स्व-अस्मिता के लिए छटपटाता हांगकांग
   Date29-Jul-2020

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डॉ.बचन सिंह सिकरवार
अं तत: अमेरिका राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने चीन को सबक सिखाने के लिए हांगकांग के आर्थिक तरजीह का दर्जा समाप्त करने से सम्बन्धित कार्यकारी आदेश तथा एक दूसरे कानून पर हस्ताक्षर कर ही दिए, जिसकी चेतावनी उन्होंने चीन को हांगकांग में गत 1 जुलाई को 'राष्ट्रीय सुरक्षा कानूनÓ लागू करने से पहले ही दे दी थी। अब ऐसा करके चीन ने हांगकांग का विशेष दर्जा ही खत्म कर दिया है, जबकि 1 जुलाई, 1997 में ब्रिटिश शासन से इसके हस्तारण के समय उसने हांगकांग में 'एक देश दो व्यवस्थाÓ का वादा करते हुए आगामी 50 साल तक उसे स्वायत्तता और लोकतांत्रिक स्वतंत्रता का वचन दिया था। इसमें अलग न्यायालय तथा नागरिकों के स्वतंत्रता के अधिकार सम्मिलित थे, जो 2047 तक के लिए हैं। लेकिन अपना वादा तोड़ते हुए चीन हांगकांग में एक-एक कर चीनी व्यवस्था लागू की जा रही है। इसका हांगकांग के लोग शुरू से ही उग्र प्रदर्शन कर विरोध करते आ रहे हैं, पर चीन उनकी भावनाओं की लगातार अनदेखी करते हुए उनके आंदोलन को अपने दमन से कुचलने में लगा। चीन के इस नए कानून के बाद हांगकांग में पहले से जैसी उन्मुक्तता नहीं रह जाएगी, जिसके चलते दुनियाभर के व्यापारी हांगकांग से व्यापार करते थे। अब यहाँ चीनी सुरक्षा एजेन्सियों की सख्त नजरें सिर्फ हांगकांगवासियों पर ही नहीं, दूसरे देशों के पर्यटकों तथा व्यापारियों पर भी रहेंगी। इस कारण अब पहले की तरह बाहर के व्यापारी हांगकांग से व्यापार करने को प्राथमिकता नहीं देंगे। ऐसे में हांगकांग के व्यापार के साथ-साथ पर्यटन उद्योग पर भी विपरीत प्रभाव पड़े बिना नहीं रहेगा। ऐसे में हांगकांग के लोगों की आय में कमी आएगी।
चीन अमेरिका द्वारा हांगकांग के आर्थिक तरजीह के दर्जे और हांगकांग से जुड़े अधिकारियों पर प्रतिबंध को लेकर बेहद बौखलाया हुआ है। इससे पहले वह शिनझियांग में उइगरों मुसलमानों से नस्ल भेदभाव, मजहबी प्रताडऩा, उन्हें यातना शिविरों पर रखने और तिब्बत के तिब्बतियों पर कई तरह के प्रतिबंध और उत्पीडऩ को लेकर कानून और उनसे सम्बन्धित अधिकारियों के अमेरिका आने पर प्रतिबंध लगा चुका है। अमेरिका के इन कदमों से चीन की छवि को बहुत आघात लगा है, उसका अत्याचारी चेहरा दुनिया के सामने आ गया है। इसका असर उसके विदेशी व्यापरिक और राजनीतिक सम्बन्धों के साथ-साथ उसकी 'वन बेल्ट, वन रोडÓ जैसी तमाम परियोजनाओं पर भी पड़े बिना नहीं रहेगा, जो दुनिया के अलग-अलग देशों में इस समय चल रही हैं। वैसे भी दुनियाभर में कोरोना विषाणु जनित महामारी फैलाने के आरोपों से घिरा चीन अब अपना मुँह छिपाता फिर रहा है। चीन में भी देश में कोरोना का संकट खत्म नहीं हुआ, पर उसका अपने देश के लोगों को सताने और उनके मूलभूत अधिकार छीनने का सिलसिला जारी है। चीन की इसी नीति का नतीजा हांगकांग में उसके द्वारा 'राष्ट्रीय सुरक्षा कानूनÓ लागू किया जाना है, ताकि यहाँ के लोग उसके गैर कानूनी कामों और कई तरह के उत्पीडऩों के खिलाफ अपनी आवाज न उठा सकें। इंग्लैण्ड हांगकांग को लेकर चीन की वादाखिलाफी से बेहद गुस्से में है, उसने हांगकांग के लोगों को ब्रिटेन की नागरिकता देने का प्रस्ताव दिया है। इसी तरह आस्ट्रेलिया भी अपने यहाँ कार्यरत हांगकांग के नागरिकों या फिर चीन सरकार की कार्रवाई से भयभीतों को अपने देश में बसने का आमंत्रण दे चुका है।
