लद्दाख में एलएसी के पास सेना और वायुसेना का युद्धाभ्यास, गरजे भारत के फाइटर प्लेन
   Date27-Jun-2020

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लेह द्य 26 जून
भारत-चीन सीमा पर पूर्वी लद्दाख क्षेत्र में गलवान घाटी व देपसांग में भारत की चीन से तनातनी के बीच लेह में भारतीय सेना और वायुसेना ने शुक्रवार को साझा युद्धाभ्यास किया है। इस युद्धाभ्यास में फाइटर और ट्रांसपोर्ट विमान शामिल हुए। युद्धाभ्यास का मकसद दोनों सेनाओं के बीच तालमेल बढ़ाना था। इस युद्धाभ्यास में सुखोई लड़ाकू विमान और चिनूक हेलिकॉप्टर शामिल हुए। उधर सेना प्रमुख नरवणे ने दो दिन का अपना लेह-लद्दाख दौरा पूर्ण कर दिल्ली में गृहमंत्री राजनाथसिंह के साथ लम्बी मंत्रणा की। समझा जाता है कि सीमा पर ताजा हालात से सेना प्रमुख से रक्षामंत्री को अवगत कराया। भारतीय सेना को मालूम है कि वर्तमान गतिरोध के कारण लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) पर रक्षा कवच को कम नहीं किया जा सकता है. अभी भी गलवान घाटी, पैंगॉन्ग झील और दौलत बेग ओल्डी इलाके में चीनी सेना की तैनाती पहले जैसी बनी है. ऐसे में भारत किसी स्तर पर अपनी तैनाती को कम नहीं रखना चाहता है। लद्दाख के लेह क्षेत्र में भारतीय सेना और वायुसेना का एक बड़ा युद्धाभ्यास चल रहा है. इसमें भारतीय सेना के सुखोई-30 एमकेआई अत्याधुनिक लड़ाकू विमान हिस्सा ले रहे हैं. साथ ही सेना की रसद सामग्री और सिपाहियों को तेजी से एक जगह से दूसरी जगह ले जाने के लिए हरक्यूलिस और अलग-अलग मालवाहक विमान भी हिस्सा ले रहे हैं।
इस युद्धाभ्यास में चिनूक हेलिकॉप्टर, मी-17 हेलिकॉप्टर भी हिस्सा ले रहे हैं। युद्धाभ्यास के दौरान सुखोई-30 ने आसमान में सुरक्षा घेरा बनाया, जिसके बाद सेना के मालवाहक विमान रसद, तोपें और सिपाहियों को एक जगह से दूसरे जगह पहुंचाने का कोआर्डिनेशन ऑपरेशन चल रहे हैं।
लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) पर तनाव के बीच भारतीय सेना और वायुसेना का युद्धाभ्यास काफी अहम है. बताया जा रहा है कि सेना का ऐसा अभ्यास यहां निरंतर चलता रहेगा. पिछले दिनों चीनी सेना के युद्धाभ्यास का भी वीडियो सामने आया था।