स्थितप्रज्ञ
   Date29-Jun-2020

prernadeep_1  H
प्रेरणादीप
स्वा मी रामतीर्थ अमेरिका प्रव्रज्या हेतु पहुँचे हुए थे। उनका उद्बोधन प्रसिद्ध चिंतकों व विचारकों के मध्य हुआ तो सभी ने एक स्वर में उनके अद्भुत व्यक्तित्व एवं प्रकांड पांडित्य की प्रशंसा की। उद्बोधन के पश्चात वे जिन महिला के घर रुके हुए थे, उनके घर पहुँचे तो उन महिला से बोले- 'बहन! आज ईश्वर ने इस नाचीज को अन्यथा ही बहुत प्रशंसा दिलवाई।Ó कुछ दिनों के उपरांत वे न्यूयार्क शहर के ब्रौंक्स क्षेत्र से गुजर रहे थे कि वहां उनकी वेशभूषा को देखकर कुछ अराजक तत्वों की भीड़ लग गई। उसमें से कुछ उन पर छींटाकशी करने लगे तो कुछ ऐसे भी थे, जो अन्यथा ही उनके साथ दुव्र्यवहार करने लगे। घटना की खबर जब महिला को लगी तो वे कुछ साथियों को लेकर स्वामीजी को लेने पहुँची। रामतीर्थ उसी निर्विकार भाव से बोले - 'बहन! आप हस्तक्षेप न करो। आज ईश्वर का अपने इस भक्त को अपमान से भेंट कराने का मन है। भगवान के भक्त के लिए मान क्या और अपमान क्या?Ó