऐसी आसक्ति होती है कि वह उसे छोडऩा नहीं चाहता। इसीलिए युग-युग जियो, शतायु हो, दीर्घायु हो, आयुष्मान भव जैसे आशीर्वाद दिए जाते हैं,ताकि व्यक्ति का जीवन फले-फूले, वह जीवन में यशस्वी बने और अपनी कीर्ति बढ़ाए। प्राचीनकाल में 100 साल की उम्र पार करना सहज-सरल माना जाता था, लेकिन वर्तमान युग में 100 साल की उम्र पार करना किसी आश्चर्य से कम नहीं रह गया है। फिर भी देश-विदेश में ऐसे कई लोग देखने को मिल जाते हैं, जिनकी उम्र सौ साल के करीब है या उससे ज्यादा है। 1990 के दशक में दुनिया की औसत आयु 65.3 साल थी, जो आज बढ़कर 71.5 हो गई है। इस दौरान पुरुषों की औसत आयु 5.8, जबकि महिलाओं की 6.6 साल बढ़ गई है। इससे यह पता चलता है कि हमारी औसत आयु लगातार बढ़ रही है और ऐसे लोगों की तादाद भी बढ़ रही है, जिनका आयु 100 वर्ष से पार हो चुकी है। संयुक्त राष्ट्र संघ की एक रिपोर्ट के अनुसार अपने देश में 11 हजार से अधिक लोग ऐसे हैं, जिनकी उम्र 100 से अधिक है। रिपोर्ट के आंकड़े यह बताते हैं कि 2050 तक 100 साल से अधिक की उम्र वाले लोगों की तादाद छह लाख तक हो जाएगी और इस दृष्टि से जापान दुनिया का सबसे अव्वल देश होगा। वहां के गांवों में दो-चार शतायु लोगों का मिलना आम बात है। लेकिन बढ़ती उम्र के मामले में इससे भी आगे एक देश है, वह है - मोनाको। यहां की औसत आयु 89.63 साल है, जबकि जापान की औसत आयु 85 के आसपास है।