मुखिया के दायित्व का सही निर्वाह...
   Date28-Jul-2020

vishesh lekh_1  
मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान कोरोना संक्रमित होने के बाद राजधानी भोपाल के चिरायु अस्पताल में स्वास्थ्य लाभ ले रहे हैं... उनकी स्वास्थ्य रिपोर्ट सकारात्मक है और तेजी से उनके स्वास्थ्य में सुधार भी हो रहा है... लेकिन इस बीच मुख्यमंत्री अपने राजकीय दायित्व का भी बखूबी निर्वाह करते नजर आ रहे हैं... यह उनकी मध्यप्रदेश के उन 7 करोड़ निवासियों की वाजिब चिंता को दर्शाता है... जिसमें वे कोरोना के खिलाफ चल रहे प्रदेश में अभियान की निरंतर समीक्षा करने के साथ ही उसको लेकर उठाए जा रहे कदमों पर भी निगाहें बनाए हुए हैं... यही नहीं, वे कोरोना वॉरियर्स के समर्थन की सराहना करना भी नहीं भूले... क्योंकि चिकित्सक के रूप में, पुलिसकर्मी के रूप में, स्वास्थ्यकर्मी के रूप में, यहां तक कि प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से कोरोना के खिलाफ निरंतर योगदान देने वाले सेवाभावी लोगों की पहल का मुख्यमंत्री चौहान ने स्वागत किया है... मुख्यमंत्री ने अस्पताल में रहते हुए भी प्रदेश के मेधावी विद्यार्थियों को राज्य सरकार की ओर से लैपटॉप दिए जाने की योजना के संबंध में सूचित करने का भी ध्यान रखा... क्योंकि सोमवार को मध्यप्रदेश शिक्षा मंडल 12वीं परीक्षा के नतीजे घोषित हुए हैं... ऐसे में मुख्यमंत्री ने लैपटॉप योजना का लाभ नियमित एवं स्वध्यायी दोनों तरह के विद्यार्थियों को देने की घोषणा की... ताकि विद्यार्थियों में किसी भी तरह का असमंजस न रहे और सरकार ने जो गाइडलाइन तय कर रखी है, उसके मान से योजना का धरातल पर क्रियान्वयन हो सके... यह सही मायने में प्रदेश के मुखिया के नाते उनका सभी तरफ ध्यान रखकर हर वर्ग की चिंता और उसके समाधान का वह पहलू दर्शाता है, जिसमें वे स्वयं को प्रदेश का मुखिया न मानकर एक सेवाभावी कार्यकर्ता के रूप में निरूपित करते हुए सबको अपना मामा बताते हैं... मुख्यमंत्री ने अस्पताल से भी प्रदेश के उन समस्त शासकीय अधिकारियों, कर्मचारियों से वार्षिक वेतनवृद्धि को लेकर चिंतित न होने की अपील की... और दोहराया कि सरकार अपने सभी कर्मचारियों, अधिकारियों के वास्तविक हक एवं हित दोनों को सुनिश्चित करने के लिए न तो कभी पीछे हटी और न ही कभी हटेगी... वार्षिक वेतनवृद्धि का लाभ उन्हें हर हाल में दिया जाएगा... कहने का तात्पर्य यही है कि मुख्यमंत्री चौहान भले ही कोरोना के खिलाफ चल रहे अभियान को सफल करने के लिए संक्रमित होने के बाद भी अस्पताल में भर्ती होकर भी अपनी जिम्मेदारियों के निर्वाह से पीछे नहीं हट रहे हैं... इसके लिए वे निरंतर अस्पताल से भी मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों, कर्मचारियों के जरिये हर पहलू पर निगाहें रखे हुए हैं... जहां जरूरत पड़ती है, वे सलाह भी दे रहे हैं और सुझाव भी मांग रहे हैं... कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि एक सशक्त नेतृत्व के रूप में मुख्यमंत्री चौहान ने जनता के हितों, उनकी सुरक्षा और उनकी वास्तविक चिंता को विपरीत स्थिति में भी समझा और उसका समाधान किया...
दृष्टिकोण
कांग्रेस की कब्र खोदते राहुल...
कुछ समय तक भारत-चीन विषय पर चुप्पी साधने वाले कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी एक बार फिर सरकार को घेरने की रणनीति के साथ मैदान में बयानबाजी के लिए उतर चुके हैं... लेकिन उन्हें इस बात का या उनके रणनीतिकारों को इस बात का बिल्कुल ध्यान नहीं है कि राहुल जितना सरकार के खिलाफ हमलावर हो रहे हैं, बिना तथ्य-तर्क के सरकार को घेरने के बजाय स्वयं ही विवादों में घिरते नजर आते हैं... तभी वे सेना के मनोबल को तोडऩे वाली प्रतिक्रिया देते हैं, तो कभी राष्ट्र की सुरक्षा को दांव पर लगाकर सरकार को घेरने की रणनीति पर चलते नजर आते हैं... इन सबके कारण उनका रवैया एक तरह से चीन के पक्षकार के रूप में नजर आता है... राहुल गांधी ने भारत-चीन सीमा मामले में सोमवार को पुन: दोहराया कि चीन ने भारत की जमीन पर कब्जा जमा रखा है... इसलिए मैं सच्चाई को सामने लाने के लिए लड़ता रहूंगा... भले ही इसके कारण मेरा कॅरियर खत्म हो जाए... लेकिन यह राहुल गांधी को कौन समझाए कि उनके बेहूदा बयानों और तर्कों के कारण सरकार की सेहत पर बिल्कुल असर पडऩे वाला नहीं है... और राहुल गांधी का राजनीतिक कॅरियर 2019 में ही जनता द्वारा नकारा जा चुका है... ऐसे में जो कुछ असर पडऩा है, वह कांग्रेस की सेहत पर पड़ रहा है... इतने लंबे समय का देश में नेतृत्व करती आई पार्टी आखिर नेतृत्व को लेकर इस हद तक निराश-उदास-हताश हो चुकी है कि वह देश के हित में, सीमा की सुरक्षा के संबंध में कैसे बयान देने चाहिए, किसका पक्ष लेना चाहिए, इसका निर्धारण न कर सकने वाले नेतृत्व को ढोने को मजबूर है... अगर ऐसे में भाजपा बयानी रूप से राहुल पर हमला करते हुए यह कहती है कि राहुल का कॅरियर तो खत्म हो चुका, लेकिन वे कांग्रेस का शेष कॅरियर भी खत्म करने पर उतारू हैं, इसे राहुल के द्वारा कांग्रेस की कब्र खोदने के रूप में देखना चाहिए...