तेल के दाम और राहत का इंतजार...
   Date01-Aug-2020

vishesh lekh_1  
जो दिल्ली की केजरीवाल सरकार ने किया, क्या वह अन्य राज्य सरकारें नहीं कर सकती..? क्योंकि तेल के बढ़े हुए दाम और उस पर राज्य सरकारों के अपने मनमाफिक कर (टैक्स) न केवल महंगाई को बढ़ाते हैं..,बल्कि उद्योग-धंधों को प्रभावित भी करते हैं...पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढऩे का सीधा असर सार्वजनिक परिवहन..,उपभोक्ता वस्तुओं की कीमतों और कई सेवाओं पर पड़ता है...एक तरफ महंगाई की दर काबू में करने के प्रयास हो रहे हैं, तो दूसरी तरफ तेल की कीमतें बढ़ाई जा रही हैं..,यह अपने आप में विरोधाभासी है...पेट्रोल-डीजल की कीमतों को संतुलित न कर पाने के पीछे बड़ा कारण है कि केंद्र और राज्य सरकारें इन पर लगने वाले करों और उपकरों में किसी प्रकार की कटौती करने के बजाय बढ़ोतरी ही करती देखी जाती हैं...जब पहली बार केंद्र में भाजपा सरकार आई थी, तब भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें काफी कम थीं...मगर सरकार ने इस तर्क पर पहले से निर्धारित करों को यथावत रखने के अलावा एक नया केंद्रीय कर और जोड़ दिया था कि उस पैसे से एक तेल भंडार बनाया जाएगा..,जो अंतरराष्ट्रीय बाजार में विषम स्थितियां पैदा होने पर काम आएगा और तेल की कीमतें नहीं बढ़ानी पड़ेंगी... मगर हकीकत यह है कि न तो तेल भंडार बन सका है और न तेल की कीमतों में कभी कमी आई है...तब से कर बढ़े ही हैं... पेट्रोल और डीजल पर राज्यों की तरफ से लगने वाला कर पहले ही बहुत अधिक है, जिसे लेकर सवाल उठते रहे हैं...महामारी के इस दौर में जब उद्योग-धंधों के लंबे समय तक बंद रहने की वजह से अर्थव्यवस्था पर बुरी मार पड़ी है..,महंगाई बढ़ी है, ऐसे में दिल्ली सरकार का डीजल पर से मूल्यवद्र्धित कर यानी वैट कम करने का फैसला लोगों को बड़ी राहत पहुंचा सकता है...केजरीवाल सरकार ने डीजल पर वैट तीस फीसद से घटाकर 16.75 फीसद कर दिया है..,जिसके चलते अब दिल्ली में डीजल की कीमत करीब बयासी रुपए से घटकर तिहत्तर रुपए चौंसठ पैसे हो गई है...यानी आठ रुपए छत्तीस पैसे की कमी हुई है...इसे वैट में ऐतिहासिक कटौती माना जा रहा है। सरकारों को राजस्व का बड़ा हिस्सा तेल पर लगने वाले कर से आता है...जाहिर है..,दिल्ली सरकार को इस फैसले से भारी नुकसान उठाना पड़ेगा..,मगर उसे विश्वास है कि इस बोझ को वह वहन कर लेगी और अर्थव्यवस्था को भी पटरी पर लाने में उसे कोई मुश्किल नहीं आएगी...ऐसे समय में जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच चुकी थीं..,कुओं से कच्चा तेल उठाने वालों की तलाश हो रही थी..,तब भी भारत में तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी होती रही...इसे लेकर केंद्र सरकार पर अंगुलियां भी उठती रही हैं...
ऐसे में दिल्ली सरकार का यह कदम दूसरी सरकारों के लिए नजीर हो सकती है। केजरीवाल सरकार के फैसले का असर उनके राजस्व की कमाई पर निस्संदेह पड़ेगा, पर इससे सार्वजनिक परिवहन और माल ढुलाई आदि के खर्चों में जो कमी आएगी, उससे बाजार में स्वाभाविक रूप से गति लौटेगी। इस तरह तेल पर की गई कर की कटौती की भरपाई दूसरी कारोबारी गतिविधियों के बढऩे से हो सकती है। इसका सबसे बड़ा लाभ आम उपभोक्ता को होगा। अगर दूसरी राज्य सरकारें भी इस गणित को समझने का प्रयास करें, तो बढ़ती महंगाई को कम करने में मदद मिल सकती है। राजस्व जमा करने का अर्थ यह नहीं होता कि आम लोगों पर कर के ऊपर कर लादते जाओ। तमाम वस्तुओं पर जीएसटी लागू है, इसलिए राज्य सरकारें उन पर फैसला नहीं कर सकतीं, पर तेल पर लगने वाले मूल्य वद्र्धित कर में तो वे रियायत दे ही सकती हैं।
दृष्टिकोण
महंगा होता सोना और संभावनाएं...
बाजार में ऐसा माहौल निर्मित किया जा रहा है कि दीपावली तक सोना 60 हजारी होगा...सोना, शेयर बाजार और तेल का मामला एक-दूसरे का पूरक है...बाजार में सोने के दाम जिस तेजी से चढ़ रहे हैं..,उसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की होगी...सोना अब बावन हजार रुपए प्रति दस ग्राम पर पहुंच गया है...इससे पहले यह इतनी ऊंचाई पर कभी नहीं गया...इसलिए महंगे होते सोने को देखकर एक बार तो मन में यह बात आना स्वाभाविक ही है कि काश सोने में पैसा लगाया होता तो भारी मुनाफा होता..! पर हर निवेशक ऐसे निवेश का फैसला आसानी से नहीं कर पाता...पिछले साल अगस्त में सोना जब चालीस हजार रुपए प्रति तोला पहुंचा था..,तभी से संकेत मिल रहे थे कि आने वाले वक्त में यह पीली धातु आसमान छुएगी...अभी जो स्थिति बनी हुई है..,उसमें अगर सोना नित नए रेकार्ड बनाता रहे..,तो हैरानी की बात नहीं होनी चाहिए...सोने के रोजाना बढ़ते दाम से जहां निवेशकों की चांदी हो गई है..,वहीं कारोबारियों और साधारण खरीदारों की चिंता बढऩा भी लाजिमी है...देश ही नहीं, दुनियाभर के सर्राफा बाजारों का अभी जो रुख बना हुआ है..,उसे देखते हुए हाल-फिलहाल इसमें गिरावट के आसार नजर नहीं आते...हालांकि अब त्योहारी और शादी-ब्याह का मौसम ज्यादा दूर नहीं है...ऐसे में सोने की मांग बढ़ेगी...लेकिन अगर सोना सस्ता नहीं होगा तो खरीदार सोने को हाथ लगाने में हिचकेंगे...जब दुनिया कोरोना महामारी के संकट से गुजर रही है..,वैश्विक अर्थव्यवस्था मंदी का सामना कर रही है, ज्यादातर देशों की माली हालत लडख़ड़ा गई है..,इसके बावजूद सोने की चमक पर कोई असर नहीं पड़ा है..,बल्कि यह तेज ही होती जा रही है...
इसका बड़ा कारण यह है कि दुनियाभर में ब्याज दरें काफी नीचे आ चुकी हैं, जमीन-जायदाद कारोबार ठप पड़ चुका है, शेयर बाजारों की हालत इतनी खस्ता है कि निवेशक और हाथ जलाने का जोखिम नहीं ले सकते।