अमेरिका द्वारा हांगकांग का आर्थिक तरजीह का दर्जा समाप्त किए जाने के बाद उसके साथ हर मामले में चीन जैसा व्यवहार किया जाएगा। अब हांगकांग को न तो किसी प्रकार विशेषाधिकार होगा और न ही संवेदनशील तकनीकों के निर्यात की इजाजत होगी। एक दूसरे विधेयक के माध्यम से अमेरिका हांगकांग में राजनीतिक असंतोष पर अंकुश लगाने वाले चीन के अधिकारियों पर प्रतिबंध लगाया जाएगा। चीन की शीर्ष विधायी निकाय नेशनल स्टैंडिंग कमेटी ने 30 जून को सर्वसम्मति से हांगकांग के विवादास्पद 'राष्ट्रीय सुरक्षा कानूनÓ को स्वीकृति प्रदान कर दी। इस कानून के तहत राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे में डालने, विदेशी शक्तियों के साथ अलगाव, तोडफ़ोड़ और आतंकवाद के दोषी व्यक्ति को अधिकतम उम्रकैद की सजा की सुनाई जा सकती है। इस नए कानून से चीन की सुरक्षा एजेन्सियों को पहली बार हांगकांग में अपना कार्यालय खोलने का अधिकार मिल जाएगा। अमेरिका, ब्रिटेन सहित कई देशों ने कानून को हांगकांग के कानूनी और राजनीतिक संस्थानों को कमजोर करने वाला बताकर इसकी आलोचना की थी। इस कानून के पारित होने से एक दिन पहले 29 जून को ट्रम्प प्रशासन ने चेतावनी देते हुए कहा था कि यदि यह कानून पारित होता है, तो वह हांगकांग को होने वाले रक्षा निर्यात रोक देगा और जल्द ही हांगकांग को वस्तुओं की बिक्री के लिए लाइसेंस लेने की आवश्यकता पड़ेगी। उस समय हांगकांग की सी.ई.ओ. कैरी लाम ने कहा था कि कानून के लागू करने के सम्बन्ध में वह और उनके अधिकारी सभी के सवालों के जवाब देने की पूरी कोशिश करेंगे। हमें प्रतिबंधों की धमकी डरा नहीं सकती।
हांगकांग के उत्तर में गुआंग्डोंग और पूर्व, पश्चिम और दक्षिण में दक्षिण चीन सागर है। यहाँ के लोग कैण्टोनी, अंग्रेजी बोलतें हंै। इस देश की मुद्रा 'हांगकांग डॉलरÓ है। हांगकांग एक वैश्विक महानगर है। अंतरराष्ट्रीय वित्तीय केन्द्र होने के साथ-एक एक उच्च विकसित पूँजीवादी अर्थव्यवस्था है। 'एक देश दो अर्थव्यवस्थाÓ के अंतर्गत और बुनियादी कानून के अनुसार इसे सभी क्षेत्रों में उच्च स्तर की स्वायत्तता प्राप्त है। केवल विदेशी मामलों और रक्षा को छोड़कर जो जनवादी गणराज्य चीन सरकार की जिम्मेदारी है। हांगकांग की अपनी मुद्रा, कानून प्रणाली, राजनीतिक व्यवस्था, अप्रवास पर नियंत्रण, सड़क के नियम हैं। मुख्य भूमि चीन से अलग यहाँ की रोजमर्रा के जीवन से जुड़ विभिन्न पहलू हैं। एक व्यापारिक बंदरगाह के रूप में आबाद होने के बाद हांगकांग सन् 1842 में यूनाइटेड किंगडम का विशेष उपनिवेश बन गया। सन् 1983 में इसे ब्रिटिश निर्भर क्षेत्र के रूप में पुनर्वर्गीत किया गया। 1 जुलाई, 1997 में जनवादी गणराज्य चीन को सम्प्रभुता हस्तांतरित कर दी गई। अपने विशाल क्षितिज और गहरे प्राकृतिक बंदरगाह के लिए प्रसिद्ध इसकी पहचान एक ऐसे महानगरीय केन्द्र के रूप में बनी, जहाँ के भोजन, सिनेमा, संगीत और परम्पराओं में जहाँ पूर्व और पश्चिम का 407 वर्गमील जमीन के साथ हांगकांग का दुनिया के सबसे मिलाप होता है। शहरी आबादी 95 प्रतिशत 'हानÓ जाति की और 5 प्रतिशत अन्य हैं। 70लाख लोगों की आबादी और 3054 वर्ग किलोमीटर (407 वर्ग मील) जमीन के साथ हांगकांग दुनिया के सबसे घनी आबादी वाले क्षेत्रों में से एक है।
हांगकांग को ब्रिटेन से चीन ने सन् 1843 में खरीदा गया। चीन ने हांगकांग को 'ब्लैक वारÓ में जीतने के बाद लिया था। उसके बाद 'न्यू केप लंच और लैण्डने उसे 99 वर्ष के पट्टे पर छोड़ा था। उसके बाद 'द्वितीय विश्वयुद्धÓ के समय जापान ने उसे ले लिया था। बाद में जापानी सैनिक मारे गए और जापान हार गया। हांगकांग में क्रांति हो गई। यह व्यस्त बंदरगाह बन गया। सन् 1950 में विनिर्माण का केन्द्र बन गया। चीन में युद्ध के बाद काओमिटोंग और कम्युनिस्ट हांगकांग प्रशासन के खिलाफ लड़े थे। 19 दिसम्बर, सन् 1984 को चीन और ब्रिटेन के बीच हांगकांग के हस्तांतरण चीन ब्रिटेन संयुक्त घोषणा-पत्र पर हस्ताक्षर किए गए। चीन का हिस्सा होने के बाद 50 वर्षों तक विदेशी और रक्षा मामलों को छोड़कर स्वायत्तता का आनंद लगा। विवाद की जड़ सन् 1947 में जब हांगकांग को चीन को सौंपा गया था, तब एक देश, दो व्यवस्था की अवधारणा के तहत कम से कम सन् 2047 तक लोगों की स्वतंत्रता, कानून प्रणाली बनाये रखने की गारंटी दी थी। सन् 2014 में हांगकांग 79 में दिनों तक अम्ब्रेला मूवमेंट के बाद लोकतंत्र का समर्थन करने वाला चीनी सरकार कार्रवाई करने लगी। विशेष प्रदर्शन करने वालों का जेल में डाल दिया गया। आजादी समर्थन करने वाली पार्टी पर प्रतिबंध लगा दिया गया।