जीवन में उत्थान की कसौटी हैं चुनौतियां
   Date10-Jul-2020

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धर्मधारा
क म्फर्ट जोन से बाहर निकलने का अर्थ ऐसे कार्यों को हाथ में लेना है, जो आपको एक ढर्रे के जीवन से बाहर निकालते हैं, जिनमें आप सहज अनुभव नहीं करते, जो आपकी क्षमता एवं योग्यता को चुनौती देने वाले प्रतीत होते हैं, लेकिन जिनको आजमाने से आपकी अंतर्निहित क्षमताएं प्रकट होती हैं। हालांकि यह भी एक कला है, जिसमें विवेक के आधार पर चुनौतियों का वरण किया जाता है। इससे ऐसी अतिवादिता या हठवादिता से सावधान रहना होता है, जिसके परिणाम स्वयं के लिए घातक हों या समाज के लिए हितकर न हों।
इस तरह कन्फर्ट जोन से बाहर निकलकर चुनौतियों का सामना न केवल उत्पादकता को बढ़ाता है, बल्कि इससे व्यक्ति की रचनात्मक क्षमता में वृद्धि होती है और भविष्य में आने वाली अनिश्चितताओं से जूझने की क्षमता बढ़ती है। इस तरह नित नई चुनौतियों का सामना करने इनसे कुछ सीखने, व्यक्तित्व के नए आयामों के उद्घाटन के साथ जीवन - विकास पथ पर बढ़ती एक रोमांचक यात्रा बन जाता है। निश्चित रूप में इसके साथ प्रसन्नता की बढ़ोतरी होती है और जीवन अधिक संतोषदायक बनता है।
इस तरह जीवन में उत्कर्ष के इच्छुक व्यक्तियों के लिए एक ही रास्ता है, वह है चुनौतियों का सहर्ष सामना करते हुए नित-नवीन बुलंदियों को हासिल करना। अपने भय-दुर्बलताओं को आँखों में देखकर इन्हें काबू करना। यदि चुनौतियां नहीं हैं तो स्वयं ही इनका निर्माण करना, ऐसी परिस्थितियों में स्वयं को झोंक देना। ऐसे साहसिक पथ पर बढ़ते हुए व्यक्ति नित नए शिखरों का आरोहण करता है और संतोषभरी उपलब्धि के गहन भाव के साथ स्वयं को धन्य अनुभव करता है, क्योंकि जो कर सकता था, वह उसने किया।