उम्मीद की किरण साबित होती भारतीय अर्थव्यवस्था
   Date30-Jul-2020

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प्रहलाद सबनानी
को रोना वायरस महामारी के चलते तालाबंदी के बाद, अनलॉक के दूसरे चरण को प्रारम्भ हुए भी एक अरसा बीत चुका है। अत: देश में आजकल यह चर्चा जोरों पर है कि क्या हम आर्थिक क्षेत्र में कोरोना वायरस की महामारी के पूर्व की स्थिति में पहुंच गए हैं अथवा नहीं। इस संबंध में सरकार की ओर से समय-समय पर जारी आंकड़ों एवं हाल ही में जारी गूगल की कोविड-19 मोबिलिटी रिपोर्ट पर यदि नजर डालें तो स्पष्ट रूप से यह दृष्टिगोचर हो रहा है कि कोरोना वायरस महामारी के चलते भारत की अर्थव्यवस्था अब वापस पटरी पर लौटती दिख रही है।
बिजली की खपत का स्तर कोविड-19 के पूर्व के खपत के स्तर के 90 प्रतिशत तक पहुंच चुका है। जून 2020 माह में वस्तु एवं सेवा कर का संग्रहण भी 91000 करोड़ रुपए का रहा जो जून 2019 के संग्रहण के स्तर का 90 प्रतिशत है। टोल कर का संग्रहण भी 80 प्रतिशत के स्तर पर पहुंच गया है। कोरोना महामारी के चलते अप्रैल 2020 में औद्योगिक उत्पादन में 57.6 प्रतिशत की गिरावट आई थी जो मई माह में घटकर 34.7 प्रतिशत की रह गई है। जून 2020 में इसमें और अधिक सुधार देखने को मिलेगा, क्योंकि विनिर्माण क्षेत्र का परचेसिंग मैनेजर इंडेक्स मई माह के 30.8 से बढ़कर जून माह में 47.2 प्रतिशत हो गया है। इसी प्रकार, देश में उत्पाद को एक राज्य से दूसरे राज्य में ले जाने के लिए ई-वे बिल जारी किया जाता है। आज ई-वे बिल जारी किए जाने का स्तर भी कोविड-19 के पूर्व के स्तर पर पहुंच गया है। अर्थात, जितने ई-वे बिल प्रतिदिन औसतन जनवरी एवं फरवरी 2020 में जारी किए जा रहे थे लगभग इसी स्तर पर आज भी जारी किए जाने लगे हैं। हाल ही में जारी किए गए खुदरा महंगाई की दर के आंकड़ों में भी थोड़ी तेजी दिखाई दी है। इसका आशय यह है कि देश में उत्पादों की मांग में वृद्धि हो रही है। ट्रैक्टर एवं उर्वरकों की बिक्री भी कोविड-19 के पूर्व के स्तर पर पहुंच गई है। देश में मानसून की स्थिति भी बहुत अच्छी बनी हुई है। जिसके कारण, खरीफ के मौसम की बुआई का कार्य लगभग 85 प्रतिशत से ऊपर तक पूर्ण हो चुका है। सबसे अच्छी खबर तो यह है कि बेरोजग़ारी की जो दर माह अप्रैल एवं मई 2020 के दौरान 38 प्रतिशत तक पहुंच गई थी वह सीएमआईई के अनुसार, अब घटकर 11 प्रतिशत एवं एक अन्य रिसर्च एजेन्सी के अनुसार लगभग 8 प्रतिशत तक नीचे आ गई है। बेरोजगारी की दर के एकदम इतना नीचे आने के मुख्यत: दो कारण हैं- एक तो केंद्र सरकार ने जिन विभिन्न राहत उपायों की घोषणा की जिसके अंतर्गत खासकर व्यापारियों एवं एमएसएमई सेक्टर को 3 लाख करोड़ रुपए का एक विशेष वित्तीय पैकेज प्रदान किया गया था तथा जिसकी गारंटी केंद्र सरकार ने विभिन बैंकों को प्रदान की थी। इस वित्तीय पैकेज के तहत छोटे-छोटे व्यापारियों एवं उद्योगों को बैंकों से वित्त उपलब्ध कराए जाने की व्यवस्था की गई है, इसके चलते छोटे-छोटे व्यापारियों एवं उद्योगों को अपना व्यापार पुन: प्रारम्भ करने में काफी आसानी हुई है। अत: व्यापारियों एवं छोटे उद्योगपतियों के लिए वित्त की उपलब्धता में व्यापक सुधार दृष्टिगोचर हो रहा है। दूसरा सबसे बड़ा कारण है कि देश में विभिन्न उत्पादों की मांग में भी वृद्धि हुई है, क्योंकि अप्रैल एवं मई माह में तालाबंदी के कारण लोगों ने वस्तुओं की खरीदी बहुत ही कम मात्रा में की थी। साथ ही, बहुत कम समय में भारत में बहुत मजबूत एवं दृढ़ मेडिकल तंत्र तैयार कर लिया गया है। मेडिकल क्षेत्र में फार्मा उद्योग बहुत तगड़ी ग्रोथ करने की तैयारी में दिख रहा है। हालांकि आर्थिक गतिविधियां पूरे देश में ही सफलतापूर्वक प्रारम्भ हो चुकी