चीन से पहले धागा लेना बंद किया, अब मशीनरी भी नहीं लेंगे
   Date28-Jun-2020

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बुरहानपुर द्य स्वदेश
पड़ोसी मुल्क चीन की नापाक हरकतों को देखते हुए अब चीन से स्थानीय टेक्सटाइल उद्योग संचालक, बुनकर मशीनरी भी नहीं खरीदेंगे। इससे पहले उद्योगपतियों ने चीन से धागा लेना बंद कर दिया था। अब मशीनरी को लेकर भी प्रधानमंत्री मोदी के मिशन लोकल को वोकल का समर्थन किया है।
चीन की हरकतों से नाराज बुरहानपुर के टेक्सटाइल व्यवसायियों और बुनकरों ने चीन से आने वाले पावरलूम, मशीनरी से तौबा करने का मन बना लिया है। मप्र का सबसे बड़ा पावरलूम सेंटर बुरहानपुर है। यहां 50 हजार पावरलूम संचालित होते हैं, जिस पर बुनकर रोजाना 40 लाख मीटर कपड़ा तैयार करता है। यह कपड़ा देशभर के अलावा विदेशों में भी निर्यात होता है। इन पावरलूम से करीब 70 हजार बुनकर व मजदूर अपना रोजगार हासिल करते हैं। वहीं करीब 2 लाख की आबादी प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से इसी पावरलूम उद्योग से रोजगार हासिल करती है।पावरलूम उद्योग बुरहानपुर की रीढ़ की हड्डी है तो गलत नहीं होगा, लेकिन कोरोना महामारी और तालाबंदी के चलते इस उद्योग की कमर ही टूट गई। अब अनलॉक 1.0 में धीमी गति से ही सही, लेकिन पावरलूम उद्योग
रफ्तार पकड़ रहा है। इस बीच पड़ोसी देश चीन की सीमा पर की गई हरकतों से बुरहानपुर के टेक्सटाइल व्यवसायी और बुनकर खासे नाराज हैं।
प्रधानमंत्री मोदी के अभियान को मिलेगी सफलता - स्वदेशी आंदोलन से जुड़े राजेश बजाज ने भी इस फैसले का समर्थन किया है। उन्होंने कहा- राजीव दीक्षित ने यह छोटे से उत्पाद से लेकर बड़े उत्पादों के लिए यह अभियान चलाया था, जो आज सार्थक हो रहा है। उन्होंने कहा- चीन से आने वाले आधुनिक पावरलूम और कपड़े के मुकाबले देश में बनने वाले पावरलूम और कपड़े काफी महंगे हुआ करते थे, जिससे टेक्सटाइल उद्योगपति चीन से पावरलूम व कपड़ा आयातित करते थे, लेकिन अब आयात बंद होगा तो देश में आधुनिक पावरलूम व कपड़े की मांग बढ़ेगी और जब मांग बढ़ेगी तो स्वाभाविक है लागत भी घटेगी और उनका दाम भी कम होगा।