राफेल के स्वागत की घड़ी...
   Date29-Jul-2020

vishesh lekh_1  
2019 के लोकसभा चुनाव में राफेल विमान की खरीदी एक बड़ा मुद्दा बन गई थी, क्योंकि विपक्ष विशेष रूप से कांग्रेस पार्टी और उसमें भी स्वयं राहुल गांधी ने सबसे पुरानी पार्टी के अध्यक्ष होने के नाते इस मुद्दे को अपनी प्रत्येक चुनावी सभा में उठाया था... यहां तक कि उन्होंने संवैधानिक पद पर बैठे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को 'चोरÓ तक कहा... यहां तक तो ठीक था, उन्होंने जनसभाओं में लोगों से नारे लगवाए, स्वयं कहते थे- 'चौकीदार...Ó और सामने उपस्थित जनसमूह से चोर है... का नारा बुलंद करवाते थे... राहुल कांग्रेस के उन सारे प्रपंचों और षड्यंत्रों का तो जनता ने लोकसभा चुनाव में बहुत ही सटीक ढंग से जवाब दे दिया... नरेन्द्र मोदी सरकार को 2014 से भी बड़ा बहुमत देकर जनता ने संसद में भेजा... भाजपा की नरेन्द्र मोदी सरकार ने भी अपने वादे के अनुरूप देश की सामरिक क्षमता को नया आयाम देने के वादे को निर्धारित समयावधि में पूरा करके दिखाया है... भारत की आकाश में मारक क्षमता तो नई मजबूती देने के लिए अत्याधुनिक राफेल विमान भारतीय वायुसेना में बुधवार, 29 जुलाई को शामिल होने की शुभ घड़ी आ गई है... यानी मोदी सरकार ने यहां अपना चुनावी वादा ही पूरा नहीं किया है, बल्कि देश की सामरिक क्षमता और राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे को भी गंभीरता से समझते हुए एक ऐसे निर्णय को अमल में लाकर दिखाया, जिसका मनमोहन सरकार ने 10 वर्षों तक सिर्फ इंतजार ही किया गया था... कांग्रेस के दूसरे कार्यकाल में 136 राफेल विमान को लेकर बातचीत तो बढ़ी, लेकिन उसमें भारी अनियमितता के चलते वह सौदा रद्द करना पड़ा था.., लेकिन अब मोदी सरकार पहली खेप में 5 राफेल विमानों की प्राप्ति कर रही है.., इस तरह से देश को 36 राफेल जेट फायटर प्राप्त होंगे और उस पर 36 हजार करोड़ रुपए से अधिक का खर्च आएगा.., लेकिन गलवान में भारत की चीन के साथ झड़प या अन्य सीमा सुरक्षा संबंधी मुद्दों पर अब भारत आकाशीय मार्ग से दुश्मन देशों को करारा जवाब देने की स्थिति में होगा... सही मायने में राफेल का फ्रांस से भारत आना चीन की नींद हराम करने जैसा है... क्योंकि यह विमान सोमवार को उड़ान भरकर 7 हजार किमी का लंबा समय तय करके हरियाणा के अंबाला टेंट में बुधवार को पहुंच रहे हैं... वैसे तो भारत को पहला राफेल अक्टूबर 2019 में सौंपा गया था... इसके बाद इस दिशा में यह बड़ी पहल है, जिसमें भारत को 5 राफेल जेट फायटर प्राप्त होंगे... यह वायुसेना के 17वें स्क्वाड्रन गोल्डन ऐरो का हिस्सा बनेंगे... कहने का तात्पर्य यही है कि जो विपक्ष सरकार के राफेल विमान को चुनावी मुद्दा और पैसों की बर्बादी बता रहा था, उन्हें यह करारा जवाब है कि जनता के साथ और देश के साथ किए गए वादों को कोई सरकार समयसीमा में किस तरह से पूरा करती है..?
दृष्टिकोण
सरकारी स्कूलों के परिणाम...
चकाचौंध और भांति-भांति के तामझाम से परे मध्यप्रदेश के सरकारी स्कूलों की स्थिति का आंकलन परीक्षा परिणाम के मान से करें तो यह सुखद अनुभूति हर किसी के लिए उस सकारात्मक बदलाव का संकेत कर रही है, जिसमें सबसे ज्यादा जरूरत आज सरकारी स्तर पर संचालित हो रहे स्कूलों में सुधार को लेकर सामने आती है... सोमवार को माध्यमिक शिक्षा मंडल (मशिमं) 12वीं बोर्ड के परीक्षा परिणाम घोषित कर दिए गए... कोरोनाकाल में परीक्षा परिणामों को लेकर विलंब तो हुआ, लेकिन नया शैक्षणिक सत्र ऑनलाइन चल रहा है, इसलिए इसमें कोई बुराई नहीं है, लेकिन निजी स्कूलों की तुलना में सरकारी स्कूलों के बेहतर प्रदर्शन ने सरकार की शिक्षा प्रणाली को लेकर बनाई गई योजनाओं एवं संचालित सरकारी स्कूलों को लेकर और व्यापक नजरिया तय करने की जरूरत रेखांकित कर दी है... क्योंकि इस बार सरकारी स्कूलों का परीक्षा परिणाम 71.43 प्रतिशत, जबकि निजी स्कूलों जिनके पास तमाम तरह के संसाधन हैं... सुविधाएं और वे भारी-भरकम फीस लेने के बाद पढ़ाई के मामले में अपने को सरकारी से हमेशा आगे बताते हैं... उनका 12वीं का परीक्षा परिणाम महज 64.93 प्रतिशत रहा है... कहने या देखने के लिए तो यह महज 5-6 फीसदी की बढ़ोतरी है, लेकिन विज्ञान-गणित (साइंस समूह) से लेकर वाणिज्य और कला सभी में प्रदेश की प्रावीण्य सूची में पहला-दूसरा यहां तक कि तीसरा स्थान प्राप्त करने वाले विद्यार्थी सरकारी स्कूलों के हैं... अत: अब समय है कि राज्य सरकार और शिक्षा मंत्री के साथ ही पूरा तंत्र सरकारी स्कूलों की और बेहतरी के लिए ठोस रणनीति के साथ कदम बढ़ाए... ताकि सरकारी स्कूलों को लेकर जनता-जनार्दन का जो मोह भंग हो चुका है और वे निजी स्कूलों की चक्की में पिसने को मजबूर हैं, उन्हें राहत मिल सके...