हैं, परंतु ग्रामीण इलाकों में मनरेगा योजना के अंतर्गत पिछले 3 से 4 सप्ताहों के दौरान असाधारण काम हुआ है। इसके कारण जो बेरोजगारी की दर पहले 38 प्रतिशत तक पहुंच चुकी थी वह अब घटकर लगभग 8 से 11 प्रतिशत के बीच आ चुकी है। इस बीच प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना पर भी तेजी से कार्य प्रारंभ हुआ है, जिसके कारण विशेष रूप से ग्रामीण इलाकों में रोजगार के नए अवसर निर्मित होना प्रारम्भ हुए हैं। देश में गरीब परिवारों को खाने पीने का सामान, देश की जनता के सहयोग से उपलब्ध कराया जा रहा है। इसके प्रबंधन की भी मुक्त कंठ से प्रशंसा की जानी चाहिए। इस प्रकार तो देश में एक मिसाल कायम हुई है, क्योंकि इतना बड़ा देश एवं इतनी अधिक जनसंख्या के बावजूद सामान्यत: किसी भी तरह की विपत्ति अथवा नागरिकों में पीड़ा देखने को नहीं मिली।
भारत में विभिन्न बैंकों द्वारा व्यापारियों, उद्योगपतियों एवं नागरिकों को वित्तीय सहायता आसानी से उपलब्ध कराने हेतु खाका तैयार किया जा चुका है। अब तो केवल इन व्यापारियों, उद्योगपतियों एवं व्यक्तियों को ही आगे आने की जरूरत है एवं बैंकों द्वारा आसानी से उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं का लाभ लेना प्रारम्भ करना है।
देश की अर्थव्यवस्था में जो तेजी देखने में आ रही है, वह अल्पकालीन नहीं होकर लंबे समय तक आगे जाने को तैयार दिख रही है। इसी कारण तो कई अंतर्राष्ट्रीय वित्त संस्थान भारत के सकल घरेलू उत्पाद में वर्ष 2021-22 में 9 प्रतिशत से भी अधिक वृद्धि की सम्भावनाएं व्यक्त कर रहे हैं। यूं तो देश के सकल घरेलू उत्पाद में कृषि क्षेत्र का योगदान 16/17 प्रतिशत ही रहता है परंतु देश की लगभग 60 प्रतिशत आबादी ग्रामों में ही निवास करती है। अत: रोजगार के लिए यह आबादी मुख्यत: कृषि क्षेत्र पर ही निर्भर रहती है। इसके चलते आजकल कृषि क्षेत्र, केंद्र सरकार की नजर में प्राथमिकता की श्रेणी में आ गया है। जिसके कारण देश में गांवों में ही ट्रैक्टर, दो पहिया वाहन एवं कम लागत वाले चार पहिया वाहनों की बहुत अच्छी मांग उत्पन्न हो रही है। देश एवं विभिन्न राज्यों की सरकारों का जितना अधिक ध्यान कृषि क्षेत्र की ओर बना रहेगा देश में उतनी अधिक आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी। जबकि पूर्व में देश में दिल्ली, तमिलनाडु एवं महाराष्ट्र जैसे राज्य आर्थिक दृष्टि से विकास के मुख्य केंद्र रहे हैं। परंतु, हाल ही में इन प्रदेशों में कोरोना महामारी का प्रभाव बहुत ज़्यादा देखने में आया है। अत: वर्तमान में इन केन्द्रों में आर्थिक विकास प्रभावित होता दिख रहा है जो अंतत: भारत की आर्थिक गतिविधियों को भी विपरीत रूप से प्रभावित करेगा ही। इसीलिए वर्तमान में ग्रामीण इलाकों के माध्यम से ही देश के आर्थिक विकास को गति मिल सकती है। देश में नागरिकों के बीच आय का संकट भी गहराता दिख रहा है क्योंकि या तो कई नागरिकों की नौकरियों पर असर पड़ा है अथवा उनके वेतन कम हुए हैं। जिसके चलते हो सकता है आगे आने वाले समय में कुछ नागरिक बैंकों को अपनी ईएमआई चुकाने में चूक करें। परंतु, केंद्र सरकार ने भारतीय रिजर्व बैंक के माध्यम से इनकी ईएमआई की तारीख़ें 6 माह से आगे बढ़ा दी हैं। अत: यह संकट भी फिलहाल तो टल ही गया लगता है। केवल एक चिंता का विषय अभी भी बरकरार है और वह है विभिन्न राज्यों द्वारा छोटे-छोटे तालाबंदी की घोषणा करना जिसके कारण इन इलाकों में आर्थिक गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं। आज भी विभिन्न राज्यों जैसे- महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश आदि में 3, 5, अथवा 7 दिनों तक की तालाबंदी घोषित हो रही है। इससे इन इलाक़ों में सप्लाई चैन बाधित हो रही है।