पाक पर भी नकेल कसने की तैयारी...
   Date25-Jun-2020

vishesh lekh_1  
भारत-चीन के साथ ही भारत-पाक के बीच भी तनावपूर्ण स्थिति निर्मित हो रही है, क्योंकि पाकिस्तान अपने प्रायोजित आतंकवाद को रोकने के किसी भी तरह के प्रयास करता नजर नहीं आ रहा है... सही मायने में भारत और पाकिस्तान के बीच यह डिप्लोमेटिक स्तर पर तनाव बढऩे जैसा है... इसलिए भारत सरकार भी पाकिस्तान के दूतावास में भारत के खिलाफ जासूसी करने वाले कर्मचारियों को छोडऩे के मूड़ में नहीं है... भारत में पाकिस्तान दूतावास के स्टाफ में 50 फीसदी की कटौती के आदेश दिए है... क्योंकि पाकिस्तानी दूतावास से भारत के खिलाफ सुरक्षा संबंधी एवं अन्य गोपनीय मामलों में जासूसी के पहले भी सबूत मिल चुके हैं... 31 मई को भी दिल्ली पुलिस ने पाक दूतावास से दो कर्मचारियों को गिरफ्तार किया था... अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर संघर्ष विराम का उल्लंघन जैसे पाकिस्तान की आदत बन चुकी है... यह लगभग रोज की बात हो गई है जब पाकिस्तानी सेना सरहद पर बेवजह गोलीबारी करती है... उसकी ऐसी हरकतों से कभी सीमा पर बसे गांवों के लोग मारे जाते हैं, तो कभी भारतीय सेना के जवान... गत दिनों राजौरी और नौशेरा में पाकिस्तानी सेना ने मोर्टार दागे, जिसमें भारतीय सेना के एक हवलदार की जान चली गई... पिछले चार-पांच सालों में बार-बार चेतावनी के बावजूद पाकिस्तान हजारों बार संघर्ष विराम का उल्लंघन कर चुका है... पिछले लगभग दस महीनों में, जबसे कश्मीर से अनुच्छेद तीन सौ सत्तर खत्म हुआ है, पाकिस्तानी सेना ने बौखलाहट में सीमा पर ऐसी गतिविधियां तेज कर दी हैं... शायद ही कोई हफ्ता हो, जब वह गोलीबारी न करती हो... इसकी कुछ वजहें साफ हैं... अक्सर पाकिस्तानी सेना गोलीबारी तब करती है, जब उधर से आतंकियों को भारतीय सीमा में प्रवेश कराने की कोशिश की जाती है... पर पिछले डेढ़-दो सालों से कश्मीर में सुरक्षाबलों और खुफिया एजेंसियों की मुस्तैदी और आतंकवादी गतिविधियों के खिलाफ सघन अभियान चलाने के बाद आतंकवादी घटनाओं पर काफी हद तक काबू पा लिया गया है... अलगाववादी संगठनों पर अंकुश लगने और स्थानीय लोगों का आतंकवादियों को अपेक्षित सहयोग न मिल पाने की वजह से उनमें हताशा है... स्वाभाविक ही इससे पाकिस्तानी सेना बौखलाई है... संघर्ष विराम का उल्लंघन काफी कुछ इसी हताशा का नतीजा है... पाकिस्तानी सेना की भारतीय सेना को उकसाने के पीछे की रणनीति भी साफ रही है... यह तो पाकिस्तानी हुक्मरान भी जानते हैं कि उनकी सेना भारत से सीधे युद्ध में मुकाबला नहीं कर सकती, पर इस तरह उकसावे के मकसद से गोले दाग कर वे भारतीय सेना का ध्यान बंटाने और दहशतगर्दों की घुसपैठ कराने का प्रयास करती रही है... मगर भरतीय सेना ने उसकी रणनीति अच्छी तरह समझ ली है और नाहक जवाबी कार्रवाई करने के बजाय संयम से काम लेते हुए, उसके असल मंसूबों को कामयाब होने से रोकती रही है...
दृष्टिकोण
कोरोना से निपटने की सतर्क पहल...
वैश्विक महामारी कोरोना से निपटने के लिए केन्द्र से लेकर राज्य सरकारें युद्ध स्तर पर अपनी रणनीतियों को अमल में ला रही है... इस संदर्भ में दो पहलू देखना महत्वपूर्ण हो जाता है... जिससे यह ज्ञात होता है कि भारत में इस महामारी के खिलाफ अपने चिकित्सीय संसाधनों, अस्पतालों एवं आवश्यक पहलुओं का बहुत ही द्रुत गति से समाधान किया है... चीन के सबसे बड़े अस्पताल से भी 10 गुना बड़ा दिल्ली का कोविड केयर सेंटर इस बात की मिसाल है कि भारत अगर ठान ले तो वह हर तरह की समस्या से निपटने को तैयार है... संभवत: दिल्ली स्थित इस कोविड केयर सेंटर का गुरुवार को शुभारंभ हुआ... जिसमें करीब दो हजार बेड के संचालन की तैयारी है... 1400 से अधिक नर्सों एवं 800 सामान्य डॉक्टरों और 70 विशेषज्ञों-चिकित्सकों की इस सेंटर में उपलब्धता सुनिश्चित हुई है... वैसे तो अनौपचारिक रूप से इस केन्द्र का शुभारंभ गुरुवार को हुआ, लेकिन इसे 3 जुलाई तक पूर्ण रूप से प्रारंभ करने की योजना है... क्योंकि इस क्वॉरेंटाइन सेंटर में 10 हजार 200 से अधिक मरीजों को एक साथ रखा जा सकता है... चीन के सेंटर में फिलहाल 1 हजार मरीजों को रखने की ही सुविधा है, जिसे चीन ने फरवरी में तैयार किया था... कहने का तात्पर्य यही है कि सरकार चाहे और ठान ले, तो वह हर समस्या से लड़ सकती है... ठीक इसी तरह से नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने भी बताया कि कोरोना काल में चुनिंदा देशों के साथ सीमित अंतर्राष्ट्रीय उड़ानों को मंजूरी दी जा सकती है.., जिसमें अमेरिका, जर्मनी, फ्रांस से यात्री उड़ानों के परिचालन संबंधी अनुरोधों पर विचार किया जा रहा है... मतलब यह पर भी अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कोरोना से लडऩे की सतर्कता का पहला ध्यान रखने की रणनीति बनाई गई है...