स्वअनुशासन में दंड का भय जरूरी...
   Date27-Jul-2020

vishesh lekh_1  
कोरोना की बढ़ती भयावह चाल को थामने में कहीं न कहीं जनता के बीच स्वअनुशासन स्थापित करने वाला एक दंडरूपी भय का होना जरूरी है... कुछ राज्यों में मास्क न पहनने पर 100 या 50 रुपए का जुर्माना लगाया जा रहा है... तो कोरोना कफ्र्यू (तालाबंदी) तोडऩे पर वाहन जब्त कर 2000 तक के जुर्माने की पहल हो रही है... यह जरूरी भी है... आम दिनों में ही जो चिकित्सा सेवा दबाव महसूस करती है, कोरोना के समय में उसका क्या हाल होगा, इसका अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है... कड़ाई केवल आम लोगों पर न हो, जो सेवा में लगा हुआ तंत्र है, उसे भी पूरी मुस्तैदी से काम करने के लिए बाध्य किया जाना चाहिए... यह सुनिश्चित करना होगा कि आम लोगों को इलाज के लिए भटकना न पड़े... सुशासन की कड़ाई के साथ ही स्वशासन की भी जरूरत बढ़ गई है... लोग यदि अनुशासित हो जाएं, तो फिर कोरोना महामारी के खिलाफ लड़ाई आसान हो जाएगी... विश्वास बनाए रखना होगा... कोरोना से जंग हम जरूर जीतेंगे... ध्यान रहे, लगभग आठ लाख लोग ठीक हो चुके हैं और अभी देश में सक्रिय मरीजों की संख्या चार लाख भी नहीं है... एक दिन आएगा, जब चंद मरीज रह जाएंगे, लेकिन तब तक हमें सावधानी बरतनी पड़ेगी और सुरक्षित रहना होगा... कोरोना के खिलाफ लड़ाई में सरकारों द्वारा सख्ती में बढ़ोतरी न केवल जरूरी, बल्कि स्वागतयोग्य भी है... झारखंड में कोरोना नियमों की अनदेखी करने वालों और मास्क न पहनने वालों पर एक लाख रुपए का जुर्माना लग सकता है और दो साल की जेल हो सकती है... झारखंड की कैबिनेट ने गत दिनों संक्रामक रोग अध्यादेश 2020 पारित किया है... कोरोना के खिलाफ लड़ाई में ऐसी कड़ाई करने वाला वह देश का पहला राज्य बन गया है... कागज पर ही सही, यह नियम प्रथम दृष्टया काफी कड़ा दिखता है, लेकिन जिस तरह से झारखंड में संक्रमण बढ़ रहा है, उसे रोकने के लिए ऐसे कदमों का व्यापक सांकेतिक महत्व है... अलबत्ता, इसे लागू करना सहज नहीं होगा... इसकी सही अनुपालना सुनिश्चित करने के लिए सबसे पहले सरकारी महकमे और पुलिस-प्रशासन के तमाम लोगों को समाज के सामने आदर्श पेश करना होगा... उससे भी ज्यादा जरूरी है कि हमारे नेता स्वयं बचाव और मास्क पहनने की दिशा में आदर्श बनकर उभरें... लोगों को लगे कि उनके सभी बड़े नेता और बड़े अधिकारी स्वयं मास्क पहनने लगे हैं, तो लोग भी प्रेरित होंगे... अभी आएदिन हम देखते हैं कि किस तरह से मास्क पहनने की अनिवार्यता का मखौल बनाया जाता है...
दृष्टिकोण
उपचुनाव को लेकर कयास...
करीब 8 राज्यों की 6 दर्जन से अधिक विधानसभा सीटों व लोस की सीटों पर उपचुनाव होना है... जिसमें मप्र की सर्वाधिक सीटें हैं... ऐसे में कोरोना के कारण चुनाव के संबंध में भांति-भांति के कयास ही राजनीतिक दल ही नहीं लगा रहे, बल्कि पक्ष-विपक्ष विपरीत मांगें भी कर रहा है... भारतीय चुनाव आयोग लोकसभा की एक सीट और विधानसभाओं की 56 सीटों पर उपचुनाव कराने को तैयार है, तो इससे पता चलता है कि महामारी की वजह से लोकतांत्रिक प्रक्रिया नहीं रुकेगी... मंगलवार को आठ सीटों के लिए तय उपचुनाव को जब रद्द किया गया था, तब यह माना जा रहा था कि कोरोना के दौर में मतदान आधारित कोई चुनाव नहीं हो सकेगा... लेकिन यह साफ हो गया है कि जिन सीटों पर अब आयोग चुनाव के लिए तैयार है, उनमें वे आठ सीटें भी शामिल हैं... आठ सीटों को लेकर जल्दी इसलिए भी है, क्योंकि इनके लिए 7 सितंबर तक चुनाव हो जाने चाहिए... बाकी बची 49 सीटों के लिए सितंबर का पूरा समय है... सब कुछ ठीक रहा और स्थानीय प्रशासन ने कोई अड़ंगा नहीं लगाया, तो आयोग चुनाव प्रक्रिया तेज कर देगा... वैसे भी, बिहार विधानसभा चुनाव की तैयारियां चल ही रही हैं... समय पर चुनाव कराना आयोग की जिम्मेदारी है और अगर वह इसे निभाने को लालायित है, तो उसकी सराहना होनी चाहिए... हालांकि काफी कुछ सरकारों को भी तय करना है... अगस्त, सितंबर तक कोरोना जिन इलाकों में काबू में आ जाएगा, वहां तो ज्यादा परेशानी नहीं होगी, मगर उसी दौर में कोरोना चरम पर रहा, तो चुनाव टालने की नौबत आ सकती है... इतना तय है कि कोरोना के समय चुनाव कराने के लिए ज्यादा संसाधन, वाहन और सुरक्षा बलों की जरूरत पड़ेगी... हर एक मतदान केंद्र पर बचाव के दिशा-निर्देशों की पालना कराना आसान नहीं होगा... लंबी लाइन और मतदाताओं की परस्पर दूरी को बनाए रखना बड़ी चुनौती होगी...