हवा में फैला अदृश्य खतरा...
   Date10-Jul-2020

vishesh lekh_1  
कोरोना पहले ही अदृश्य खतरा था, लेकिन अब यह घातक वायरस हवा के जरिए कहीं भी फैल सकता है, यह बात अब न सिर्फ तय हो गई है, बल्कि इसे लेकर विश्व स्वास्थ्य संगठन नए दिशा-निर्देश भी जारी करने वाला है... मार्च में विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा था कि हवा के जरिए कोरोना के फैलने की गुंजाइश ज्यादा नहीं है... हवा के जरिए फैलने का खतरा वहीं ज्यादा है, जहां कोई कोरोना मरीज है... ऐसे में, केवल कोरोना मरीजों की सेवा में लगे चिकित्साकर्मियों को ही सावधान किया गया था... लेकिन अब पहली बार विश्व स्वास्थ्य संगठन ऐसे सुबूतों को मानने की प्रक्रिया में है, जिनसे साबित होता है कि कोरोना संक्रमण हवा के जरिए हो सकता है और हो रहा है... संगठन से इस पर विचार की मांग पहले भी हो रही थी... चीन में मार्च महीने में ही 75,465 कोरोना मरीजों की विवेचना के बाद बताया गया था कि कोरोना हवा के जरिए नहीं फैलता... कोरोना के विषाणु ज्यादा समय तक हवा में नहीं रह सकते, उड़कर ज्यादा दूर नहीं जा सकते, लेकिन ताजा अध्ययन से पता चलता है कि मार्च में बनी वह धारणा सही नहीं थी... कोरोना विषाणु काफी देर तक हवा में रह सकते हैं और जरूरी नहीं कि पास कोई कोरोना मरीज हो, तभी संक्रमण हो... यह एक ऐसा खुलासा है, जिसकी पड़ताल आने वाले दिनों में विश्व स्वास्थ्य संगठन बहुत गहराई से करेगा और उसके बाद ही वह किसी ठोस नतीजे पर पहुंचेगा... ठोस नतीजे पर पहुंचना जरूरी है, क्योंकि अगर वाकई हवा के जरिए कोरोना फैल रहा है, तो फिर मास्क लगाने, बार-बार हाथ धोने और शारीरिक दूरी बरतने के बुनियादी उपायों के आगे भी हमें सोचना होगा... विश्व स्वास्थ्य संगठन को इस खतरे से आगाह करने के लिए 239 वैज्ञानिकों को उसे खुला पत्र लिखना पड़ा है... उन सभी वैज्ञानिकों का आभार, जिन्होंने कुछ देर से ही सही, लेकिन यह जरूरी रहस्योद्घाटन खुद आगे बढ़कर किया है... वैज्ञानिकों से ऐसी ही जरूरी दूसरी कोशिशों की उम्मीद है... आज दुनिया में संक्रमितों की संख्या 1.20 करोड़ के करीब पहुंच चुकी है और जान गंवाने वालों की संख्या 5.50 लाख पार करने वाली है... ऐसे निर्णायक समय में कोरोना से जुड़ी छोटी से छोटी जानकारी भी लोगों के लिए बहुत कारगर हो सकती है... हवा से सावधान रहने की जरूरत है... भीड़भाड़, बंद, कम हवादार जगहों पर खतरा ज्यादा है। ऐसी खबरें लगातार आ रही हैं कि लोग घर से बाहर निकलने के बावजूद मास्क नहीं लगा रहे हैं... शारीरिक दूरी रखने की अनिवार्यता के पालन में कोताही बरत रहे हैं... भारत में कोरोना के दिनोंदिन बढ़ते आंकड़े गवाह हैं कि सावधानी में कमी हुई है... लोग अभी भी यही सोच रहे हैं कि मुझे नहीं होगा... इसी सोच की वजह से संक्रमितों की संख्या आठ लाख के करीब पहुंच चुकी है... अत: इस अदृश्य खतरे से बचना होगा...
दृष्टिकोण
विकास, अपराध और सवाल...
उत्तरप्रदेश की राजनीति में तूफान खड़ा करने का काम गैंगेस्टर विकास दुबे ने किया है... जिसने एक ही झटके में 8 पुलिसकर्मियों को मौत के घाट उतार दिया था... विचार किया जा सकता है कि जब पुलिसकर्मियों को निशाना बना रहे इस कुख्यात अपराधी ने उसके परिणामों और आगे-पीछे की भयावह प्रतिक्रिया का भी अनुमान लगाया होगा... और उसे इतना विश्वास जरूर रहा होगा कि जिन्होंने उसे पैदा किया है, यानी अपराध की दुनिया में इतना बड़ा आकार दिया है और हर बार अपराध करने के बाद वह खुला घुमता रहा है, जब उस समय उसका किसी ने कुछ नहीं बिगाड़ा, क्योंकि उसी दौर में मायावती, अखिलेश और योगी की सरकारें देखकर वह अपने आपराधिक कृत्यों को नया आयाम देने में पीछे नहीं रहा... ऐसे में कहा जा सकता है कि इस कुख्यात गैंगेस्टर जिसने बिकरुगांव में मौत का तांडव रचा, वह कुछ सोच-समझकर ही महाकाल की दहलीज पर पहुंचा होगा... आखिर उसके पहुंचने में उप्र से लेकर मप्र तक के कौन-कौन लोग सहयोगी बने..? और किस तरह से सहयोग किया..? या फिर यह महज संयोग ही है कि वह बचने-बचाने की तरकीब में पकड़ा गया... या अपराधी विकास अपने को मुठभेड़ में एनकाउंटर में मारे जाने से बचाने के लिए इस तरह के हथकंडे अपनाकर आत्मसमर्पण को मजबूर हुआ... इसमें खांकी से लेकर खादी तक का कितना सहयोग रहा, इन सब जटिल सवालों के जवाब खोजे जाना चाहिए... ताकि उत्तरप्रदेश की भांति अब किसी अन्य प्रदेश में इस तरह का आपराधिक विकास देखने को नहीं मिले... इसके लिए जरूरी है कि इसकी कड़ी सुरक्षा के साथ पुराने पापों की फाइल को खोलकर योगी सरकार सख्त कार्रवाई के साथ उन सभी लोगों को कड़ा सबक सिखाए, जिन्होंने ऐसे आपराधिक विकास को जन्म दिया...