ऐसा व्यवहार राष्ट्रीय अपराध...
   Date29-Jun-2020

vishesh lekh_1  
कांग्रेस का वर्तमान व्यवहार राष्ट्रहित में कतई नहीं माना जा सकता, विशेष रूप से सोनिया और राहुल का लगातार सरकार पर हमलावर होना यह बताता है कि वे चीन के मामले में राष्ट्रीय दृष्टि से देखने के बजाय अपनी व्यक्तिगत स्वार्थ-हानि से आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं... क्या कारण है कि चीन को करारा जवाब देने के बजाय माँ-बेटे सरकार के साथ सेना एवं राष्ट्रीय सुरक्षा से खिलवाड़ वाले बयानों से बाज नहीं आ रहे हैं... जबकि अब तो सोनिया-राहुल के बयानों में सहयोगी दल राकांपा ही नहीं कांग्रेसी भी मुँह मोड़ रहे हैं... भारत की सरहदें खास तौर से दो पड़ोसियों की अलग-अलग रणनीति का निशाना बनती रही हैं... पाकिस्तान जहां अपनी दहशतगर्दी की विदेश नीति को अंजाम देने के लिए इससे घुसपैठ की ताक में रहता है, तो चीन विस्तारवादी रणनीति के तहत इसके अतिक्रमण के फिराक में... बीजिंग अब एक दबाव के तौर पर भी इस नुस्खे को आजमाने लगा है... यह महज संयोग नहीं है कि पिछले दो महीने से कोविड-19 के संक्रमण के मामले में वह डब्ल्यूएचओ में घिरता हुआ महसूस कर रहा था और लगभग इसी समय उसने लद्दाख में अपनी सक्रियता बढ़ाई, यह जानते हुए कि भारत डब्ल्यूएचओ में एक जिम्मेदार ओहदे पर बैठ रहा है... इसलिए उससे लगी सीमाओं को लेकर हमें एक मुकम्मल नीति बनानी होगी... इसमें दो राय नहीं कि भारत और चीन आज दुनिया की दो बड़ी शक्तियां हैं... उनमें सीमित सैन्य टकराव भी किसी एक के लिए कम नुकसानदेह नहीं होगा... इसलिए समझदारी इसी में है कि दोनों देश बातचीत से अपने मतभेदों को पाटें और ऐसा माहौल बनाएं, जिससे सीमा विवाद पर ठोस बातचीत का रास्ता खुले... महामारी से कराह रही मानवता को आज इन दोनों से सर्वश्रेष्ठ उदाहरण की आशा है.... भारत ऐसा कर भी रहा है.., लेकिन चीन ने खुराफाती कार्यों-बयानों से आगे नहीं सोचा है... विपक्ष के साथ ही कांग्रेस एवं सोनिया-राहुल को समझना होगा कि उनका व्यवहार राष्ट्रीय अपराध की श्रेणी में आता है... जिससे उसे बचना चाहिए... वरना 50 सीटें अगली बार 25 हो जाएंगी... अपने 20 जवानों की शहादत से भारतीय जनता बेहद आहत और आक्रोशित है... यह स्वाभाविक भी है, क्योंकि चीन से लगी सरहद पर दशकों से शांति थी, जिसे चीन ने भंग किया... हाल के दिनों में पूर्वी लद्दाख में उसका रवैया दादागिरीभरा रहा है और भारत को यह कतई मंजूर नहीं है... लेकिन जैसा कि अक्सर होता है, हरेक देश अपनी सरहद की हिफाजत के लिए सर्वोच्च पराक्रम दिखाता है, और अंतत: प्रतिपक्षियों को वार्ता की मेज पर बैठना पड़ता है... इसलिए श्रेष्ठतम रणनीति यही है कि नुकसान के बाद वार्ता करने की बजाय बातचीत के जरिए नुकसान की आशंका निर्मूल कर दी जाए... जब तक दोनों देशों के बीच सीमा विवाद का निपटारा निर्णायक रूप से नहीं होता, तब तक ऐसी स्थितियों की आशंका से बचने का एकमात्र रास्ता यही है कि सीमा पर हम अपने बुनियादी ढांचे को मजबूत करें... निस्संदेह, हाल के वर्षों में इस दिशा में काम हुए भी हैं...
दृष्टिकोण
बढ़ती तेल की कीमतें चिंतनीय...
इसमें कोई दो राय नहीं है कि कोरोनाकाल में महंगाई को ही अनेक तरह से पंख लग गए हैं, क्योंकि तालाबंदी के चलते लंबे समय तक सामानों की आपूर्ति दोगुने दाम पर चोरी-छिपे लोगों ने की... अब पेट्रोल-डीजल के दामों में लगातार वृद्धि का असर भी आगे जाकर महंगाई के रूप में देखने को मिल सकता है... पेट्रोल-डीजल की कीमतों का निरंतर करीब एक माह से बढ़ते जाना जितना ध्यान खींच रहा था, उससे कहीं ज्यादा डीजल की कीमत ने चौंका दिया। अगर राष्ट्रीय राजधानी की ही बात करें तो दिल्ली क्षेत्र में डीजल अब पेट्रोल से लगभग 12 पैसे महंगा हो गया है। आखिर ऐसा क्यों हुआ? इसका सबसे बड़ा कारण टैक्स का असमान होना है। देश में आमतौर पर पेट्रोल अभी भी डीजल से महंगा है, लेकिन दिल्ली में डीजल पर अधिक टैक्स होने के कारण उसकी कीमत पेट्रोल से आगे निकल गई है। तत्काल पहल करनी चाहिए, ताकि डीजल और पेट्रोल के बीच अंतर बना रहे। हमें यह ध्यान रखना होगा कि किसी समय डीजल और पेट्रोल के बीच 20 से 30 रुपए का भी अंतर हुआ करता था। यह अंतर इसलिए था, क्योंकि डीजल का उपयोग आमतौर पर सिंचाई, सवारी या माल ढोने वाले भारी वाहनों में होता है। डीजल की कीमतों को सरकारें संभालती थीं, क्योंकि डीजल की कीमत बढऩे का सीधा असर किसानों व महंगाई पर पड़ता था। इन दो ईंधनों के बीच अंतर बने रहने में ही अर्थव्यवस्था की भलाई है। यह नहीं भूलना चाहिए कि जो निजी यात्री वाहन डीजल से चलते हैं, उनकी कीमत भी पेट्रोल वाले वाहनों से कहीं अधिक होती है, इसलिए भी पेट्रोल और डीजल की कीमतों का समान हो जाना अपनी ही परिवहन या वाहन नीति के विरुद्ध है। ऐसे में अन्य राज्यों में भी पेट्रोल-डीजल पर करों के कारण लोगों को कितना महंगा तेल खरीदना पड़ रहा है, विचार किया जा सकता है...