स्वदेशी मूर्ति, उचित विचार...
   Date31-Jul-2020

vishesh lekh_1  
अयोध्या में 5 अगस्त का दिन अनेक मायने में ऐतिहासिक रहने वाला है... क्योंकि सैकड़ों वर्षों के संघर्ष और उस संघर्ष से उपजे उत्साह, विश्वास, आस्था और अस्मिता के विषय को सही मायने में उसी दिन (बुधवार, 5 अगस्त) आधारभूमि मिलने वाली है... इस दिन भारत की आस्था और अस्मिता के प्रतीक प्रभु श्रीराम के भव्य मंदिर निर्माण का भूमिपूजन होगा... शिलान्यास के साथ ही वर्षों से हो रहे इंतजार की वह घड़ी समाप्त हो जाएगी और एक नए युग का सूत्रपात होगा... ऐसे में अगर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास के महामंत्री रामभक्तों से यह आव्हान कर रहे हैं कि वे अभी 5 अगस्त को देश के कोने-कोने से अयोध्या न पहुंचें, तो इसके बहुत गंभीर मायने हैं... क्योंकि फिलहाल पूरे देश में ही नहीं, विश्व में भी कोरोना की जो गति चल रही है, उससे जनसमूह का एक जगह एकत्रित होना खतरे से खाली नहीं है... दूसरा प्रधानमंत्री के साथ ही शीर्ष 200 से अधिक साधु-संत एवं गणमान्यजन इस समारोह में शामिल होंगे... ऐसे में सुरक्षा व्यवस्था की दृष्टि से ही फिलहाल अयोध्या में कोई सैलाब उमड़े और स्थिति बिगड़े, इसके पहले तीर्थ क्षेत्र न्यास की चिंता वास्तविक है... लेकिन इस बीच एक जो बात सामने आ रही है कि अयोध्या में भगवान श्रीराम की 251 फीट ऊंची यह प्रतिमा चीन में गौतम बुद्ध की सबसे ऊंची 208 फीट की प्रतिमा से ऊंची और भव्य होगी... इसमें 20 मीटर ऊंचा चक्र होगा... प्रतिमा 50 मीटर ऊंचे आधार स्थल पर लगाई जाएगी... इस लिहाज से प्रतिमा की कुल ऊंचाई 300 फीट से ज्यादा हो जाएगी... इस प्रतिमा की विशेषता यह है कि यह स्वदेश निर्मित प्रतिमा होगी... यानी कोरोनाकाल में प्रधानमंत्री मोदी ने जिस आत्मनिर्भर भारत अभियान के लिए लोकल-वोकल का नारा दिया, उसे वास्तविकता में धरातल पर उतारने का काम अयोध्या से शुरू होगा... क्योंकि सरदार पटेल की सबसे ऊंची प्रतिमा पर सवाल उसके चीन निर्मित होने पर खड़े किए जाते रहे हैं... ऐसे में सरकार ने या फिर तीर्थ क्षेत्र न्यास ने यह तय किया कि पद्मभूषण से सम्मानित राम सुतार और अनिल सुतार भगवान श्रीराम की इस 251 फीट ऊंची भव्य प्रतिमा पर निर्माण करने में जुटे हैं... इस प्रतिमा की डिजाइन क्या होगी, इसको लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से विस्तृत चर्चा हो चुकी है... कहने का तात्पर्य यही है कि राम मंदिर आंदोलन का वह पड़ाव अपनी मंजिल पर पहुंचने वाला है, जिसमें भगवान श्रीराम के भव्य मंदिर निर्माण की परिकल्पना को प्रत्येक भारतीय में अपने दिल-दिमाग में वर्षों से संजोया है... इस बीच अगर श्रीरामजी की प्रतिमा को भारत में ही निर्मित करने यानी स्वदेशी निर्माण की पहल को आगे बढ़ाया जा रहा है तो यह रामराज्य की उस कल्पना को भी साकार करता है, जिसमें स्थानीय को प्राथमिकता का भाव छुपा है...
दृष्टिकोण
कोरोना को हराने का उत्साह बना रहे...
वैश्विक महामारी कोरोना के कारण देश में संक्रमण के करीब 16 लाख मामले हो चुके हैं... 35 हजार से अधिक लोगों की मौत भी इस घातक वायरस के कारण हो चुकी है... लेकिन इस बीच जो राहत वाली बात है, वह यही है कि भारतीय जनमानस में रोग प्रतिरोधक क्षमता का ही यह कमाल है कि कोरोना को हराने वाले और इस संक्रमण से मुक्त होने वाले लोगों की संख्या कोई हजारों में नहीं, बल्कि लाखों में है... और वह भी 10 लाख के पार... कोरोना को मात देने का यह जज्बा-उत्साह आमजन में बना रहना चाहिए... क्योंकि इससे न केवल कोरोना वॉरियर्स जिसमें चिकित्साकर्मी, पुलिसकर्मी, अन्य स्वास्थ्यकर्मी, अन्य जांच दल एवं प्रशासनिक स्तर के जो लोग कोरोना के खिलाफ लगातार अभियान लिए हुए हैं और स्वयं की सेहत को दांव पर लगाकर लोगों के स्वास्थ्य की रक्षा कर रहे हैं, उनके लिए यह सकारात्मक बदलाव इस अभियान को कोरोना को अंतिम चरण तक हराने का उत्साह बनाए रखने का आधार बनेगा... क्योंकि जब किसी को यह पता चलता है कि इस वैश्विक महामारी के ठीक होने वाले लोगों का आंकड़ा यानी स्वस्थता दर तेजी से बढ़ते-बढ़ते 70 फीसदी से ऊपर पहुंच चुकी है, तब हर कोई इस महामारी के खिलाफ उठाये जाने वाले कदमों को सकारात्मक दृष्टि से लेता है और निरंतर मास्क लगाने, दो गज दूरी का पालन करने, यहां तक कि अपने आसपास के परिवेश में स्वच्छता बनाए रखने में भी अहम भूमिका निभाता है... यह घबराने वाला बिन्दु नहीं है कि देश में अब प्रतिदिन 40 से 50 हजार संक्रमित मिल रहे हैं, क्योंकि जांच की दर बढ़ गई है... ऐसे में कोरोना संक्रमित मिलना स्वाभाविक है, लेकिन उसको हराने का उत्साह बना रहना चाहिए...