पुरी में रथयात्रा परम्परा यथावत
   Date23-Jun-2020

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नई दिल्ली द्य 22 जून।
सुप्रीम कोर्ट ने जगन्नाथपुरी में भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा निकालने की अनुमति दे दी है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि स्वास्थ्य मुद्दों के साथ बिना समझौता किए और मंदिर समिति, राज्य और केंद्र सरकार के समन्वय के साथ रथयात्रा आयोजित की जाएगी।
सुप्रीम कोर्ट ने 18 जून को हुई सुनवाई में पुरी में 23 जून को होने वाली रथयात्रा को कोरोना महामारी के कारण रोक लगा दी थी। कोर्ट के फैसले को लेकर कई पुनर्विचार याचिकाएं लगाई गई थी, जिस पर आज सुनवाई करते हुए कोर्ट ने अपने पुराने फैसले को पलटते हुए जगन्नाथ रथयात्रा को कुछ शर्तों के साथ निकालने की अनुमति दे दी है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने नए आदेश में कहा कि अगर ओडि़शा सरकार को लगता है कि कुछ चीजें हाथ से निकल रही हैं तो वो यात्रा को रोक सकती है। इससे पहले 18 जून को सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने कहा था- यदि हमने इस साल रथयात्रा की इजाजत दी तो भगवान जगन्नाथ हमें माफ नहीं करेंगे। महामारी के दौरान इतना बड़ा समागम नहीं हो सकता है। बेंच ने ओडि़शा सरकार से यह भी कहा कि कोरोना
वायरस को फैलने से रोकने के लिए राज्य में कहीं भी यात्रा, तीर्थ या इससे जुड़े गतिविधियों की इजाजत ना दें। इधर सुप्रीम कोर्ट के फैसले से पहले केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने इस साल पुरी में भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा को लेकर अनिश्चितता के बीच सोमवार को जगन्नाथ मंदिर प्रबंधन समिति के अध्यक्ष गजपति महाराजा दिव्यसिंह देव से बात की। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष समीर मोहंती ने बताया कि शाह ने वर्ष 1736 से अनवरत चल रही रथयात्रा के साथ जुड़ी परंपरा पर चर्चा की। उन्होंने एक ट्वीट में कहा- भगवान जगन्नाथ के अनन्य भक्त प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देश पर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने गजपति महाराज से बात की। मोहंती ने बताया- मुझे आशा है कि उच्चतम न्यायालय इस साल पुरी में रथयात्रा आयोजित करने की मंजूरी दे देगा। उन्होंने कहा कि शाह ने उत्सव के साथ जुड़ी धार्मिक भावनाओं को लेकर भी देव के साथ बातचीत की।