अधिकारी माइंड सेट बना लें, गरीब के अधिकार को छिनने नहीं दूंगा-शिवराज
   Date28-Jun-2020

df8_1  H x W: 0
भोपाल द्य 27 जून (वा)
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने कहा है कि अधिकारी माइंड सेट बना लें, गरीब के अधिकारों को वे छिनने नहीं देंगे।
श्री चौहान मंत्रालय में वनाधिकार पट्टों के निराकरण की समीक्षा कर रहे थे। उन्होंने कहा कि कलेक्टर एवं वनमंडलधिकारी ध्यान से सुन लें, कोई भी वनवासी जो 31 दिसंबर 2005 को या उससे पहले से भूमि पर काबिज है, उसे अनिवार्य रूप से भूमि का पट्टा मिल जाए। कोई पात्र वनवासी पट्टे से वंचित न रहे। काम में थोड़ी भी लापरवाही की, तो सख्त कार्रवाई होगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में बड़ी संख्या में 358 339 वनवासियों के वनाधिकार दावों को निरस्त किया जाना दर्शाता है कि अधिकारियों ने कार्य को गंभीरता से लिया ही नहीं है। वनवासी समाज का ऐसा वर्ग है जो अपनी बात ढंग से बता भी नहीं पाता, ऐसे में उनसे पट्टों के साक्ष्य मांगना तथा उसके आधार पर पट्टों को निरस्त करना नितांत अनुचित है। सभी कलेक्टर एवं डीएफओ समस्त प्रकरणों का पुनरीक्षण करें एवं एक सप्ताह में रिपोर्ट दें। वनवासियों को पट्टा देना ही है। बैठक में वनाधिकार दावों की समीक्षा में यह तथ्य सामने आया कि बहुत से ऐसे प्रकरण हैं जिनमें आदिवासी राजस्व भूमि पर काबिज है। मुख्यमंत्री ने मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैंस को निर्देश दिए कि परीक्षण कराकर ऐसे वनवासियों को राजस्व भूमि के पट्टे प्रदान किए जाएं। बैठक में मुख्यमंत्री ने जिलेवार वनाधिकार पट्टों के दावों की समीक्षा की। मुरैना जिले की समीक्षा में पाया गया कि वहां 160 दावों में से 153 दावे निरस्त कर दिए गए। इस पर मुख्यमंत्री ने सख्त नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि अधिकारी पट्टे देना चाहते हैं कि नहीं। गरीबों के लिए यदि इस प्रकार का कार्य किया तो सख्त कार्रवाई होगी। कटनी एवं सिवनी जिलों में भी कार्य में खराब प्रगति पर चेतावनी दी गई। श्री चौहान ने समीक्षा में पाया कि बड़वानी जिले में 10 हजार 438 वनाधिकार पट्टों के दावों में से 9764 वनवासियों के पट्टे स्वीकृत किए गए। इस पर मुख्यमंत्री ने बड़वानी जिले के कलेक्टर एवं डीएफओ.की सराहना करते हुए बधाई दी। इंदौर जिले को भी इस कार्य में अच्छी उपलब्धि के लिए बधाई दी गई।