जीवन की सार्थकता का मार्ग सकारात्मक सोच
   Date01-Aug-2020

dharmdhara_1  H
धर्मधारा
कुछ करने, पाने व सीखने की ललक हमें सफलता की ओर ले जाती है। यदि मन में कुछ चाह न होगी, तो कुछ करने, पाने की इच्छा भी न होगी। जीवन तभी सजीव व सुंदर दिखता है, जब मन में कुछ करने का जोश व जुनून होता है। यदि ऐसा न हो, तो लगता है कि केवल जीवन को ढोया जा रहा है, इसका सार्थक उपयोग नहीं हो पा रहा है। कुछ ऐसी महत्वपूर्ण बातें हैं, जो हमें न केवल सफल व्यक्ति बनाती हैं, बल्कि जीवन के सार्थक होने का अहसास भी दिलाती हैं।
सबसे पहले यह तय करना जरूरी होता है कि हमें क्या करना है? और इसका निर्धारण हमें अपनी खुशी से करना चाहिए, तभी हम अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए तन-मन से प्रयास कर सकेंगे। लक्ष्य को भेदना, लक्ष्य को पाना आसान नहीं होता, मार्ग में कई तरह के अवरोध आते हैं, समस्याओं और तरह-तरह की चुनौतियों से सामना होता है, इन सब से जूझने पर कार्य में मन को रमाने पर ही लक्ष्य तक पहुंचा जा सकता है। व्यक्ति की उम्र चाहे जो भी हो, उसे सदैव अपने मन में कुछ नया सीखने की ललक रखनी चाहिए। कई लोग यह सोचने लगते हैं कि बहुत सीख लिया, अब और सीखकर क्या करना है। व्यक्ति की इस तरह की सोच उसके अंदर आगे बढऩे की ललक को रोक देती है। चूंकि सीखने की कोई उम्र नहीं होती और न ज्ञान की कोई सीमा होती है। इसलिए सीखने की उम्र पर कोई सीमा निर्धारित नहीं करनी चाहिए और ज्ञान की प्यास हमेशा रखनी चाहिए। जीवन में आगे बढऩे और सफल होने में सकारात्मक सोच की अहम भूमिका होती है। जब व्यक्ति की सोच सकारात्मक होती है, तो वह सरलता से आगे बढ़ पाता है, क्योंकि इस राह में अनेक ऐसे पड़ाव आते हैं, जहां पर बुरे अनुभव मिलते हैं, जो मन को हतोत्साहित करते हैं, लेकिन सकारात्मक सोच मन के हतोत्साह को उत्साह में सरलता से बदल देती है, इसलिए सकारात्मक सोच अपनानी चाहिए। योजनाएं हमें लक्ष्य तक पहुंचने का मार्ग बताती हैं, जिन पर चलकर हम अपनी मंजिल की ओर बढ़ते हैं। इसलिए इनके निर्धारण में बहुत सावधानी बरतनी चाहिए, क्योंकि यदि योजनाएं विफल होती हैं तो हम अपने लक्ष्य से दूर हो जाते हैं। योजनाओं का निर्धारण जितना जरूरी होता है, उतना ही जरूरी यह भी होता है कि हम योजना के अनुरूप सही गति से आगे बढ़ते रहें। इसलिए योजनाएं हमारी कार्यक्षमता के अनुरूप ऐसी होनी चाहिए, जिन पर हम सुगमतापूर्वक चल सकें। प्रयास हम सभी के पास एक ऐसा हथियार होता है, जिसके माध्यम से हम कभी पीछे नहीं हटते, हार नहीं मानते और अंतत: इसके सहारे हम अपनी मंजिल को पा लेते हैं। प्रयास करने में हर्ज ही क्या है, एक कोशिश तो की जा सकती है।