'विकास साझीदारीÓ के नाम पर 'पराधीन साझीदारियोंÓ के लिए मजबूर नहीं किया
   Date31-Jul-2020

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चीन की कर्ज कूटनीति पर प्रधानमंत्री का हमला: कहा-भारत ने
नई दिल्ली/पोर्ट लुई द्य 30 जुलाई (वा)
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने चीन का नाम लिए बिना उसकी कर्ज कूटनीति पर हमला करते हुए आज कहा कि 'विकास साझीदारीÓ के नाम पर देशों को 'पराधीन साझीदारियोंÓ के लिए मजबूर किया गया है जिससे औपनिवेशिक एवं साम्राज्यवादी शासन को बल मिला है और मानवता पीडि़त हुई है।
श्री मोदी ने गुरुवार को एक वीडियो कॉन्फ्रेंंसिंग के माध्यम से मॉरीशस के प्रधानमंत्री प्रविन्द्र जगन्नाथ के साथ भारत के सहयोग से पोर्ट लुई में निर्मित मॉरीशस के सुप्रीम कोर्ट के भवन के उद्घाटन के मौके पर ये तीखी टिप्पणी की। उन्होंने यह भी कहा कि भारत की उसके मित्र देशों के साथ विकास साझीदारी सम्मान पर आधारित हैं। उनमें किसी शर्त अथवा किसी भी राजनीतिक अथवा वाणिज्यिक हित से जुड़ी नहीं होती है। इस मौके पर श्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि आज भारत एवं मॉरीशस के बीच विशेष मैत्री के उत्सव का दिन है। पोर्ट लुई में सुप्रीम कोर्ट भवन हमारे सहयोग एवं साझा मूल्यों का प्रतीक है। भारत एवं मॉरीशस दोनों देशों में स्वतंत्र न्याय पालिका हमारी लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं के महत्वपूर्ण स्तंभ हैं।
भारत का दृष्टिकोण मानव केन्द्रित-प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत का हिन्द महासागर क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा एवं प्रगति के विजऩ 'सागरÓ के केन्द्र में मॉरीशस ही है।
उन्होंने कहा कि भारत विकसित होना चाहता है और अन्य देशों को भी विकास जरूरतों में सहायता करना चाहता है। विकास के लिए भारत की दृष्टिकोण मानव केन्द्रित है। हम मानवता के कल्याण के लिए काम करना चाहते हैं। उन्होंने कहा इतिहास ने हमें सिखाया है कि विकास साझीदारी के नाम पर देशों को पराधीन साझीदारियों के लिए मजबूर किया गया। इससे औपनिवेशिक एवं साम्राज्यवादी शासन को बल मिला तथा वैश्विक शक्ति केन्द्रित ताकतवर बने जिससे अंतत: मानवता पीडि़़त हुई। उन्होंने कहा कि भारत विकास साझीदारियां सम्मान, विविधता, भविष्य का ख्याल एवं सतत विकास के लक्ष्यों का ध्यान रख स्थापित कर रहा है। भारत के लिए विकास सहयोग का मूल सिद्धांत है - साझीदारों का सम्मान।